श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता शिवकुमार को हरियाणा पुलिस ने किया प्रताड़ित: जांच रिपोर्ट

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श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता शिव कुमार को कथित रूप से अवैध रूप से हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने के मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए जांच के आदेश से यह निष्कर्ष निकला है कि उन्हें पिछले साल 16-23 जनवरी को एक सप्ताह के लिए अवैध कारावास में रखा गया था और पुलिस ने उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया था, जिससे उनके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर फ्रैक्चर सहित कई चोटें आईं थीं। मजदूर नेता शिव कुमार को पिछले साल हरियाणा पुलिस ने कुंडली में कारखाने के परिसर के बाहर मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।

जांच अधिकारी पंचकूला के जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक गुप्ता की 29 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि शिव कुमार की 24 जनवरी 2021 से 2 फरवरी 2021 तक पांच बार जांच की गई, लेकिन सोनीपत का कोई भी डॉक्टर नहीं आया। सरकारी अस्पताल या जेल में प्रतिनियुक्त डॉक्टर ने अपना कर्तव्य निभाया और “उन्होंने स्पष्ट रूप से पुलिस अधिकारियों की धुन पर नृत्य किया”

रिपोर्ट में पाया गया कि उस समय के न्यायिक मजिस्ट्रेट विनय काकरान, सिविल अस्पताल सोनीपत के डॉक्टर और जेल अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे थे तथा शिव कुमार की प्रताड़ना में हरियाणा पुलिस के साथ उनकी मिलीभगत थी । शिव कुमार 2020 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा एकतरफा पारित किए गए तीन कृषि कानून (जिन्हें विरोध के बाद रद्द कर दिया गया था) के खिलाफ किसान आंदोलन के सक्रिय समर्थक भी थे।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पंचकूला द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट ने पुष्टि की कि हरियाणा पुलिस ने कार्यकर्ता शिव कुमार को अवैध कारावास में रखा और पिछले साल उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित भी किया।

जांच अधिकारी दीपक गुप्ता ने अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्ट में कहा, “यह माना जाता है कि शिव कुमार के अवैध कारावास और हिरासत में यातना के आरोप रिकॉर्ड पर विधिवत साबित हुए हैं। 14 दिसंबर को हरियाणा सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने रिपोर्ट पर बहस करने के लिए समय मांगा।

जस्टिस जगमोहन बंसल ने आदेश में कहा कि जिला और सत्र न्यायाधीश, पंचकूला की दिनांक 01जुलाई, 2022 की जांच रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया गया। रजिस्ट्री को उचित स्थान पर टैग करने का निर्देश दिया गया। राज्य के वकील ने जवाब के लिए कुछ वक्त दिए जाने की प्रार्थना की। इस पर मामले 27 जनवरी 2023 को स्थगित किया गया।

इसी मामले में कार्यकर्ता नौदीप कौर को भी गिरफ्तार किया गया था। कौर और अन्य पिछले साल 12 जनवरी को कुछ मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं करने को लेकर फैक्ट्री परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। राज्य के अनुसार, विरोध हिंसक हो गया, पुलिस अधिकारियों पर हमला किया गया और इस प्रक्रिया में पुलिस कर्मियों को चोटें आईं।

गुप्ता वर्तमान में हरियाणा के पंचकूला में जिला और सत्र न्यायाधीश हैं। उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि कुमार को पिछले साल 16 जनवरी को पुलिस द्वारा वास्तव में उठा लिया गया और 23 जनवरी, 2021 तक अवैध कारावास में रखा गया – जिस दिन उसे दिखाया गया, उस दिन उसे औपचारिक रूप से लगभग 8:40 बजे गिरफ्तार किया गया।

गुप्ता ने रिपोर्ट में कहा कि 16 जनवरी, 2021 से 23 जनवरी, 2021 तक और फिर 23/24 जनवरी, 2021 की रात के बीच से 02 फरवरी, 2021 तक पुलिस रिमांड देकर मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत किए जाने के दौरान शिव कुमार को बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया, जिससे उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों में फ्रैक्चर सहित कई चोटें आईं।

जांच अधिकारी ने कहा कि हालांकि 20 फरवरी, 2021 को गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सेक्टर 32, चंडीगढ़ में मेडिकल जांच से पहले कुमार की 24 जनवरी से 02 फरवरी, 2021 के बीच पांच बार जांच की गई, “लेकिन इनमें से कोई भी नहीं सरकारी अस्पताल, सोनीपत के डॉक्टरों या जेल में तैनात डॉक्टर ने अपनी ड्यूटी निभाई और जाहिर तौर पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों के इशारों पर काम किया।

