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Thursday, August 5, 2021

कांस्टीट्यूशन क्लब में पीपुल्स ट्रिब्यूनल के दौरान आरएसएस-भाजपा के गुंडों ने हर्ष मंदर पर की हमले की कोशिश

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नई दिल्ली।कल ‘अनहद’ संगठन द्वारा 23-26 फरवरी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक हिंसा पर कांस्टीट्यूशन क्लब में पीपुल्स ट्रिब्यूनल का आयोजन किया गया। जूरी सदस्यों में पूर्व आईएएस हर्ष मंदर भी शामिल थे। कार्यक्रम में व्यवधान डालने की फिराक़ में बिल्कुल सुबह से ही आरएसएस भाजपा के एक दर्जन गुंडे क्लब के आस-पास मँडरा रहे थे। इसमें लक्ष्मीनगर से जुड़ा आरएसएस का एक स्वयंसेवक प्रशांत झा और बहादुर अब्बास नकवी प्रमुख थे। आपको बता दें कि प्रशांत झा के पिता पीएन झा कांग्रेस के नेता रह चुके हैं। 

कार्यक्रम जब बिल्कुल आखिरी दौर में था तभी उसमें व्यवधान डालने और हर्ष मंदर पर हमला करने के इरादे से ये लोग क्लब के हॉल में घुस आए और धक्का मुक्की और हंगामा करने लगे। ये लोग खुद को मुख्तार अब्बास नकवी और कल्पी जब्बार का भेजा हुआ आदमी बता रहे थे। बीच बचौवल करने पर ये लोग प्रोफेसर अपूर्वानंद को धमकाने लगे। ये गुंडे पूर्व आईएएस हर्ष मंदर के खिलाफ़ लगातार ऊल-जलूल बयानबाजी कर रहे थे।

इससे पहले जूरी मेंबर के तौर पर बोलते हुए हर्ष मंदर ने कहा कि “सबसे पहले तो उनके जख़्म ज़िंदगी भर के लिए हो जाते हैं। आपके परिवार के लोग इसलिए मारे गए क्योंकि आपके पड़ोसियों ने आपके साथ हिंसा की। आपकी सरकार जिसकी जिम्मेदारी है आपको बचाने की वह कई बार ऐसे कानून लाती है जो आपके खिलाफ़ होते हैं। ज़िंदगी बहुत छोटी होती है ज़ख्म भरने के लिए। लेकिन इन ज़ख्मों को भरने का जो पहला कदम है वो है कम से कम ये तो स्वीकार हो कि हमारे साथ ये हुआ है। मीडिया कभी ये कहानी नहीं बताएगी। इस देश के नागरिकों का फ़र्ज़ बनता है कि टूटी हुई ज़िंदगी को जोड़ने में वो सहायक बनें। 

साइको सोशल कास्ट है जो टूटे दिल, टूटे हौसले और टूटे भरोसे हैं उन्हें जोड़ना सबसे ज़रूरी है। तीसरा जो बड़े पैमाने पर खोये लोग हैं उन्हें ढूँढ़ना है। जो सबसे गरीब लोग हैं जो गरीब प्रवासी मजदूर लोग हैं उनका डीएनए सैंपल संरक्षित रखा जाए। चौथी बात घायल लोगों के लिए मेडिकल कैम्प । मेडिकल लोगों की भूमिका पर बात नहीं की है। लोगों का विश्वास इस कदर टूट चुका है कि सरकारी व्यवस्था हमारे लिए नहीं है। तो क्या जो मेडिकल प्रोफेशनल हैं अब वो भी मजहब देखकर ये तय करेंगे कि किसके साथ कैसा बर्ताव करना है। एम्बुलेंस के लिए सुरक्षित रास्ता न देना ये भी एक बात निकलकर आई है। 

दो दुश्मन देशों के बीच जब युद्ध होता है तो वहां भी एम्बुलेंसेज के लिए सेफ पैसेज देने की बात होती है। इसके लिए हमें आधी रात को जज को ढूँढना पड़ा कि वो आदेश दें कि एम्बुलेंसेज के लिए सेफ पैसेज मुहैया करवाया जाए। एक और बात सेक्सुअल वायलेशन की। स्त्रियों के सामने दंगाई अपने पैंट उतारें और कहें तुम्हें यहां से आज़ादी मिलेगी। ये हमारी सामाजिक गंदगी का उदाहरण है। 

ये सुनियोजित हिंसा सबक सिखाने के लिए था। वो घरों में आग लगाकर कहते केजरीवाल मुफ्त पानी देता है उससे बुझा लो। एक दूसरा पहलू ये भी है कि लेखक भी कहते हैं प्रोटेस्ट का प्रतीक आजादी है। वो दंगाई ये लो आजादी कहकर अश्लील हरकत करते हैं, पुलिस घायलों को डंडे हूलकर और लेगा आजादी कहकर चिढ़ाती है, इन्हें आजादी से भी दिक्कत है, इन्हें प्रोटेस्ट से दिक्कत है। ये हमला आजादी और प्रोटेस्ट पर भी था।” 

रिपोर्ट – अवधू आजाद

(लेखक, शोधकर्ता शिक्षक, समाजिक कार्यकर्ता हैं जो सामूहिक हिंसा और भूख बच्चे, बेघर व्यक्तियों और सड़क पर रहने वाले बच्चों के साथ काम करते हैं।) 

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