Wednesday, April 17, 2024

शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने फिर किया प्रदर्शन

प्रयागराज। 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आज अभ्यर्थियों ने प्रयागराज में प्रदर्शन किया। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन एसीएम प्रथम को सौंपा। इस मौके पर न्याय मोर्चा उत्तर प्रदेश के संयोजक सुनील मौर्य ने सवालिया अंदाज में कहा कि इस भर्ती में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है और मामला लखनऊ खंडपीठ के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय में भी लंबित है तब सरकार इतनी जल्दबाजी क्यों कर रही है? इससे साफ साफ जाहिर होता है कि कोविड 19 महामारी के दौरान भर्ती पूरा करके सरकार भ्रष्टाचार करने वालों को बचा लेना चाहती है।

ज्ञापन में अभ्यर्थियों ने कहा कि लॉक डाउन की वजह से उत्तर प्रदेश का युवा सरकार के निर्देशन का पालन करते हुए सड़कों पर नहीं आ रहा है क्योंकि वैश्विक कोरोना वायरस पर भी विजय पानी है साथ ही साथ भ्रष्टाचार को भी समाप्त करने का प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि हाल ही में परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय द्वारा 69000 शिक्षक भर्ती संपन्न कराई गई, इसमें एक ही सेंटर पर एक ही कक्षा के एक क्रम में सभी परीक्षार्थियों का पास होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि विद्यालय में सामूहिक नकल करायी गयी है। यह मामला केवल एक ही विद्यालय का नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सैकड़ों विद्यालयों का है। 

ज्ञापन में बताया गया है कि इस्लामिया मजीदिया इंटर कॉलेज प्रयागराज, बाल विद्या भारती प्रयागराज सहित आजमगढ़, सुल्तानपुर ,जौनपुर, अंबेडकरनगर, मेरठ ,वाराणसी तथा फैजाबाद के विद्यालयों में यह घटना रिजल्ट आने के बाद दिन के उजाले की तरह साफ तौर पर दिख रही है। इतना ही नहीं इस भर्ती में एक ही परिवार के सभी सदस्यों का एक समान अंक लाना और वह भी अप्रत्याशित तौर पर ऐसे कई परिवार हैं जिन्होंने इस ख्याति को हासिल किया है साथ ही उन्होंने अप्रत्याशित अंक भी हासिल किए हैं। ज्ञापन में यह सवाल पूछा गया है कि सरकार भर्ती की प्रक्रिया को एक सप्ताह में पूरा कर रही है लेकिन भ्रष्टाचार की जांच के लिए कोई पहल क्यों नहीं कर रही है। 

सुनील मौर्य ने बताया कि जिन विद्यार्थियों ने टीईटी परीक्षा में बड़ी मुश्किल से  82 नंबर हासिल किए हैं, वही 20 दिन की तैयारी में 140, 141, 142 ,143  नंबर तक हासिल किए हैं। जिससे रात-दिन मेहनत करने वाले युवाओं में बड़ी निराशा है। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश का कोई भी कोचिंग संचालक इस बात की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अच्छे अंक पाने वाले प्रतियोगियों को भी कोई कोचिंग संस्थान अपना बताने के लिए तैयार नहीं है। जब कि आमतौर पर ऐसा होता है कि संस्थान उन्हें अपनाने के लिए कोई भी कीमत देने के लिए तैयार हो जाते हैं। छात्रों की मानें तो ऐसे टॉप करने वाले प्रतियोगी छात्र किसी भी शैक्षणिक संस्था से संबंध नहीं रखते हैं बल्कि स्वरोजगार में वर्षों से लगे हुए थे। लिहाजा एक बार इन सब की जांच बेहद जरूरी हो गयी है। 

न्यायालय में मामला चल रहा है और उत्तर प्रदेश के असहाय योग्य, शिक्षित और मेहनतकश युवा आज हताशा और निराशा में जी रहे हैं। सरकार को इस भर्ती में जांच कराने में भला क्या परेशानी है। इतना ही नहीं परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय द्वारा जो परीक्षा 6 जनवरी 2019 को संपन्न कराई गई उसमें हजारों से अधिक छात्रों ने अपनी बुकलेट सीरीज का गलत विवरण छायांकित किया है। उदाहरण के तौर पर परीक्षा में जिस अभ्यर्थी को ए सीरीज मिली थी उसने 150 प्रश्नों की उत्तर कुंजी के आधार पर बी सी डी सीरीज को अंकित किया है और उनका रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया है। ऐसे में इस बात को नहीं नकारा जा सकता है कि 69000 शिक्षक भर्ती में व्यापक तौर पर भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। 

इस संबंध में छात्र छात्राओं ने तत्काल भर्ती प्रक्रिया रोकने के साथ निम्न मांगों पर   कार्रवाई करने की अपील की है:

1-वायरल एंसरों की जांच रिपोर्ट जारी किया जाए।

2- दर्ज एफआईआर और जेल भेजे गए लोगों के लिंक से नकल माफिया को पकड़ा जाए।

3- 40,000 अभ्यर्थी का रिज़ल्ट न आने के क्या क्या कारण हैं, स्पष्ट किया जाए ।

4- विवादित लगभग 10 प्रश्नों पर पीएनपी तत्काल स्पष्टीकरण जारी करे।

5- 150 में 130 नंबर से ऊपर पाने वाले की जांच कराई जाए। क्योंकि किसी के लिए 144 अंक हासिल करना असंभव है।

6- जिस सेंटर से ज्यादा छात्र सीरियल से पास हुए, उसकी सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए।

7- टापर्स का लाइव इंटरव्यू कराया जाए क्योंकि जो एकेडमिक में बेहतर अंक नहीं ला सका, वह इस परीक्षा में टॉप कैसे कर गया। उनकी डेट ऑफ बर्थ से पता चल रहा है कि उनकी उम्र 30 साल से अधिक है, यदि इतनी योग्यता है तो ‘ लेटरल इंट्री ‘ से उन सभी को बड़ा पद मिलना चाहिए।

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