Wednesday, December 7, 2022

अमृत महोत्सव के दौर में प्रतिरोध : प्रलेस का दो दिवसीय आयोजन

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दिल्ली। ‘अमृत महोत्सव के दौर में प्रतिरोध’ आज के दौर में बेहद महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक विषय पर प्रगतिशील लेखक संघ की दिल्ली इकाई 8 और 9 अगस्त को दो दिवसीय आयोजन कर रही है। जिसमें चार सत्रों में अलग—अलग विषयों पर विचार—गोष्ठी, कविता पाठ और समकालीन कथा साहित्य पर परिचर्चा होगी। जिसमें उत्तर भारत के प्रमुख साहित्यकार, पत्रकार, विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे। राजधानी दिल्ली के एवाने ग़ालिब ऑडिटोरियम में 8 अगस्त को सुबह 9 बजकर 30 मिनिट पर इस भव्य आयोजन का उद्घाटन होगा। उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष मंडल में प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष विभूति नारायण राय, राष्ट्रीय महासचिव सुखदेव सिंह सिरसा, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राजेन्द्र राजन, लेखक राजेन्द्र शर्मा शामिल हैं। वहीं उद्घाटन वक्तव्य वरिष्ठ पत्रकार और पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया के संस्थापक संपादक पी.साईनाथ का होगा। स्वागत भाषण वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी और कार्यक्रम का संचालन मिथिलेश करेंगे।

उद्घाटन सत्र के तुरंत बाद प्रथम सत्र शुरू होगा। जिसके अध्यक्ष मंडल में वरिष्ठ कथाकार असगर वज़ाहत, आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी, अवधेश प्रधान और दलित चिंतक जयप्रकाश कर्दम शामिल हैं। ‘क्या क्या तोड़ता है बुलडोजर’ विषय पर आयोजित इस पहले सत्र के वक्ता वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी, डॉ. वासंथी रमन और गांधीवादी विचारक अपूर्वानंद होंगे। वहीं कार्यक्रम का संचालन उत्तर प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव, ‘वर्तमान साहित्य’ के संपादक संजय श्रीवास्तव करेंगे। पहले दिन का दूसरा सत्र दोपहर तीन बजे से शुरू होगा। इस सत्र में कविता पाठ होगा। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना करेंगे। प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े प्रमुख कवि और कवियित्री कुमार अंबुज, कृष्ण कल्पित, सविता सिंह, विनोद पदरज, विनीत तिवारी, संध्या निवोदिता, वंदना चौबे, नूतन आनंद, अविनाश मिश्र, नोमान शौक़ (उर्दू), डॉ. मोहनजीत (पंजाबी) और सुरजीत जज (पंजाबी) इसमें अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ करेंगे। काव्यपाठ का संचालन राजीव कुमार शुक्ल के ज़िम्मे है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन यानी 9 अगस्त को सुबह 10 बजे ‘युद्ध कोई विकल्प नहीं है, अंतिम भी नहीं’ विषय पर एक विचार—गोष्ठी होगी। जिसमें मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार, चर्चित वेबसाइट ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन होंगे। वहीं अन्य वक्ताओं में लेखक विभूति नारायण राय, प्रो.ईश मिश्रा, राजाराम भादू और भंवर मेघवंशी शामिल हैं। कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रेमचंद गांधी का और संचालन कवि और पत्रकार नथमल शर्मा करेंगे। जबकि इस सत्र के अध्यक्ष मंडल में जाने—माने अर्थशास्त्री कमल नयन काबरा, कवि—वैज्ञानिक गौहर रज़ा, तजुर्मा निगार अर्जुमंद आरा और रवीन्द्र नाथ राय का नाम है। कार्यक्रम का चौथा और अंतिम सत्र दोपहर तीन बजे से शुरू होगा। जिसमें समकालीन कहानी पर बात होगी। ‘समकालीन कथा साहित्य में प्रतिरोध’ विषय पर आयोजित इस सत्र में देश के प्रसिद्ध कथाकार और आलोचक क्रमश: उदय प्रकाश, शिवमूर्ति, अखिलेश, हेतु भारद्वाज, वीरेन्द्र यादव, शरण कुमार लिंबाले, रोहिणी अग्रवाल, ख़ालिद जावेद (उर्दू), आशीष त्रिपाठी, रूपा सिंह और राजकुमार अपने—अपने विचार साझा करेंगे। विचार—गोष्ठी का संचालन लेखिका अणुशक्ति सिंह करेंगी। वहीं इस दो दिवसीय आयोजन का धन्यवाद ज्ञापन फ़रहत रिज़वी देंगी। गौरतलब है कि दिल्ली प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष फ़िलवक़्त रामशरण जोशी और महासचिव फ़रहत रिज़वी हैं।  वहीं इस पूरे आयोजन के संयोजक कथाकार ज्ञान चन्द बागड़ी हैं।

(ज़ाहिद खान वरिष्ठ पत्रकार हैं और मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रहते हैं।)

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