चुनावी भाषणों में मोदी के हेट स्पीच के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान रैलियों में धार्मिक देवताओं और पूजा स्थलों के नाम पर वोट मांगने से रोकने और कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने और धर्म का हवाला देने के लिए उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग न केवल आदर्श आचार संहिता, बल्कि अन्य कानूनों के भी बार-बार उल्लंघन की अनुमति देकर संविधान के आदेश के अनुसार “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के अपने कर्तव्य में पूरी तरह विफल” रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 मई) को प्रचार के दौरान कथित तौर पर हेट स्पीच देने और धर्म का हवाला देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव से अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार किया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने मामले पर विचार करने में अनिच्छा व्यक्त की, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने का फैसला किया। तदनुसार, याचिका को वापस लिया गया मानकर खारिज कर दिया गया।

जब मामला उठाया गया तो याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि “मैंने प्रतिवादी नंबर 2 (पीएम मोदी) द्वारा दिए गए भाषणों को संलग्न किया है, जहां उन्होंने स्पष्ट रूप से भगवान के नाम पर वोट मांगे हैं।”

जस्टिस नाथ ने बताया कि याचिकाकर्ता ने पहले चुनाव आयोग  से संपर्क किए बिना सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। “इस तरह अनुच्छेद 32/226 के तहत न आएं। आपको प्राधिकरण से संपर्क करना होगा। यदि आप हटना चाहते हैं तो हम आपको अनुमति देंगे। इसके बाद याचिकाकर्ता याचिका वापस लेने पर सहमत हो गया, लेकिन उसने ECI से संपर्क करने की स्वतंत्रता मांगी।

हालांकि, न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, “हमें (स्वतंत्रता क्यों देनी चाहिए)? यह आपका काम है, आपकी समस्या है।”

कोर्ट ने अन्य याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें कथित नफरत भरे भाषणों के लिए पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए ईसीआई को निर्देश देने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 मई) को रिट याचिका खारिज कर दिया, जिसमें लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा दिए गए हेट स्पीच के खिलाफ भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश देने की मांग की गई थी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ पूर्व आईएएस अधिकारी ईएएस सरमा और पूर्व आईआईएम डीन त्रिलोचन शास्त्री द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील संजय हेगड़े ने बताया कि 2019 में कोर्ट ने इसी तरह की याचिका पर विचार किया और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। हालांकि चुनाव ख़त्म होने के बाद उस मामले का निपटारा कर दिया गया।

हेगड़े की इस संक्षिप्त दलील के बाद पीठ ने तुरंत कहा कि वह इस मामले को खारिज कर रही है। पीठ ने आदेश में कहा कि हमने संजय हेगड़े को विस्तार से सुना है। हम अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। तदनुसार इसे खारिज किया जाता है।”

हालांकि हेगड़े ने पीठ से “इस स्तर पर” जोड़कर आदेश को योग्य बनाने का अनुरोध किया, जिससे भविष्य में कोई उपाय बाधित न हो, लेकिन खंडपीठ ने इनकार कर दिया।

याचिका में 2024 के आम चुनावों के लिए राजनीतिक प्रचारकों, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से दिए जा रहे नफरत भरे भाषणों के खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करने के लिए भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश देने की मांग की गई थी।

इसमें 21.04.2024 को पीएम मोदी और 27.04.2024 को केंद्रीय सूचना और प्रसारण, युवा मामले और खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा दिए गए भाषणों का हवाला दिया गया। कथित तौर पर इन भाषणों को BJP के आधिकारिक हैंडल और मौजूदा सांसद अरविंद धरमपुरी द्वारा इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर बार-बार पोस्ट किया गया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चुनाव आयोग ने दिए गए भाषणों की प्रकृति पर आंखें मूंद ली हैं, जो आदर्श आचार संहिता, भारतीय दंड संहिता, 1860 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का गंभीर उल्लंघन है। याचिका में कहा गया, भारत का चुनाव आयोग अपनी अनिवार्य जिम्मेदारियों के बारे में वैधानिक निकाय को सूचित करने और प्रेरित करने के बार-बार प्रयासों के बावजूद निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहा है।”

यह भी आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग ने पहले अन्य राजनीतिक दलों के सदस्यों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की, जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे थे जैसे कि आम आदमी पार्टी, भारत राष्ट्र समिति आदि।

याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई मुख्य राहतें:

1. बीजेपी और उसके प्रतिनिधियों द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए भारत के चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए।

2. भारत के चुनाव आयोग को अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करने और पीएम और अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा प्रचारित नफरत भरे भाषण की जांच शुरू करने का निर्देश, जिसे BJP ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किए गए वीडियो के माध्यम से दोहराया। याचिका एओआर अनस तनवीर के माध्यम से दायर की गई।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार एवं कानूनी मामलों के जानकार हैं)

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