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बीएचयू के दौर पर आए अमित शाह का छात्रों ने किया विरोध

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बीएचयू में अमित शाह के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन।

वाराणसी। भगतसिंह छात्र मोर्चा के बैनर तले काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों गृहमंत्री अमित शाह का विरोध किया। शाह एक अकादमिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए बनारस में थे। छात्रों का यह विरोध-प्रदर्शन देश भर में बढ़ती भीड़ हिंसा, लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों व बुद्धिजीवियों की फर्जी मामले में की गिरफ्तारी, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी, शिक्षा के निजीकरण जैसे जनविरोधी कानून को लागू करने आदि मसलों को लेकर था।

गृहमंत्री आज यहां परिसर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए आए हुए थे। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। छात्र उस पूरे आयोजन का ही विरोध कर रहे थे। मोर्चा के नेता विश्वनाथ ने कहा कि अकादमिक कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में अमित शाह का शामिल होना ही बीएचयू का अपमान है। उन्होंने कहा कि यह अकादमिक आयोजन नहीं बल्कि उसको बिगाड़ने का कार्यक्रम है।

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प्रेस बयान में विश्वनाथ ने कहा है कि आज समूचे देश में जो विभाजनकारी और फासीवादी माहौल बनाया गया है और निरंतर प्रायोजित रूप से जो बुद्धिजीवियों, छात्रों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों व दलितों का सरकार द्वारा दमन किया जा रहा है। उसकी जिम्मेदारी से गृहमंत्री बच नहीं सकते हैं। किसी और से ज्यादा इन सब मामलों के लिए वह सीधे जिम्मेदार हैं।

अमित शाह के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन।

उन्होंने कहा कि बीते 2 महीने से भी अधिक समय से कश्मीर को लॉकडाउन करके रखा गया है। कश्मीरियों के मानवाधिकार का उल्लंघन कर उन्हें बंदूक की नोंक पर जीने को मजबूर कर दिया गया है। उनका कहना था कि कश्मीर को एक उपनिवेश के रूप में बदल दिया गया है।

एनआरसी के नाम पर जिस तरह 20 लाख लोगों को डिटेंशन कैम्प में जीने को मजबूर कर दिया गया है, उससे एक समूची पीढ़ी के अस्तित्व विहीन हो जाने का खतरा पैदा हो गया है। यह न केवल भारतीय लोकतंत्र बल्कि पूरी मानवता के लिए शर्मसार करने वाला है।

उन्होंने कहा कि जेएनयू के छात्र नजीब के गायब होने का कलंक गृहमंत्रालय और खास कर अमित शाह के माथे पर लगा हुआ है। किसी और कैंपस में जाने से पहले उन्हें सबसे पहले इस कलंक को धोना चाहिए। 3 साल पहले दिन दहाड़े देश की राजधानी दिल्ली स्थित एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी से सत्तापोषित गुंडों द्वारा उनको गायब कर दिया जाता है। और पुलिस खानापूर्ति कर मामले को निपटा देती है। और नजीब की मां हैं कि वह 3 साल से अपने बेटे को ढूंढने के लिए दर-दर भटक रही हैं।

इन तमाम घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर कार्रवाई करने के बजाय अमित शाह सड़क के गुंडे की भाषा का प्रयोग करते हुए धमकाते हैं। यह बीएचयू जैसे संस्थान पर भी सवालिया निशान है कि वह एक अकादमिक कार्यक्रम में इस तरह के शख्स को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाता है जो सड़क के गुंडों की भाषा में देश के बुद्धिजीवियों और तरक्कीपसंद लोगों को धमकी देता है।

बीएचयू में भारत अध्ययन केन्द्र और वैदिक विज्ञान केन्द्र जैसे संस्थान के नाम पर लगातार इस तरह के कार्यक्रम कराये जाते हैं और विश्वविद्यालय के अन्य मदों के पैसे को इन सेमिनारों में खर्च करके विज्ञान और इतिहास को तोड़ा मरोड़ा जाता है। ये यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर की मेधा पर भी सवाल है कि गुप्तकालीन इतिहास पर बोलने के लिए एक ऐसे शख्स को बुलाते हैं जिसका इतिहास तो क्या पढ़ाई लिखाई से कोई रिश्ता नहीं रहा है। और किसी अकादमिक से ज्यादा दंगे प्रायोजित करने के लिए जाना जाता है।  विरोध में प्रमुख रूप से रंजन चंदेल, विश्वनाथ, आशुतोष, उत्कर्ष  व आदि लोग शामिल रहे।           

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