Friday, January 21, 2022

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रोहिंग्या जनसंहार में मदद करने के लिये फेसबुक से हर्जाने के रूप में 150 अरब अमेरिकी डॉलर मांगे

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ब्रिटेन और अमेरिका में रह रहे कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों ने फ़ेसबुक पर, उनके ख़िलाफ़ हेट स्पीच फैलाने का आरोप लगाते हुए एक मुक़दमा दायर किया है। हालांकि रोहिंग्या शरणार्थियों के इस केस का फ़ेसबुक ने फ़िलहाल कोई जवाब नहीं दिया है। फेसबुक की लापरवाही ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार में मदद की, क्योंकि सोशल मीडिया नेटवर्क के एल्गोरिदम ने नफ़रत फैलाने वाले पोस्ट को बढ़ा दिया और प्लेटफॉर्म अमेरिका और यूके में शुरू की गई कानूनी कार्रवाई के अनुसार भड़काऊ पोस्ट को हटाने में विफल रहा।

सैन फ्रांसिस्को में उत्तरी जिला अदालत में दर्ज क्लास एक्शन शिकायत में कहा गया है कि फेसबुक “दक्षिण-पूर्व एशिया के एक छोटे से देश में बेहतर बाजार पहुंच के लिए रोहिंग्या लोगों के जीवन का व्यापार करने के लिए तत्पर है।”

मुक़दमा दायर करने वालों ने फ़ेसबुक से मुआवज़े के तौर पर 150 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की मांग की है। उनका दावा है कि फ़ेसबुक के प्लेटफॉर्म पर उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ हिंसा को बढ़ावा मिला है। 

बता दें कि साल 2017 में बौद्ध-बहुल म्यांमार में एक सैन्य कार्रवाई के दौरान क़रीब 10,000 रोहिंग्या मुसलमान मारे गए थे। 

सोमवार को फेसबुक के यूके कार्यालय को वकीलों द्वारा प्रस्तुत पत्र में कहा गया है कि म्यांमार में सत्तारूढ़ शासन और नागरिक चरमपंथियों द्वारा किए गए नरसंहार के अभियान के हिस्से के रूप में उनके मुवक्किलों और उनके परिवार के सदस्यों को गंभीर हिंसा, हत्या और/या अन्य गंभीर मानवाधिकारों का हनन किया गया।

कोर्ट में दायर पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फेसबुक जो 2011 में म्यांमार में लॉन्च हुआ और जल्दी ही सर्वव्यापी हो गया, ने इस प्रक्रिया में सहायता की। ब्रिटेन में वकील नए साल में उच्च न्यायालय में क्लेम दायर करने की उम्मीद कर रहे हैं, जो ब्रिटेन में रोहिंग्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और बांग्लादेश में शिविरों में शरणार्थियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ब्रिटेन में रोहिंग्या शरणार्थियों का केस लड़ने वाली लॉ फ़र्म ने फ़ेसबुक को एक पत्र लिखा है। जिसमें लिखा है – “फ़ेसबुक के एल्गोरिदम ने “रोहिंग्या लोगों के खिलाफ़ हेट स्पीच को बढ़ावा दिया है। ” कंपनी म्यांमार में राजनीतिक स्थिति के जानकारों और वहां की स्थिति का फ़ैक्ट चेक करने वालों पर “निवेश करने में विफल” रही है। 

कंपनी रोहिंग्याओं के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने वाले पोस्ट हटाने या अकाउंट्स को हटाने में भी विफल रही। फ़ेसबुक ने चैरिटी और मीडिया की चेतावनियों के बावजूद “उचित और सही समय पर कार्रवाई नहीं की।” 

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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