Wednesday, October 27, 2021

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 हाईकोर्टों में जजों के लिए 16 नामों की सिफारिश की

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चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एएम खानविलकर की सदस्यता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बंबई, गुजरात, ओडिशा और पंजाब-हरियाणा के हाई कोर्टों में न्यायाधीशों के तौर पर पदोन्नति के लिए 16 नामों की सिफारिश की है। बुधवार को हुई बैठक में कॉलेजियम ने इन चार उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के तौर पर पदोन्नति के लिए 16 नामों के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसमें छह न्यायिक अधिकारी और 10 अधिवक्ता हैं।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर गुरुवार को अपलोड किए गए बयानों के अनुसार, कॉलेजियम ने चार न्यायिक अधिकारियों ए एल पंसारे, एस सी मोरे, यू एस जोशी फाल्के और बी पी देशपांडे की बंबई हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के तौर पर पदोन्नति के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसी तरह कॉलेजियम ने वकील आदित्य कुमार महापात्रा और मृगंक शेखर साहू तथा न्यायिक अधिकारी राधा कृष्ण पटनायक और शशिकांत मिश्रा को ओडिशा हाई कोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की है।

कॉलेजियम ने गुजरात हाई कोर्ट के लिए सात वकीलों एम. मनीष भट, समीर जे दवे, हेमंत एम प्रच्छाक, संदीप एन भट, अनिरुद्ध प्रद्युम्न मायी, नीरल रश्मिकांत मेहता और निशा महेंद्रभाई ठाकुर को न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत किए जाने की सिफारिश की है। एक बयान में कहा गया है कि कॉलेजियम ने 29 सितंबर 2021 को हुई अपनी बैठक में वकील संदीप मुद्गिल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

वैध पंजीकरण के बिना वाहन चलाने पर रद्द किया जा सकता है बीमा का दावा

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अगर किसी वाहन का वैध पंजीकरण नहीं है तो इसके लिए बीमा के दावे को खारिज किया जा सकता है। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने कार चोरी के एक मामले में बीमा के दावे को रद्द कर दिया। इस कार का अस्थायी पंजीकरण था। जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि पॉलिसी के नियमों और शर्तों का मौलिक उल्लंघन होने पर बीमा राशि का दावा खारिज कर दिया जाएगा। मामले की सुनवाई कर रही पीठ में न्यायाधीश एस रवींद्र और बेला एम त्रिवेदी भी शामिल थे।

पीठ ने कहा कि अहम बात यह है कि इस कानून के बारे में न्यायालय की राय यह है कि अगर ऐसी कोई घटना होती है जिसे लेकर बीमा का दावा किया जा सकता है तो यह दावा करने पर बीमा के अनुबंध में निहित शर्तों का कोई मौलिक उल्लंघन नहीं होना चाहिए। अदालत यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेशन कॉरपोरेशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

यह याचिका राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के एक आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी। इसमें आयोग ने बीकानेर में राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, सर्किट बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली कंपनी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी थी। मामले के अनुसार, सुशील कुमार गोदारा ने पंजाब में अपनी बोलेरो के लिए बीमाकर्ता से एक बीमा पॉलिसी ली थी, हालांकि वह राजस्थान के श्री गंगानगर का निवासी था।

पीठ ने कहा कि चोरी की तारीख तक वाहन बिना वैध पंजीकरण के चलाया जा रहा था। यह मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 और 192 का स्पष्ट उल्लंघन है। पीठ ने कहा कि ऐसे में एनसीडीआरसी के आदेश को कायम नहीं रखा जा सकता है।

सड़कों पर जमे बैठे किसानों को हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए?

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा सड़क की ‘नाकेबंदी’ को हटाने के लिए क्या कर रही है? उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कि सड़कों को हमेशा के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता। जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किसी समस्या का समाधान न्यायिक मंच, आंदोलन या संसदीय बहस के माध्यम से किया जा सकता है, लेकिन सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है और यह एक स्थायी समस्या नहीं हो सकती है।

पीठ ने कहा कि हम पहले ही कानून बना चुके हैं और आपको इसे लागू करना होगा। अगर हम अतिक्रमण करते हैं तो आप कह सकते हैं कि हमने आपके अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। कुछ शिकायतें हैं जिनका निवारण किया जाना चाहिए। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल(एएसजी) केएम नटराज से विशेष रूप से पूछा कि सरकार इस मामले में क्या कर रही है?

