रूपानी को जनता से ज्यादा जनार्दन की चिंता

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अहमदाबाद। भारत त्योहारों का देश है। लेकिन कोरोना के कारण लोग त्योहार भी नहीं मना पा रहे हैं। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा अहमदाबाद और पूरी में धूम धाम से निकाली जाती है। कोरोना ने इस वर्ष भगवान जगन्नाथ के रथ को भी रोक दिया। रात को दो बजे गुजरात हाई कोर्ट में 143 वीं रथ यात्रा पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने साफ कहा, ” सरकार लोगों के स्वास्थ्य की चिंता करे कोरोना जैसी महामारी के चलते ऐसे आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।” आप को बता दें राज्य के मुख्य मंत्री ने भी हाई कोर्ट से शर्तों के साथ रथ यात्रा निकालने की अनुमति के लिए अपील की थी। एडवोकेट जनरल सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुरी की रथ यात्रा को दी गई अनुमति के आधार पर कोर्ट से अनुमति चाहते थे। परंतु कोर्ट ने कहा कि पुरी और अहमदाबाद में बहुत फर्क है। अहमदाबाद के हालात ठीक नहीं हैं। और कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। 

गुजरात में कोरोना चिंताजनक

कोर्ट की चिंता यूं ही नहीं है। अनलॉक -1 के 23 दिन बीत जाने के बाद भी पिछले 24 घंटे में 549 कोरोना के नये केस दर्ज हुए हैं। 24 घंटों में 26 की मौत और 604 स्वस्थ होकर घर गए है। अकेले अहमदाबाद में 235 केस कोरोना पॉजिटिव के दर्ज हुए हैं। वहीं पिछले 48 घंटों में अहमदाबाद में नये दर्ज कोरोना केसों की संख्या 549 है। 48 घंटों में अहमदाबाद में 42 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। वहीं सूरत में 175 नए मामले आए हैं। राज्य में कोरोना पॉजिटिव की संख्या 28429 है। 19386 मामले अकेले अहमदाबाद से हैं। राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 1711 पर पहुंच गई है। कोरोना से अहमदाबाद में अब तक 1348 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली, मुंबई के बाद सबसे भयानक स्थिति अहमदाबाद की है। गुजरात सरकार तथा अहमदाबाद नगर निगम पर आरोप है कि यहां केस कम दिखाने के चक्कर में कोरोना टेस्ट की संख्या को ही घटा दिया गया है। यहाँ तक कि जिनके घर में कोरोना से मौत हो रही है। उस घर के अन्य सदस्यों का न तो टेस्ट होता है। न ही वो क्वारंटाइन किये जाते हैं। 

अनलॉक में अधिक संक्रमण

लॉक डाउन की तुलना में अनलॉक में स्थिति अधिक गंभीर है। अनलॉक में लोगों को शर्तों के साथ छूट दी गई। परंतु आंकड़ों से लगता है कि पिछले 23 दिनों में स्थिति अधिक खराब हुई है। लॉक डाउन के 74 दिनों में 16784 कोरोना केस थे। जबकि अनलॉक-1 के 23 दिनों में कोरोना के 11645 मामले दर्ज किये गए हैं। लॉक डाउन के 74 दिनों में 1038 लोगों की मौत हुई थी। अनलॉक के 23 दिनों में 673 मौतें हुई हैं। सरकारी अस्पतालों की खराब हालत और तेज़ी से हो रही मृत्यु पर गुजरात हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को राजाओं के समय की काल कोठरी बताया था। जहां बंद लोगों के साथ क्या होता था किसी को कुछ पता नहीं चलता था। वही हाल सिविल अस्पताल का है। कोर्ट के दख़ल के बाद सरकार ने बहुत से सुधार किये पर आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं। 

कोरोना वॉरियर भी संक्रमित

इन्डियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के सेक्रेटरी डॉ. कमलेश सैनी के अनुसार पिछले दो महीनों में 100 से अधिक डॉक्टरों को कोरोना संक्रमण हो चुका है। आपको बता दें कि सोमवार को अमरेली में ड्यूटी दे रहे डॉ. पंकज जादव का राजकोट सिविल अस्पताल में कोरोना से देहांत हो गया। डॉ. जादव और उनकी बहन की रिपोर्ट 11 जून को पॉजिटिव आई थी। डॉ. मितेश भांडेरी ने बताया कि “6 जून को डॉ. जादव की माता की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिनका 9 जून को कोरोना से देहांत हुआ था।” इसी प्रकार से सैकड़ों पुलिस और मेडिकल स्टाफ कोरोना से संक्रमित हुए हैं। 

विश्व में भारत का नंबर चौथा 

भारत में अब तक कोरोना की आधिकारिक संख्या 456552 है।और 14011 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण के मामले में अमेरिका, ब्राज़ील और रूस के बाद भारत चौथे नंबर पर है। जानकारों की मानें तो भारत में पीक अभी आना बाकी है।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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