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बिहार चुनाव परिणाम: महागठबंधन की हार या जनमत का अपहरण?

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम भले ही एनडीए के पक्ष में रहा पर नतीजों को लेकर सवाल उठते रहेंगे। चुनावी अभियान में महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा रहे तेजस्वी यादव की सभाओं में उमड़ रही भीड़ व मतदान के बाद एग्जिट पोल ने यह तस्वीर बना दी थी कि एनडीए के हाथ से यह चुनाव निकल चुका है। यहीं तक नहीं मतगणना शुरू होने के 2 घंटे बाद तक की तस्वीर महागठबंधन के इर्द-गिर्द ही घूमती हुई नजर आई।

लेकिन ज्यों दोपहरी चढ़ने के साथ ही शाम ढलने लगी अचानक बाजी एनडीए की ओर पलट गई। जिसका अंत एनडीए की जीत के रुप में सामने आया। इस पूरे क्रम में खास बात यह रही कि वे सारे नतीजे देर शाम के बाद आने शुरू हुए जिन पर हार जीत का अंतर 1000 के अंकों से कम था। इसको लेकर महागठबंधन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। नैतिकता व नीतिगत आधार पर एनडीए तथा सरकारी मशीनरी को संतोषजनक जवाब देना होगा। जिससे कि चुनाव परिणाम को लेकर लगाए जा रहे अटकलों पर विराम लग सके।

मतगणना में धांधली की शिकायत महागठबंधन ने चुनाव आयोग से भी की है। यह आरोप ऐसे ही नहीं शुरू हो रहे हैं , कहा जा रहा है कि मतगणना के दिन दोपहर में भाजपा हाईकमान की टीम के प्रधानमंत्री के बाद दूसरा चेहरा कहे जाने वाले एक नेता ने जदयू प्रमुख नीतीश कुमार को फोन किया। इसके बाद से ही लगातार मतगणना का रुझान अचानक एनडीए के पक्ष में बढ़ता चला गया। कहा जा रहा है कि 1000 से कम मतों के सारे नतीजे रात में ही आने शुरू हुए। सवाल यह उठता है कि जब दोपहर बाद से राज्य भर से परिणाम आना शुरू हुआ तो नतीजा कम अंतर से हो या अधिक के अंतर से रिजल्ट आना चाहिए था। लेकिन 1000 से कम अंतर के दर्जनभर से अधिक सीटों के परिणाम रात में क्यों घोषित हुए।

मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा की हिलसा सीट पर आरजेडी उम्मीदवार मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव को 12 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। यहां जदयू ने जीत दर्ज की है। जबकि आरजेडी उम्मीदवार शक्ति सिंह यादव का आरोप है कि 145 बैलट पेपर के वोटों को जबरन रद्द कर दिया गया। शेखपुरा के बरबीघा सीट पर कांग्रेस के गजानंद शाही को 113 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उधर बेगूसराय जिले के बछवाड़ा सीट पर सीपीआई का प्रत्याशी मात्र 737 मतों से पराजित हुआ। यहां बीजेपी के सुरेंद्र मेहता जीत हासिल किए हैं।

गोपालगंज जिले के भोरे सुरक्षित सीट पर 450 अंकों के अंतर से सीपीआईएमएल के जितेंद्र पासवान को हार का सामना करना पड़ा। यहां भी जदयू के सुनील कुमार विजयी घोषित किए गए हैं। इसी क्रम में खगड़िया जिले के परवाता सीट पर जदयू के डॉक्टर संजीव कुमार मात्र 951 वोटों के अंतर से जीत हासिल किए। यहां आरजेडी के दिगंबर तिवारी को पराजय मिली है। ऐसे ही नतीजे अन्य आधा दर्जन से अधिक सीटों की भी है। खास बात यह है कि अंतर वाले ये सारे परिणाम एनडीए के पक्ष में ही आए हैं। अब इसे संयोग कहेंगे या सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग। नतीजों को लेकर सवाल तो उठेंगे ही।

मतगणना को लेकर गड़बडी के आरोपों के बीच जगह-जगह आक्रोश भी सड़कों पर दिखा। मतगणना की रात बड़ी संख्या में लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास के सामने प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जताया । उधर हिलसा ,सिवान, गोपालगंज समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन की खबरें आती रहीं। दूसरे दिन सुबह आरजेडी, कांग्रेस व वाम दलों के नेताओं की संयुक्त बैठक में मतगणना में धांधली को लेकर कानूनी लड़ाई लड़े जाने पर विचार करने की बात कही जा रही है। इन सारी परिस्थितियों में यह सवाल उठना लाजमी है कि चुनाव परिणाम महागठबंधन की हार है या जनमत का अपहरण। इस सवाल का जवाब सरकार व उनकी मशीनरी भले ही न दे पर सही जवाब समय के साथ जनता जरूर मांग लेगी।

(पटना से जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on November 11, 2020 6:32 pm

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