Sunday, October 24, 2021

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ग्राउंड रिपोर्ट: हरियाणा में किसानों के बीच घुसपैठ के लिए संघ-बीजेपी का नया प्रपंच

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हरियाणा में ज़ोर पकड़ते किसान आंदोलन और गाँवों में भाजपा नेताओं, राज्य के मंत्रियों को घुसने नहीं देने की घटनाओं के बीच इसका मुक़ाबला करने की रणनीति आरएसएस-भाजपा ने अलग तरह से तैयार की है। इसके लिए कोरोना की आड़ ली गई है। 

आरएसएस ने अब हरियाणा के गांवों में बाक़ायदा प्रचार शुरू कर दिया है कि हवन करने से कोरोना भाग जाएगा। इसके लिए गांवों में ट्रैक्टर पर हवन सामग्री रखकर उसके धुएँ की धूनी घुमाई जा रही है। इसे नाम दिया गया है – कोरोना नाशक गतिमान महायज्ञ । 

आरएसएस प्रचारक कथित महायज्ञ की धूनी से पहले खुद को गुजारते हैं, तब उनकी देखादेखी बाकी लोग भी धूनी के बीच से निकलते हैं और वे ऐलान कर देते हैं कि कोरोना भाग गया है।

गाँवों और किसानों के बीच घुसपैठ 

आरएसएस ने इस काम के लिए भाजपा किसान मोर्चा को आगे किया है। हरियाणा के फ़रीदाबाद, गुड़गाँव, भिवानी, जीन्द, हिसार ज़िले के कई गाँवों में आरएसएस ने अपने मोबाइल महायज्ञ की धूनी को ठेले पर घुमाया है। इस सिलसिले में जो तस्वीरें सामने आईं हैं, उनमें आरएसएस प्रचारकों ने बाक़ायदा संघ की पैंट पहन रखी है, जिसे अब नेकर की जगह स्वयंसेवक पहनते हैं। 

इस संवाददाता ने कुछ गाँवों में खुद जाकर आरएसएस के इस प्रचार को आँखों से देखा। फ़रीदाबाद जिले के बड़े गांव जैसे मलेरना, कौराली, तिगांव, चंदावली समेत शहरी सीमा से लगे गांवों और सेक्टरों में भी आरएसएस के अनुषांगिक संगठनों ने प्रचार की कमान संभाली हुई है। 

पतंजलि की भी ली आड़

गाँवों में पतंजलि किसान सेवा समिति नामक नया संगठन भी सामने आया है। चूँकि गाँवों में आज भी देसी और आयुर्वेद का प्रचलन है, उसके लिए पतंजलि से बेहतर नाम और कोई हो नहीं सकता था। पतंजलि की आड़ में उसके जरिए भी किसानों के बीच पहुंच बनाई जा रही है। पतंजलि सेवा समिति इसलिए बनाया गया है ताकि जिन गांवों में किसान भाजपा-संघ के विरोध में हैं तो उन जगहों पर इसी संगठन के जरिए घुसपैठ की जाएगी। संघ के सदस्य रातोंरात पतंजलि सेवा समिति के कार्यकर्ता बन गए हैं। इस संगठन के विस्तार के लिए हरियाणा के ठेठ जाट बेल्ट वाले गांवों में भी घुसपैठ की कोशिश की जा रही है। 

कौराली पीएचसी पर ट्रैक्टर पर यज्ञ की तैयारी

कौराली में क्या हुआ

दिल्ली से बल्लभगढ़ क़रीब 35 किलोमीटर की दूरी पर है। कौराली गाँव बल्लभगढ़ के पास है। कौराली गांव के किसान होरी सिंह ने बताया कि पिछले मंगलवार को कौराली में सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक गाँव की गलियों में ट्रैक्टर यज्ञ रथ यात्रा घुमाई गई। इसे जानबूझकर गांव को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) से शुरू किया गया। गांव के लोग इसे अस्पताल कहते हैं और यहां इलाज के लिए आते हैं। आरएसएस प्रचारकों ने हवन सामग्री व गाय के घी से आहुतियां डालकर समस्त ग्रामवासियों से अपने-अपने घरों में नित्य-दिन यज्ञ व योग करने का आग्रह किया। संघ प्रचारकों ने कहा कि इससे वायुमंडल शुद्ध होगा और कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव हो सकेगा।

