Tuesday, December 7, 2021

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गैर कश्मीरियों की हत्याओं के चलते घाटी से पलायन शुरू, विपक्ष ने सरकार को घेरा

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कल कुलगाम में बिहार के तीन मजदूरों पर आतंकी हमले में दो की हत्या के बाद प्रवासी मजदूर जम्मू-कश्मीर छोड़कर वापस अपने गृह राज्य लौट रहे हैं। आतंकवादियों द्वारा गैर-कश्मीरियों की लक्षित हत्याओं की हालिया घटनाओं के बाद कश्मीर के श्रीनगर से प्रवासी श्रमिकों का एक समूह रवाना हुआ। राजस्थान का एक प्रवासी परिवार कहता है- “यहां स्थिति खराब हो रही है। हम डरे हुए हैं, हमारे साथ बच्चे हैं और इसलिए अपने गृहनगर वापस जा रहे हैं।”

गौरतलब है कि कल रविवार को कुलगाम के वानपोह इलाके में गैर स्थानीय मजदूरों पर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग करके राजा ऋषिदेव और योगेन्‍द्र ऋषि नाम के बिहार के दो युवकों की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। जबकि एक अन्य मजदूर घायल हो गया।

कश्मीर जोन पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल पर विवरण देते हुये बताया कि, “कुलगाम के वानपोह इलाके में आतंकवादियों ने गैर स्थानीय मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस आतंकवादी घटना में दो गैर स्थानीय लोग मारे गए और एक घायल हो गया। अधिकारियों के मुताबिक आतंकवादी मजदूरों के किराए के मकान में घुस गए और उन पर अंधाधुंध गोलीबारी की। वानपोह, कुलगाम (जम्मू-कश्मीर में) में आतंकवादियों द्वारा जिन तीन गैर-कश्मीरी मजदूरों पर गोलियां चलाई गईं, उनकी पहचान राजा रेशी देव (मृत), जोगिंदर रेशी देव (मृत) और चुनचुन रेशी देव (घायल) के रूप में हुई। सभी बिहार के रहने वाले हैं”।

अररिया, बिहार निवासी व जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों द्वारा मारे गए प्रवासी मजदूर योगेंद्र ऋषिदेव के परिवार ने उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त किया है। मरहूम योगेंद्र ऋषिदेव की मां ने कहा है कि मेरा बेटा 3-4 महीने पहले कश्मीर गया था। उनके परिवार में तीन बच्चे हैं। सरकार हमारी मदद करे।

वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज शाम कुलगाम, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा मारे गए राजा ऋषि देव और योगेंद्र रेशी देव के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

इससे पहले श्रीनगर में आतंकवादियों ने बांका के रहने वाले अरविंद कुमार की भी गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। श्रीनगर में ही भागलपुर के रहने वाले वीरेन्‍द्र पासवान की भी आतंकियों ने गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश में इस महीने अब तक नागरिकों को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी में 11 लोगों की मौत हो चुकी है।

रविवार को भी कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने दो गैर-स्थानीय मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी और एक अन्य को घायल कर दिया। जम्मू कश्मीर में 24 घंटे से भी कम समय में गैर-स्थानीय मजदूरों पर यह तीसरा हमला है। बिहार के एक रेहड़ी-पटरी वाले और उत्तर प्रदेश के एक बढ़ई की शनिवार शाम को आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

राजनीतिक प्रतिक्रियायें

इस आतंकवादी हमले की सभी राजनीतिक दलों ने कड़ी निंदा की है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट करके कहा है कि “निर्दोष नागरिकों पर बार-बार होने वाले बर्बर हमलों की निंदा करने के लिए शब्द नहीं हैं। मेरी संवेदना उनके परिवारों के लिए है, क्योंकि वे सम्मानजनक आजीविका कमाने के लिए अपने घरों से निकले हुए हैं। बहुत दुख की बात है।”

बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अनंतनाग में बिहार के मजदूरों की हत्या पर नीतीश कुमार सरकार को निशाने पर लेते हुये कहा है कि – “कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा आज फिर बिहार के दो श्रमवीरों को मौत के घाट उतारने की दुखद खबर सुन मर्माहत हूँ। यह डबल इंजन सरकार की इंटेलिजेंस व सिक्योरिटी फ़ेल्योर है। नीतीश जी की गलत नीतियों की वजह से रोज़ी-रोटी के लिए पलायन करने वाले श्रमिकों को अब जान से हाथ धोना पड़ रहा है।”

