Monday, April 15, 2024

राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए कश्मीर से धीरे-धीरे पाबंदियां हटाए सरकार

उच्चतम न्यायालय चाहता है कि  कश्मीर के मुद्दे को  आंतरिक सुरक्षा-राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए सुलझाया जाय और धीरे-धीरे कश्मीर से पाबंदियां हटायी जाय। उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 370 में बदलाव के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं की अभी सुनवाई नहीं चाहता। उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा है कि वह कश्मीर में जनजीवन सामान्य करने के लिए जल्द से जल्द सभी संभव कदम उठाए. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ,न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एसए नजीर की एक पीठ ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा-राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए सरकार कश्मीर से धीरे-धीरे पाबंदियां हटाए और स्कूलों व अस्पतालों को फिर से शुरू किया जाए। कश्मीर में अगर तथा-कथित बंद है तो उससे जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट निपट सकता है।

उच्चतम न्यायालय  में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने को लेकर आज आठ अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। उच्चतम न्यायालय ने आर्टिकल 370 को हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अब इन सभी मामलों पर अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।इसी दौरान उच्चतम न्यायालयने कहा था कि अनुच्छेद 370 में बदलाव के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर सुनवाई बाद में होगी।

उच्चतम न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल(एजी) केके वेणुगोपाल से पूछा कि किस कारण से आपने कहा कि कश्मीर में समाचार पत्र प्रकाशित हो रहे हैं? कोर्ट ने एजी से यह भी पूछा कि कश्मीर घाटी में इंटरनेट और फोन अभी तक काम क्यों नहीं कर रहे हैं? घाटी में कम्युनिकेशन को क्यों बंद किया गया है? इस पर केंद्र ने पीठ को बताया कि कश्मीर स्थित सभी समाचार पत्र संचालित हो रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह इन हलफनामों का विवरण दें।

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कश्मीर में आतंकियों के लिए बड़े पैमाने पर पाकिस्तान के हाई कमीशन की ओर से फंडिंग हो रही है। कश्मीर में अशांति फैलाने और पत्थरबाजों को समर्थन देने का काम हो रहा है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद भी राज्य सरकार ने 3 महीने के लिए इंटरनेट और फोन सुविधाओं को बंद कर दिया था। एजी ने कहा कि मौजूदा हालात में इंटरनेट और फोन बंद करने का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया।

उच्चतम न्यायालय  ने गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, जम्मू, अनंतनाग और बारामुला जाने की अनुमति दी जिससे कि वह अपने क्षेत्र के लोगों का हालचाल ले सकें। इससे पूर्व कोर्ट में गुलाम नबी आजाद के वकील ने कहा कि हमें अपने लोगों से मिलने श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जाना है। आजाद ने कहा कि हम वहां राजनीतिक रैली करने नहीं जा रहे हैं। हमें तीन बार एयरपोर्ट से वापस कर दिया गया। हमें अपने गृह जिले में भी नहीं जाने दिया गया।

केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि 5 अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली है, एक भी शख्स की जान नहीं गई है। कोर्ट को बताया गया कि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक यहां 41,866 लोग जान गंवा चुके हैं, 71038 हिंसा की घटनाएं हुई हैं और 15,292 सुरक्षा बलों को जान गवानी पड़ी।

उच्चतम न्यायालय में सीपीआई नेता सीताराम येचुरी की भी याचिका पर सुनवाई हुई। सीपीएम नेता एमवी तारीगामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय  ने कहा कि वह कश्मीर यात्रा के लिए स्वतंत्र हैं। कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर अलग से कोई आदेश नहीं दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने को चुनौती देने समेत इससे जुड़ी करीब 8 याचिकाओं पर सोमवार को उच्चतम न्यायालय में अहम सुनवाई है। इन याचिकाओं में आर्टिकल 370 खत्म करने, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की वैधता और वहां लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गई है। इन्हीं में एक याचिका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की भी है, जिसमें उन्होंने अपने गृह राज्य जाने की इजाजत मांगी है।जम्मू और कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस के पार्टी के प्रमुख सज्जाद लोन ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने और राज्य के पुनर्गठन की वैधता को चुनौती दी है। इसके अलावा बाल अधिकार कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली और प्रफेसर शांता सिन्हा ने भी विशेष दर्जा खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर में कथित रूप से बच्चों को गैरकानूनी रूप से कैद करने के खिलाफ एक याचिका दायर की है।

(लेखक जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

हरियाणा की जमीनी पड़ताल-2: पंचायती राज नहीं अब कंपनी राज! 

यमुनानगर (हरियाणा)। सोढ़ौरा ब्लॉक हेडक्वार्टर पर पच्चीस से ज्यादा चार चक्का वाली गाड़ियां खड़ी...

Related Articles

हरियाणा की जमीनी पड़ताल-2: पंचायती राज नहीं अब कंपनी राज! 

यमुनानगर (हरियाणा)। सोढ़ौरा ब्लॉक हेडक्वार्टर पर पच्चीस से ज्यादा चार चक्का वाली गाड़ियां खड़ी...