गुप्ता ने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि जेएमआईसी विनय काकरान ने भी अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया, जैसा कि जरूरी था। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा प्रतीत होता है कि या तो शिव कुमार को शारीरिक रूप से मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया और पुलिस वाहन में बाहर बैठाया गया; या अगर पेश किया गया तो वह पुलिस द्वारा दी गई धमकियों के कारण मजिस्ट्रेट से कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थे। अगर मजिस्ट्रेट ने कुमार को व्यक्तिगत रूप से देखा होता तो वह उनके शरीर पर चोटों को देख सकते थे।

जांच रिपोर्ट में एसआई शशमर सिंह, जो कुंडली पुलिस स्टेशन के अतिरिक्त एसएचओ थे, उनको अन्य पुलिसकर्मियों के साथ कुमार को यातना देने का “सीधे जिम्मेदार” माना गया। इसमें आगे कहा गया कि इंस्पेक्टर रवि, जो एसएचओ थे, “इनकार करके” जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। गुप्ता ने आगे सीआईए सोनीपत के प्रभारी इंस्पेक्टर रविंदर का नाम लिया, जहां कुमार को कथित रूप से अवैध कारावास में रखा गया। रविंदर ने अपने बयान में इस बात से इनकार किया कि कुमार को सीआईए स्टाफ के परिसर में लाया गया।

कुमार के पिता राजबीर ने पिछले साल कुंडली पुलिस थाने में दर्ज तीन एफआईआर को स्वतंत्र एजेंसी को स्थानांतरित करने और पुलिस द्वारा उनके बेटे को अवैध रूप से हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने की जांच की मांग को लेकर अदालत में याचिका दायर की। उनका प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट आरएस चीमा और एडवोकेट अर्शदीप चीमा कर रहे हैं।

अदालत ने मार्च, 2021 में तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश फरीदाबाद गुप्ता को आरोपों के संबंध में जांच करने का निर्देश दिया। पूछताछ के दौरान कुल 15 गवाहों का ट्रायल कराया गया। अदालत ने जांच का आदेश देते हुए कहा कि भारत के संविधान का भाग-III, मौलिक अधिकारों से संबंधित है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा की गारंटी देता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा किसी भी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता

इस साल की शुरुआत में चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को सौंपी गई एक विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट में भी कहा गया था कि शिव कुमार को पुलिस ने बुरी तरह से यातनाएं दी थीं। लेकिन यह पहली बार है कि न्यायिक जांच में सबूतों के साथ इन निष्कर्षों को सामने रखा गया है। जांच की विस्तृत रिपोर्ट बीते 20 दिसंबर को सार्वजनिक की गई।

शिव कुमार के मुताबिक, पुलिस रिमांड के दौरान उन्हें ‘चमार’ जैसी जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल कर प्रताड़ित किया गया और शौचालय साफ करने को कहा गया। इसके अलावा, हरियाणा पुलिस के अधिकारियों ने उन पर थूका, उन्हें उबलते पानी में अपने हाथ-पैर डालने के लिए कहा और उनके चेहरे पर एक हाईप्रेशर पाइप लाइन से पानी मारा गया।

जांच रिपोर्ट कहती है, ‘हिरासत में उनके ऊपर एक कुर्सी रखी गई थी, जिस पर सीआईए (हरियाणा की अपराध जांच एजेंसी) के एएसआई जय भगवान बैठे थे, जिन्होंने उन्हें बालों से पकड़ लिया और सीआईए के दो अन्य लोगों ने उनका एक-एक पैर पकड़ लिया और विपरीत दिशाओं में खींचने लगे। इंस्पेक्टर रवि कुमार और मनदीप उनकी जांघों पर खड़े हो गए और वो भी विपरीत दिशा में दबाव डाल रहे थे। कुमार के बयान में कहा गया है कि जब उनका खून बह रहा था, तब भी उन्हें सहायता नहीं दी गई, इसके बजाय उनसे कॉरिडोर में परेड कराई गई।

शिव कुमार ने ऑन रिकॉर्ड यह भी कहा है कि 28 जनवरी से 31 जनवरी 2021 तक उन्हें एसआई शमशेर सिंह दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पानीपत और हरिद्वार ले गए थे। दोनों जगहों पर कुमार को एक लॉज में हथकड़ी लगाकर बिस्तर से बांध दिया गया और पुलिसकर्मी शराब पी रहे थे।

श्रमिक अधिकार संगठन, मजदूर अधिकार संगठन के 24 वर्षीय जिलाध्यक्ष शिव कुमार को कुंडली पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन प्रथम सूचना रिपोर्ट के संबंध में हरियाणा पुलिस ने 23 जनवरी, 2021 को गिरफ्तार किया था। तीन प्राथमिकी में से पहली प्राथमिकी 28 दिसंबर, 2020 को जबरन वसूली, दंगा और आपराधिक धमकी के आरोप में दर्ज की गई थी। 12 जनवरी, 2021 को, हरियाणा पुलिस ने उसके खिलाफ इसी तरह के आरोपों में दो और प्राथमिकी दर्ज कीं, जिसमें एक हत्या के प्रयास का मामला भी शामिल है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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