Sunday, October 24, 2021

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रिलायंस-फ्यूचर डील पर सुप्रीम रोक से मुकेश अम्बानी को तगड़ा झटका

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मुकेश अंबानी को उच्चतम न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस आर एफ नरीमन और जस्टिस बी आर गवई की पीठ ने फ्यूचर-रिलायंस रिटेल डील मामले में अमेजन के पक्ष में फैसला सुनते हुए  रिलायंस-फ्यूचर रिटेल डील पर रोक लगा दी है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि रिलायंस, फ्यूचर ग्रुप की रिटेल संपत्ति खरीदने के सौदे पर आगे नहीं बढ़ सकता है।

पीठ ने कहा कि फ्यूचर रिटेल की बिक्री को रोकने के लिए सिंगापुर आर्बिट्रेटर के फैसले को लागू किया जा सकता है। फ्यूचर रिटेल का रिलायंस रिटेल के साथ 3.4 अरब डॉलर (24,713 करोड़ रुपए) की डील आर्बिट्रेटर के फैसले को लागू करने के योग्य है। इसी साल फरवरी में अमेजन ने उच्चतम न्यायालय में फ्यूचर ग्रुप के खिलाफ याचिका दायर की थी।

उच्चतम न्यायालय को यह तय करना था कि क्या इमरजेंसी आर्बिट्रेटर के पास आर्बिटल ट्रिब्यूनल का कानूनी दर्जा है ? क्या इसे भारत में लागू किया जा सकता है ? क्या फ्यूचर ग्रुप की अपील दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ  के समक्ष सुनवाई योग्य है ? फ्यूचर ग्रुप के रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ 3.4 बिलियन डॉलर के सौदे को अमेज़न ने चुनौती दी थी।

दरअसल अगस्त 2020 में रिलायंस और फ्यूचर रिटेल के बीच सौदा हुआ। इस सौदे के खिलाफ अमेजन सिंगापुर की आर्बिट्रेशन कोर्ट पहुंची। 25 अक्टूबर 2020 को सिंगापुर की कोर्ट ने भी इस डील पर रोक लगा दी थी। सिंगापुर कोर्ट ने भी कोई आखिरी फैसला नहीं दिया है। वहां की अदालत जल्द ही इस पर फैसला दे सकती है, क्योंकि अक्टूबर में डील पर रोक लगाने के बाद कोर्ट ने कहा था कि वो 90 दिन में कोई फैसला देगी। चूंकि ये रोक सिंगापुर की कोर्ट ने लगाई थी, इसलिए रिलायंस और फ्यूचर इस आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं थे। यही वजह थी कि सिंगापुर की कोर्ट का आदेश लागू करवाने के लिए अमेजन को दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करनी पड़ी थी।

कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने 20 नवंबर 2020 को रिलायंस रिटेल और फ्यूचर ग्रुप सौदे को मंजूरी दी थी। सीसीआई के जरिए बताया था कि कमीशन ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल, होलसेल और लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउसिंग कारोबार की खरीदारी को मंजूरी दे दी है।

अगस्त 2019 में अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कूपन्स में 49 फीसद हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके लिए अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप को 1,431 करोड़ रुपए चुकाए थे। फ्यूचर कूपन्स के पास फ्यूचर रिटेल में करीब 10 फीसद की हिस्सेदारी थी। यानी एक तरह से अमेजन ने फ्यूचर रिटेल में पैसा लगाने की शुरुआत कर दी थी। अमेजन और फ्यूचर कूपन्स के बीच जो समझौता हुआ था, उसमें तय हुआ कि अमेजन 3 से 10 साल बाद फ्यूचर रिटेल की हिस्सेदारी खरीदने की हकदार होगी। साथ ही ये भी तय हुआ कि फ्यूचर रिटेल अपनी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज को नहीं बेचेगी।

इसी दौरान कोरोना की वजह से लॉकडाउन लग गया और फ्यूचर रिटेल की हालत खराब हो गई। फ्यूचर रिटेल के  किशोर बियानी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि लॉकडाउन के बाद सारे स्टोर बंद हो गए और अगले तीन-चार महीनों में ही कंपनी को 7,000 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। आखिरकार इस कंपनी को बेचने का फैसला लिया गया।

अगस्त 2020 में रिलायंस ने 24,713 करोड़ रुपए में फ्यूचर रिटेल खरीदने की घोषणा कर दी। इस डील पर बात कुछ आगे बढ़ती, उससे पहले ही अमेजन ने डील रोकने के लिए सिंगापुर की कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सिंगापुर की कोर्ट ने डील पर रोक लगा दी। अमेजन का कहना था कि फ्यूचर रिटेल ने उससे बिना पूछे रिलायंस के साथ डील की, जो समझौते का उल्लंघन है।

अगर रिलायंस को इस सौदे की मंजूरी मिल जाती तो रिटेल व्यापार में उसकी पहुँच भारत के 420 शहरों के 1800 से ज्यादा स्टोर्स तक हो जाता। इसके साथ ही फ्यूचर ग्रुप के थोक व्यापार और लॉजिस्टिक तक भी उसकी पहुँच हो जाती। सरकारी नियम विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को सीधे अपना उत्पाद बेचने से रोकते हैं। इसे व्यापक पैमाने पर संरक्षणवादी नीति के तौर पर देखा जाता है जिससे स्थानीय रिटेलर्स को फायदा होता है।

अमेज़न और रिलायंस की भारतीय बाज़ार पर इसकी असीमित संभावनाओं की वजह से नज़र है। अमेरिका और चीन के बाद किसी भी बाज़ार में इस तरह की संभावनाएँ मौजूद नहीं हैं। भारत का रिटेल सेक्टर 850 बिलियन डॉलर का है लेकिन इसका एक बहुत छोटा सा हिस्सा ही अभी ई-कॉमर्स में है। भारतीय ई-कॉमर्स का धंधा सालाना 25.8 फ़ीसद के हिसाब से बढ़ने वाला है और साल 2023 तक 85 बिलियन डॉलर तक हो जाएगा। अमेज़न के अलावा वॉलमार्ट ने भी घरेलू कंपनी फ्लिपकार्ट के साथ साझेदारी की है। यहाँ तक कि फेसबुक भी इसमें कूद पड़ा है और उसने रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स में 9.9 फीसद की हिस्सेदारी 5.7 बिलियन डॉलर में खरीदी है।

दरअसल रिटेल क्षेत्र में ग्रॉसरी के व्यवसाय का हिस्सा सबसे बड़ा है। इस सेक्टर का आधा हिस्सा ग्रॉसरी का व्यवसाय ही है। अभी ई-कॉमर्स के क्षेत्र में सबसे ज्यादा व्यापार स्मार्टफोन का हो रहा है। लेकिन कोरोना वायरस की महामारी ने ई-कॉमर्स को थोड़ा ग्रॉसरी के व्यवसाय की ओर धकेला है, क्योंकि भारत में सख्त लॉकडाउन लगाया गया था। ग्रॉसरी अब ई-कॉमर्स के क्षेत्र में मुख्य व्यवसाय बनता जा रहा है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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