Tuesday, October 26, 2021

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शेख़ मुजीबुर्रहमान के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में सांप्रदायिक मोदी का विरोध

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बांग्लादेश की स्वतंत्रता के 50 वर्ष और बंग्लादेश के संस्थापक शेख़ मुजीबुर्रहमान की जन्मशती के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने दो दिवसीय दौरे पर 26 मार्च को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुंचे।

बता दें कि बांग्लादेश इस साल अपनी स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इसमें प्रमुख आयोजन है -‘मुजीब दिबस’। जो कि बांग्लादेश के निर्माता शेख़ मुजीब उर रहमान के जन्मशती सम्मान में मनाया जा रहा है।

लेकिन पिछले कई दिनों से कई मुस्लिम नेता और वामपंथी संगठन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ रैलियां निकाल कर उनकी बंग्लादेश यात्रा का विरोध रहे हैं। उनका दावा है कि ‘शेख़ मुजीबुर्रहमान ने एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए संघर्ष किया जबकि मोदी सांप्रदायिक हैं।

हिंसक झड़प में 5 लोगों की मौत

बांग्लादेश ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ हिंसक विरोध में पांच लोगों की मौत हो गई है। ढाका पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने हथाज़री पुलिस थाने पर पथराव किया था। जवाबी कार्रवाई में हिंसक प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं  जिसमें कई लोग घायल हुए हैं।

 चटगांव में जुमे की नमाज़ के बाद हथाज़री मदरसे से मोदी के खिलाफ़ विरोध मार्च निकला जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हिंसक झड़प हुई।

मोदी की यात्रा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेश के शहर चटगांव में कथित रूप से एक पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों द्वारा हमला करने के बाद पुलिस द्वारा गोलियां चलाने के बाद शुक्रवार को चार लोगों की मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक राजधानी ढाका में कल पुलिस और प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक झड़पों में पुलिस द्वारा रबड़ की गोलियों और आंसूगैस का इस्तेमाल किया था, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए थे।

वहीं पुलिस अधिकारी रफीकुल इस्लाम ने रॉयटर्स को बताया है कि चटगांव में, एक इस्लामवादी समूह के हजारों समर्थक, जो कि भारत में अल्पसंख्यक मुसलमानों को अलग-थलग करने का आरोप मोदी सरकार पर लगा रहे हैं कल मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए एकजुट हुए थे नमाज के बाद विरोध मार्च निकाल रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो सैकड़ों प्रदर्शनकारी ढाका की एक बड़ी मस्जिद के पास पुलिस से भिड़ गए। उन्होंने कहा कि दर्जनों लोगों को चोट लगी जब पुलिस ने रबर की गोलियां दागीं और प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव करने के बाद आंसू गैस के गोले दागे गये।

इस हिंसक झड़प में 5 लोगों की मौत हुई है। मृतकों की पहचान एक दर्ज़ी और तीन छात्र के रूप में हुई है।

क्यों हो रहा है नरेंद्र मोदी का विरोध

भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नागरिकता संशोधन क़ानून और भारत के मुसलमानों पर नीतियों ने बांग्लादेश में बहुत से लोगों को परेशान किया है।

अमेरिकन पब्लिक यूनिवर्सिटी सिस्टम में प्रोफ़ेसर इफ्तेख़ार अहमद बीबीसी बांग्लादेश को बताते हैं कि भारत में बीजेपी की धर्म आधारित राजनीति बांग्लादेश की राजनीति में भी धार्मिक भावनाएँ भड़का रही है।

इफ्तेख़ार अहमद कहते हैं कि – “भारत का शीर्ष नेतृत्व, यहाँ तक कि गृहमंत्री भी, खुल कर कहते हैं कि वो भारत से सभी अवैध प्रवासियों को बाहर निकालेंगे। वो बांग्लादेश के बारे में नकारात्मक और आपत्तिजनक बयान भी देते रहते हैं।

अहमद कहते हैं कि इस सरकार के पहले उन्होंने भारत की तरफ़ से कभी ऐसी आक्रामक बयानबाज़ी पहले कभी नहीं सुनी थी।

उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि -“वो 1947 से पहले की सांप्रदायिक राजनीतिक को फिर से वापस ले आए हैं। वो सांप्रदायिक बयानबाज़ी का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। ये दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में एक नई दिशा है। इसकी वजह से भारत बांग्लादेश में भी भारत विरोधी भावना और सांप्रदायिक राजनीति ज़ोर पकड़ रही है। “

बांग्लादेश में फेसबुक, मैसेंजर बंद

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया नेटवर्क फेसबुक और उसके मैसेंजर एप, जो अक्सर देश में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में बंद कर दिये गये हैं। दरअसल बांग्लादेश सरकार को डर है कि कहीं नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन अधिक व्यापक रूप न धर ले इसीलिए इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और मैसेंजर की सर्विस को ब्लॉक कर दिया गया है।

हालांकि शेख हसीना सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है सरकार द्वारा फेसबुक और उसके मैसेंजर को ब्लॉक कर दिया गया है, लेकिन उसने पहले विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन का इस्तेमाल किया है।

वहीं फेसबुक ने कहा है कि जिस तरह से यह बांग्लादेश में फेसबुक और उसके मैसेजिंग एप को प्रतिबंधित किया गया है, ये गंभीर चिंता की बात है, जबकि कोरोनोवायरस महामारी से निपटने के लिए प्रभावी संचार आवश्यक है।

फेसबुक ने आगे कहा है कि-“हम जानते हैं कि हमारी सेवाओं को बांग्लादेश में प्रतिबंधित कर दिया गया है। हम अधिक समझने के लिए काम कर रहे हैं और जितनी जल्दी हो सके इसके पुनर्बहाली की उम्मीद करते हैं।”

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