इस पर मेहता ने कहा कि बहुत ही उच्च स्तर पर एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। हमने आंदोलनकारी किसानों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं हुए। मेहता ने मोनिका अग्रवाल द्वारा दिल्ली व नोएडा के बीच आवाजाही में हो रही परेशानी को लेकर दायर याचिका में आंदोलनकारी किसान समूहों को पक्षकार बनाने के लिए अदालत की अनुमति मांगी।पीठ ने केंद्र सरकार को इस संबंध में एक आवेदन दायर करने की अनुमति दे दी और मामले को सोमवार को विचार के लिए रखा दिया है।

हरियाणा सरकार ने पिछले हफ्ते हलफनामा दायर कर कहा था कि वह दिल्ली से सटे राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़कों पर जमे बैठे किसानों को सड़कों से हटने के लिए मनाने के अपने प्रयास जारी रखेगी भले ही किसान इस मुद्दे को हल करने के लिए गठित पैनल से मिलने के लिए आगे नहीं आए।तीन केंद्रीय कानूनों के विरोध में नवंबर से हजारों किसान दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमाओं और इन राज्यों के राजमार्गों पर डेरा डाले हुए हैं। इन मार्गों पर वाणिज्यिक गतिविधियों को प्रभावित किया है और कई बिंदुओं पर यातायात को डायवर्ट किया गया है जिससे यात्रियों की यात्रा के समय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ओसीआई उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति

उच्चतम न्यायलय के जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने गुरुवार को एक अंतरिम आदेश पारित किया जिसमें ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) के उम्मीदवारों को वर्ष 2021-22 के लिए सामान्य श्रेणी में एनईईटी-यूजी काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दी।

कोर्ट ने ओसीआई उम्मीदवारों द्वारा दायर एक रिट याचिका में अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें गृह मंत्रालय द्वारा कॉलेज में प्रवेश के उद्देश्य से अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के समान व्यवहार करने के लिए जारी एक अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।पीठ ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को ओसीआई उम्मीदवारों के परिणाम घोषित करने और उन्हें सामान्य श्रेणी में काउंसलिंग के लिए उपस्थित होने की अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल शैक्षणिक वर्ष 2021-22 तक ही सीमित है।

वादे के मुताबिक सुविधाएं ना देने पर बिल्डर मुआवजा देगा

उच्चतम न्यायालय के जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने एक बिल्डर को रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को सुविधाओं और साधनों के प्रावधान के अपने वादे को पूरा नहीं करने के लिए 60 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बिल्डर “पद्मिनी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड” को समझौते में वादे के अनुसार नोएडा के रॉयल गार्डन आरडब्ल्यूए को वाटर सॉफ्टनिंग प्लांट, एक दूसरा हेल्थ क्लब, एक फायर फाइटिंग सिस्टम को चालू करने और एक क्लब प्रदान करने में विफल रहने के लिए और एक स्विमिंग पूल नहीं बनाने के लिए मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी ठहराया।

दरअसल बिल्डर ने नोएडा में 282 अपार्टमेंट के साथ हाउसिंग प्रोजेक्ट का निर्माण किया और उन्हें बिक्री के लिए पेश किया। खरीदारों को 1998-2001 की अवधि के दौरान कब्जा दे दिया गया था। फ्लैटों के खरीदारों ने रॉयल गार्डन रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के रूप में तैयार किया और इसे सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत 30.09.2003 को पंजीकृत कराया। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने 15नवम्बर2003 को बिल्डर के साथ अपार्टमेंट परिसर के रखरखाव के लिए एक समझौता किया। चूंकि बिल्डर ने सुविधाओं के वादे पर चूक की, इसलिए विवाद शुरू हो गया और उच्चतम न्यायालय तक पंहुचा ।
(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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