गांव की गली-गली व सभी चौराहों पर हवन की धूनी दी गई ताकि विषाणुयुक्त वातावरण सुगंधित हो सके और गाँव का कोई भी व्यक्ति बीमार ना हो। हालांकि इसी किसान ने बताया कि अब तक चार-पाँच  दिन हो चुके हैं लेकिन यज्ञ की धूनी से कोरोना नहीं भागा। गांव में बीमार वैसे ही अपने घरों में पड़े हैं। सरकार की तरफ से कोई इंतजाम नहीं है। पीएचसी से दवा मिलती नहीं है। गांव के किसान ने आरएसएस की तरफ से प्रचार करने वालों की पहचान भी बताई। उसके मुताबिक कौराली में संघ के प्रचारकों के साथ खुद को पतंजलि किसान सेवा समिति फरीदाबाद का प्रभारी बताने वाले अजीत, शास्त्री मित्रसेन, खेमी ठाकुर, शेर सिंह शास्त्री, बबलू, भगत सिंह, उमेद सिंह, सतपाल आदि थे। बता दें कि कौराली गाँव को कुछ लोग कुराली भी बोलते हैं। यहाँ के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर कुराली ही लिखा हुआ है।

तिगांव में भी ठेले पर कोरोनानाशक धूनी

तिगांव में भी हुआ ड्रामा

कौराली में तो आरएसएस प्रचारक सामने आए लेकिन तिगांव में तो संघ और भाजपा के लोग यज्ञ में साथ-साथ थे। तिगांव बहुत बड़ा गाँव है और इसे क़स्बा कहना ज़्यादा सही होगा। तिगांव में बुधवार को आरएसएस प्रचारकों के साथ कथित कोरोना नाशक गतिमान महायज्ञ में भाजपा के गजराज कौशिक अध्यक्ष तिगांव, महासचिव तिगांव गिरिराज त्यागी, महिला मंडल अध्यक्ष सपना शर्मा, महासचिव संगीता नेगी, प्रह्लाद बांकुरा संयोजक भाजपा किसान मोर्चा आदि ने जमकर आहुतियां डलवाईं। इन लोगों ने अपने संबोधन में दावा कर दिया कि जब से फरीदाबाद में लोगों ने हवन यज्ञ करना शुरू किया है, फरीदाबाद में कोरोना के रोगी बढ़ने बंद हो गए हैं और लोगों के स्वास्थ्य में बहुत तेजी से सुधार आया है। ब्लैक फ़ंगस का तो नामोनिशान मिट जाएगा। इसलिए आप लोग भी यज्ञ और योग करते रहें। कोरोना इसी से भागेगा। 

तिगांव की आबादी बहुत ज्यादा है। लेकिन अधिकांश लोगों ने इसे भाजपा-संघ का प्रचार मानते हुए इसमें हिस्सा नहीं लिया। तिगांव में कांग्रेस के कई बड़े क्षेत्रीय नेताओं के घर भी हैं लेकिन यहाँ से भाजपा विधायक के जीतने के बाद संघ की शाखा खड़ी हो गई है।

तिगांव के युवक सुनील, यशराज, भोले ने कहा कि कोरोना अगर यज्ञ से भागना होता तो मोदी जी हमें टीवी पर खुद ही बता देते। मोदी जब ताली-थाली के बारे में बता सकते हैं तो यज्ञ के बारे में क्यों नहीं बताएंगे। यहां तक कि खट्टर और योगी ने एक बार भी यज्ञ करने का आह्वान नहीं किया। हमारे गांव में कुछ लोग अपनी नेतागीरी चमकाने के लिए ऐसा ड्रामा करते रहते हैं। इसलिए गाँव के ज़्यादातर लोग उस यज्ञ से दूर रहे। हालाँकि हम लोग आर्य समाजी हैं। यज्ञ करते हैं लेकिन ये भी जानते हैं कि कोरोना का इलाज यज्ञ नहीं है।

सेक्टर भी पीछे नहीं

फरीदाबाद के सेक्टर 55 और 91 में मोबाइल यज्ञ का आयोजन किया गया। ये दोनों सेक्टर गांवों से लगते हैं। दोनों सेक्टरों में आर्य समाज की आड़ लेकर आए आरएसएस के प्रचारकों ने कहा कि चूंकि सेक्टरों में लोगों के पास यज्ञ में बैठने के लिए समय नहीं है, इसलिए वे शहरों में मोबाइल यज्ञ कर रहे हैं। यज्ञ की धूनी एक ठेले पर घुमाई जा रही है। शिवदत्त नामक युवक ने बताया कि आरएसएस प्रचारक बाकायदा माइक पर ऐलान कर रहे हैं कि लोग इस धूनी को सूंघें, इससे होकर गुजरें, कोरोना भाग जाएगा। बहरहाल, अभी तक फरीदाबाद शहर में किसी ने यज्ञ के जरिए कोरोना भागने का दावा नहीं किया है।

