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Thursday, September 23, 2021

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अमेरिका से ज्यादा कारगर और सस्ती है रूस की स्पुतनिक-5 वैक्सीन

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अब जब पूरी दुनिया में कोरोना की दवाई को लेकर अलग-अलग दावे और शोध के नतीजे सामने आ रहे हैं ऐसे में खबर है कि रूस ने इस घातक वायरस के बचाव के लिए ‘स्पुतनिक-5’ नामक जो वैक्सीन तैयार किया है उसे अमेरिका द्वारा बनाई गयी वैक्सीन से सस्ती और ज्यादा प्रभावकारी कहा जा रहा है। रूस में बनी वैक्सीन को कोरोना वायरस पर 95 फीसदी असरदायक बताया जा रहा है। रूस में सभी को यह मुफ्त में मिलेगा।

फाइजर के मुताबिक, उसकी वैक्सीन के एक डोज की कीमत 19.50 डॉलर (1450 रुपए) होगी। उसके आलावा मॉडर्ना की वैक्सीन की कीमत 25 से 37 डॉलर (1850-2700 रुपए) रहेगी। इनके दो डोज की कीमत 39 डॉलर (2900 रुपए) और 50 से 74 डॉलर (3700-5400 रुपए) बैठेगी जबकि कोवीशील्ड के एक डोज की कीमत 500 रुपए होगी।

इस वैक्सीन को बना रहे डेवलपर्स ने मंगलवार को बताया कि इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों पर किए गए दूसरे अंतरिम विश्लेषण में यह वैक्सीन 95 फीसदी प्रभावी पाई गई है।

अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में इस दवा की एक डोज (खुराक) की कीमत 10 डॉलर से भी कम करीब 8.40 यूरो यानी करीब 740 रुपये बताई जा रही है। जबकि अमेरिका में बनी फाइजर और मॉडर्ना की प्रति डोज की कीमत 20 और 15 से 25 डॉलर होगी। वो भी स्टाक से लेकर सप्लाई करने वाली कंपनी के साथ हुए समझौते पर निर्भर करेगा।

रूस में बनी वैक्सीन स्पूतनिक V ट्रायल के दौरान कोरोना से लड़ने में 95% असरदार साबित हुई है। क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे शुरुआती एनालिसिस में ये बात सामने आई है। पहला डोज देने के 28 दिन बाद इस वैक्सीन ने 91.4% इफेक्टिवनेस दिखाई थी। पहले डोज के 42 दिन बाद यह बढ़कर 95% हो गई। वैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल में 40 हजार वॉलंटियर हिस्सा ले रहे हैं।

कम्पनी के दावों के मुताबिक 22 हजार वॉलंटियर्स को पहला डोज दिया गया। पहला और दूसरा दोनों डोज 19 हजार से ज्यादा लोगों को दिए गये। उनमें अब तक खतरे वाली कोई बात सामने नहीं आई है। वॉलंटियर्स की मॉनिटरिंग अब भी जारी है। शुरुआत में इस वैक्सीन के ट्रायल के दौरान वॉलंटियर्स को उलटी और सिरदर्द की शिकायत हुई थी।

वैक्सीन को बनाने वाले गैमेलिया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबॉयोलॉजी ने यह दावा किया है। वैक्सीन के दो डोज 39 संक्रमितों के अलावा 18,794 दूसरे मरीजों को दिए गए थे।

वहीं, 23 नवंबर को अब तक सामने आयी दवाओं की कार्य क्षमता (असर/प्रतिरोधक क्षमता) की एक सूची जारी हुई थी।

बता दें कि इससे पहले अमेरिका की दवा कंपनियों फाइजर और मॉडर्ना ने भी अपने वैक्सीन के 90 प्रतिशत से ज्यादा कारगर रहने का दावा किया था।

रुसी कोरोना वायरस दवा स्‍पुतनिक-5 की सफलता के तमाम दावों के बाद भी दुनिया भर में लोग और अन्य एजेंसियों के मन में इस दवा के सम्पूर्ण सुरक्षित होने को लेकर सवाल और शंका है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस में अगस्त में स्पुतनिक-5 को एडवांस्ड टेस्टिंग किए बिना ही नियामकीय मंजूरी दे दी गई थी। यह परीक्षण व्यापक तौर पर इस्तेमाल होने के पहले सुरक्षा और प्रभावकारी होने की पुष्टि करने के लिए किया जाना आवश्यक होता है। हालांकि, नियामकीय मंजूरी मिलने के दो हफ्ते बाद 40 हजार वालंटियर्स पर एडवांस्ड स्टडी की गई। यह परीक्षण अभी भी जारी है लेकिन यह स्वास्थ्य कर्मियों और शिक्षकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक बेटी को भी यह टीका लग चुका है।

अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दवा के निर्माता (RDIF) ने भारत को 100 मिलियन (10 करोड़) खुराक देने की पेशकश की है।

बता दें कि ‘स्पुतनिक-5’ की पहली खेप बीते 15 नवंबर को कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज पहुंचने की खबर थी। तब बताया गया था कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से डॉ. रेड्डी लेबोरेट्रीज को अनुमोदन मिलने के बाद दूसरे और तीसरे चरण का मानव क्‍लीनिकल परीक्षण किया जाएगा। तब यह भी कहा गया था कि, सितंबर 2020 में डॉ रेड्डीज और आरडीआईएफ ने स्पुतनिक-5 टीके के क्लीनिकल परीक्षण और भारत में इसके वितरण के लिए समझौता किया था। करार के अनुसार रूस को स्‍पुतनिक-5 की 10 करोड़ खुराक भारत को देनी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 24 नवंबर को देश के आठ सबसे अधिक कोरोना प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। मोदी ने इस दौरान कोरोना वैक्सीन पर देश के प्लान की भी बात कही। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि दुनिया की हर वैक्सीन पर सरकार की नजर है। पीएम मोदी ने कहा कि वैक्सीन कब आएगी, इसका वक्त हम तय नहीं कर सकते हैं बल्कि ये वैज्ञानिकों के हाथ में है।

मोदी ने कहा कि अब यह तय नहीं है कि इसकी कितनी डोज होगी, एक होगी, दो होगी या तीन होगी। अभी कुछ तय नहीं है कि इसकी कीमत कितनी होगी।

इसका मतलब साफ़ है कि भारत में सभी को कोरोना को दवा फ्री में नहीं मिलेगी। बता दें कि भारत की मोदी सरकार ने इस जिम्मेदारी से खुद को मुक्त करते हुए फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया है। जबकि इससे दशकों पहले जब चेचक और बाद में पोलियो के खिलाफ मुहिम चली तो उसे केंद्र की सरकारों ने पूरा किया।

मोदी सरकार ने बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में बिहार में सभी को फ्री कोरना वैक्सीन देने का वादा किया था।

सवाल यह है कि आगे जब कभी कोरोना की दवा आई और यदि उसकी कीमत 500 रुपए प्रति डोज भी रखी गयी तो क्या देश के करोड़ों गरीब परिवार यह दवा ले पाएंगे?

(पत्रकार और कवि नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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