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Sunday, September 19, 2021

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 12 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश पद के लिए 68 नामों की सिफारिश की

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उच्च न्यायालयों में खाली पदों को भरने के लिए एक सक्रिय इरादे का संकेत देते हुए केंद्र सरकार को देश भर के 12 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नति के लिए 68 नामों की सिफारिश की है। चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एएम खानविलकर के 03 सदस्यीय कॉलेजियम ने 24 अगस्त और 01 सितंबर को हुई बैठकों में नामों को मंजूरी दी। सिफारिशों के संबंध में स्टेटमेंट सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं।

कॉलेजियम ने पाँच हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नौ एडवोकेट और तीन न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की इन 68 नामों में से 12 नाम ऐसे हैं, जो इसके पहले भी भेजे गए थे, जिनमें 05 उच्च न्यायालयों के लिए 09 अधिवक्ता और 03 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। इन नामों को पहले केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को लौटा दिया गया था। इलाहाबाद, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा, कलकत्ता, झारखंड, छत्तीसगढ़, गौहाटी, कर्नाटक, मद्रास, केरल और जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालयों के उच्च न्यायालयों ने सिफारिशें की हैं।

कॉलेजियम ने कई दिनों तक गहन विचार-विमर्श के बाद 113 नामों पर विचार किया और 68 नामों को इलाहाबाद, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, जम्मू और कश्मीर, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और हरियाणा, केरल, छत्तीसगढ़ और असम के उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए उपयुक्त पाया।

एक बार में 68 नामों की सिफारिश करने में कॉलेजियम ने बड़ी कवायद की। इसमें उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि, आय और प्रतिष्ठा और संवैधानिक पदों पर रहने के लिए उनके व्यवहार संबंधी उपयुक्तता की जांच शामिल है। नियुक्ति के लिए कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित 68 नामों में से 44 वकील हैं और 24 जिला न्यायाधीश रैंक के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं। कॉलेजियम ने 16 नामों पर विचार करने को टाल दिया है, जिनमें से प्रत्येक के लिए विशिष्ट मुद्दों पर सरकार या अन्य अधिकारियों से आगे की जानकारी की प्रतीक्षा है। बाकी नामों को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट कॉलेजियम वापस भेज दिया गया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए सबसे अधिक सिफारिशें की गई हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए 13 अधिवक्ताओं के नाम प्रस्तावित किए गए हैं और 03 न्यायिक अधिकारियों के नाम दोहराए गए हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय के लिए 10 और केरल उच्च न्यायालय के लिए 08 नाम प्रस्तावित किए गए हैं। अनुशंसित कुल नामों में से 44 अधिवक्ता हैं और 24 न्यायिक अधिकारी हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उच्च न्यायालयों में कुल 1089 न्यायाधीशों के मुकाबले 465 रिक्तियां हैं।

विभिन्न उच्च न्यायालयों के लिए प्रस्तावित नामों की संख्या इलाहाबाद (16 नाम प्रस्तावित), मध्य प्रदेश (01 नाम प्रस्तावित), राजस्थान (07 नाम प्रस्तावित), पंजाब और हरियाणा (04 नाम प्रस्तावित), जम्मू और कश्मीर (04 नाम प्रस्तावित), झारखंड (05 नाम प्रस्तावित), छत्तीसगढ़ (02 नाम प्रस्तावित), कलकत्ता (10 नाम प्रस्तावित), गौहाटी (05 नाम प्रस्तावित), कर्नाटक (02 नाम दोहराए गए), मद्रास (04 नाम प्रस्तावित), केरल (08 नाम प्रस्तावित) है।

कॉलेजियम ने एक और इतिहास रचा है। अनुसूचित जनजाति की एक महिला न्यायिक अधिकारी मार्ली वानकुंग को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए मंजूरी दी है। वह मिजोरम राज्य की पहली हाईकोर्ट जज बनेंगी।  इन 68 सिफारिशों में कुल मिलाकर 10 महिलाएं हैं।

दरअसल विभिन्न हाईकोर्ट में लगभग 60 लाख मामले लंबित हैं, लेकिन जजों के पद में 43 प्रतिशत रिक्तियां हैं। 1089 न्यायाधीशों की स्वीकृत शक्ति के मुकाबले 465 रिक्तियां हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 160 न्यायाधीशों की स्वीकृत शक्ति है, लेकिन इसमें 68 पद खाली हैं। 72 स्वीकृत शक्ति वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय में 36 रिक्तियां हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की 94 की स्वीकृत ताकत के मुकाबले, इसमें 33 रिक्तियां हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में 50% से अधिक रिक्तियां हैं, क्योंकि इसके 60 स्वीकृत न्यायाधीशों के पदों में से 31 रिक्त हैं। पटना में 64 प्रतिशत रिक्तियां हैं, क्योंकि न्यायाधीशों के 53 स्वीकृत पदों में से 34 पद खाली हैं। राजस्थान हाईकोर्ट में 50% से अधिक पद रिक्त हैं, क्योंकि न्यायाधीशों के 50 में से 27 पद रिक्त हैं।

जजों की संख्या के मामले में तेलंगाना सबसे खराब स्थिति में है। इसमें जजों के 31 पद रिक्त हैं, जबकि 42 स्वीकृत पद या 74 प्रतिशत पद रिक्त हैं। गुजरात हाई कोर्ट में 52 पदों की स्वीकृत संख्या में 50% खाली हैं। जजों के स्वीकृत 53 पदों के मुकाबले मध्य प्रदेश में 29 जज हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में, जो स्वीकृत जजों की संख्या के मामले में देश में तीसरा सबसे बड़ा है, 80 जजों की अधिकतम संख्या के मुकाबले 40 रिक्तियां हैं। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में 37 न्यायाधीशों की स्वीकृत शक्ति है लेकिन 18 पद खाली हैं। 

पिछले महीने ही उच्चतम न्यायालय ने देश भर के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के बढ़ते खाली पदों को भरने में केंद्र सरकार की ओर से हो रही देरी पर नाराज़गी जताई थी। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि कॉलेजियम द्वारा सिफारिशों को मंजूरी देने के वर्षों बाद भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं होने का कारण सरकार का ‘अड़ियल रवैया’ है।

उच्चतम न्यायालय की यह टिप्पणी इसलिए अहम थी कि अदालतें लंबित मामलों के भार तले दबती जा रही हैं फिर भी अदालतों में जजों के पद ज़्यादा ही खाली होते जा रहे हैं। यह सिर्फ़ ज़िला अदालतों की स्थिति नहीं है, बल्कि हाई कोर्ट की भी स्थिति है। 2006 में देश भर के उच्च न्यायालयों में जहाँ स्वीकृत 726 पदों में से 154 खाली थे, वहीं अब स्वीकृत क़रीब ग्यारह सौ पदों में से क़रीब आधे खाली हैं।

लोकसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में माना था कि हाईकोर्ट के जजों के 453 पद खाली पड़े हैं। उच्च न्यायालयों में 1098 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं। न्याय विभाग के अनुसार 01 सितंबर को 465 पद खाली हैं।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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