खतरनाक है धुआं

तमाम डॉक्टरों ने ऐसे किसी भी यज्ञ के धुएं को कोरोना मरीजों के लिए खतरनाक बताया है। इस संबंध में हरियाणा के कुछ बड़े और नामी डॉक्टरों से पूछा गया कि क्या यज्ञ करने से कोरोना चला जाएगा। ये सभी डॉक्टर सनातन धर्म के मानने वाले हैं। नाम न छापने की शर्त पर इन लोगों ने कहा कि यह सब धार्मिक आस्था तक ही ठीक है लेकिन अगर किसी कोरोना मरीज को यज्ञ के धुएं या किसी अन्य सामग्री के धुएं से गुजारा गया तो उसकी मौत हो सकती है। कोरोना मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है, ऐसे में अगर धुआं उसके फेफड़ों में गया तो वह ठीक होने की बजाय और बीमार पड़ जाएगा। उसकी जान भी जा सकती है। डॉक्टरों ने आरएसएस और भाजपा से ऐसा अंधविश्वासी प्रयोग फौरन रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देशभर में कोरोना की रफ्तार कम हो रही है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि फरीदाबाद या हरियाणा के किसी गांव में महायज्ञ करने से कोरोना का असर कम हो रहा है। कोरोना की तीसरी लहर का ऐलान हो चुका है। संघ से अनुरोध है कि वह ऐसी घटिया हरकतों से किसी की जान से न खेले।

फरीदाबाद के शहरी इलाक़े में यज्ञ के प्रचार का ट्वीट 

पद्मश्री ब्रह्मदत्त ने की आलोचना 

पद्मश्री समाजसेवी और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील ब्रह्मदत्त का आरएसएस के महायज्ञ के बारे में बहुत तीखा बयान सामने आया है। ब्रह्मदत्त संयोग से कौराली गांव के रहने वाले हैं, जहां आरएसएस ने किसानों के बीच जाकर महायज्ञ के जरिए कोरोना भगाने का दावा किया। पद्मश्री ब्रह्मदत्त ने कहा कि मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि हमारे कौराली जैसे गांव में कोरोना वायरस से निपटने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तरीके अपनाने के बजाय हवन, यज्ञ का सहारा लिया जाएगा। मेरा हवन यज्ञ में गहरा विश्वास है लेकिन यह एक धार्मिक अनुष्ठान है। इससे कोरोना वायरस खत्म करने का प्रयास पाखंड ही माना जाएगा। इस पर कई लोगों ने मुझसे अपना आश्चर्य व्यक्त किया। मेरा आग्रह है कि कौराली का समाज में एक अलग ही स्थान है, उसे धूमिल नहीं होने दें। आधुनिक भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए।

ऐसा क्यों किया संघ-भाजपा ने

आरएसएस ने खासकर गांवों को इसलिए भी चुना है कि इस समय किसान केंद्र की मोदी और राज्य की खट्टर सरकार से नाराज चल रहे हैं। हिसार में जिस तरह मुख्यमंत्री खट्टर का विरोध किसानों ने किया और 26 मई को भाजपा दफ़्तर के सामने मोदी-खट्टर का पुतला फूंका, उससे हरियाणा में खट्टर सरकार अलोकप्रिय होती जा रही है। ऐसे में इस टोटके से लोगों में फिर से भाजपा और संघ के प्रति हमदर्दी पैदा करने की कोशिश की जा रही है। इसकी आड़ में अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का भी प्रचार जारी है। यह पूरा खेल गांवों की जनता का ध्यान बंटाने के लिए किया गया है।

यह रणनीति दरअसल, कई तरह से काम कर रही है। एक तरफ़ किसानों की नाराज़गी तो है ही, लेकिन दूसरी तरफ़ वैक्सीन का अभाव, सरकारी अस्पतालों में इलाज की बदइंतज़ामी, निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर लूट, जीवनरक्षक दवाओं की ब्लैकमार्केटिंग और ऑक्सीजन की कमी से लोगों की बढ़ती नाराज़गी भी वजह है। फ़रीदाबाद और गुड़गाँव के शहरी इलाक़ों में इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों की लूट और कोरोना से हुई मौतें बड़ा मुद्दा बना हुआ है। धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़कर मूल मुद्दों से ध्यान बँटाना संघ-भाजपा की पुरानी रणनीति है।

(यूसुफ किरमानी वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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