तेजस्वी यादव ने आगे कहा है कि -” बिहारवासियों की नृशंस हत्या के दोषी नीतीश कुमार और उनकी निकम्मी सरकार भी है। अगर एनडीए सरकार ने विगत 16 साल से किए जा रहे ‘सुशासन’ के दावे के अनुरूप सचमुच रोजगार सृजन पर गम्भीरता से कुछ भी किया होता तो करोड़ों बिहारवासियों को हर वर्ष पलायन और मरने के लिए विवश नहीं होना पड़ता।”

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल और खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा ने संयुक्त बयान जारी करके जम्मू-कश्मीर में प्रवासी बिहारी मजदूरों की लगातार हो रही हत्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इसके लिए केंद्र व बिहार सरकार को जिम्मेवार ठहराया है। नेताओं ने कहा कि धारा 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है। इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है। बिहार के मजदूरों पर हमला कोई नई बात नहीं है। नीतीश जी ने कोविड काल में सभी प्रवासी मजदूरों को राज्य के अंदर ही रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया था, वे ऐसा तो नहीं कर सके, बिहार के बाहर काम रहे मजदूरों की सुरक्षा के प्रति भी तनिक चिंतित नहीं हैं। नतीजा यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बिहारी मजदूरों के उपर तरह-तरह के हमले लगातार हो रहे हैं।

दोनों नेताओं ने कहा कि बिहार सरकार ने मृतक परिजनों को 2-2 लाख रु. की राशि देने की घोषणा की है। यह बेहद अपर्याप्त है। हमारी मांग है कि मृतक परिजनों के आश्रितों को कम से कम 20-20 लाख रु. का मुआवजा दिया जाए तथा परिवार में एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए। नेताओं ने कहा कि इन मांगों पर आगामी 20 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रतिवाद आयोजित किया जाएगा।

वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी बात की और हत्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा है कि “मैंने जम्मू-कश्मीर के एलजी से बात की है और हालिया हत्याओं पर चिंता जताई है। साफ है कि कुछ लोग जम्मू-कश्मीर में काम करने गए लोगों को निशाना बना रहे हैं। हमें उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर में प्रवासियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे।” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि – “यह चिंता का विषय है। हमें बुरा लगता है जब हमारे सैनिक, निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं। हम चाहते हैं कि सरकार बताए कि उनका क्या रुख है क्योंकि उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया था कि 35ए और 370 के खात्मे के बाद कश्मीर में आतंकवाद खत्म हो जाएगा”।

उन्होंने आगे कहा कि “अपने कश्मीर दौरे के दौरान मैंने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी का असर कश्मीर पर भी पड़ सकता है। मैंने अपनी चिंता भी व्यक्त की कि कश्मीर में यह सन्नाटा आने वाले तूफान का संकेत है।”

शिवसेना नेता संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुये कहा है कि ” जम्मू-कश्मीर में स्थिति चिंताजनक है। बिहारी प्रवासियों, कश्मीरी पंडितों, सिखों को निशाना बनाया जा रहा है… जब पाकिस्तान की बात होती है, तो आप सर्जिकल स्ट्राइक की बात करते हैं। फिर, यह चीन के लिए भी किया जाना चाहिए… रक्षा मंत्री या गृह मंत्री को देश को बताना चाहिए कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख में क्या स्थिति है। “

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल ने उठाये सवाल

जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल और मेघालय के वर्तमान राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू और कश्मीर में आम लोगों की हो रही हत्याओं पर सवाल उठाया है। मौजूदा समय की अपने कार्यकाल से तुलना करते हुए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि अब तो वो (आतंकी) चुन-चुन कर मार रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि – ‘जब मैं जम्मू कश्मीर का राज्यपाल था, तब श्रीनगर के 50 किलोमीटर के दायरे में आतंकी घुसने की हिम्मत नहीं कर रहे थे। अब तो वो चुन चुन कर मार रहे हैं।
बता दें कि सत्यपाल मलिक 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल थे। इन्हीं के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया था और अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान रद्द किए थे। इसी दौरान केंद्र ने 35ए को पूरी तरह से रद्द कर दिया था।

वहीं सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने क्षेत्र में समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के लिए जम्मू क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर आज रवाना हो गए। वह नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे और वहां चल रहे अभियानों के बारे में शीर्ष अधिकारियों द्वारा जानकारी दी जाएगी।

जम्मू-कश्मीर में धारा टारगेट किलिंग के बीच एलजी मनोज सिन्हा ने बताया है कि जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने रियल एस्टेट विकास, औद्योगिक पार्कों, आईटी टावरों, बहुउद्देशीय टावरों, रसद, मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और अधिक के लिए दुबई सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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