Tue. Nov 19th, 2019

संघ विचारक एस गुरुमूर्ति ने मांगी नवलखा मामले में कोर्ट से माफ़ी

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गुरुमूर्ति और मुरलीधर।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 72 घंटे के भीतर अवमाननापूर्ण लेख के लेखक के माफीनामे को रिट्वीट करने का वादा करने के बाद आरएसएस के आर्थिक विचारक एस गुरुमूर्ति के खिलाफ अवमानना कार्यवाही सोमवार को बंद कर दी है। दरअसल लेखक ने अपने लेख, “दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मुरलीधर के गौतम नवलखा के साथ संबंधों का खुलासा क्यों नहीं किया गया है?” में यह दावा किया था कि न्यायमूर्ति मुरलीधर ने गौतम नवलखा के पक्ष में एक आदेश पारित किया था, क्योंकि उनकी पत्नी नवलखा की घनिष्ठ मित्र थीं। यह लेख ‘दृष्टिकोण’ नामक एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ को गुरुमूर्ति के वकील ने बताया कि उनका मुवक्किल अपने टि्वटर हैंडल पर यह उल्लेख करेगा कि आपत्तिजनक लेख (जिसे उन्होंने रि-ट्वीट किया) के लेखक ने अदालत में बिना शर्त माफी मांग ली है। वकील ने बताया कि उनका मुवक्किल यह भी उल्लेख करेगा कि लेखक ने न्यायमूर्ति मुरलीधर के खिलाफ लेख हटा दिया है और लेखक द्वारा मांगी गई माफी का ‘हाइपरलिंक’ भी रि-ट्वीट करेगा। अदालत ने गुरुमूर्ति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी के बयान को स्वीकार कर लिया और कहा कि पत्रकार ऐसा करने को बाध्य है। पीठ ने कहा कि इसे देखते हुए  गुरुमूर्ति का नाम पक्षों की सूची से हटाया जाता है।

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 जेठमलानी ने कहा कि गुरुमूर्ति ने आपत्तिजनक लेख को केवल रि-ट्वीट किया था और इस पर खुद से कोई टिप्पणी नहीं की थी। इसलिए उन्हें न्यायालय अवमानना कानून के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। गुरुमूर्ति भारतीय रिजर्व बैंक के अंशकालीन निदेशक भी हैं। वह ‘तुगलक’ पत्रिका के संपादक भी हैं।

इस बीच, अदालत ने फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री और आनंद रंगनाथन सहित कई प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए तथा पूछा कि मामले में उनके खिलाफ क्यों न अवमानना कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने भी कुछ टिप्पणियां ट्वीट/रि-ट्वीट की थीं। आपत्तिजनक लेख के लेखक देश कपूर ने अगस्त में अदालत से माफी मांग ली थी और आपत्तिजनक हिस्से को हटा दिया था। इस पर उनका नाम मामले में पक्ष के रूप में हटा दिया गया था। अवमानना कार्यवाही पिछले साल उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई थी।

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर के नेतृत्व में उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा एक अक्टूबर 2018 को कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में कार्यकर्ता गौतम नवलखा को नजरबंदी से रिहा करने का आदेश दिए जाने के बाद गुरुमूर्ति ने ट्वीट कर न्यायमूर्ति मुरलीधर पर पक्षपात का आरोप लगाया था। पिछले साल मार्च में, उच्च न्यायालय ने पत्रकार के उन कुछ ट्वीट को शरारतपूर्ण करार दिया था जो उन्होंने आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने के फैसले के अदालती आदेश के संबंध में किए थे।

(लेखक जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार भी हैं।)

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