दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित गांव ईस्सरहेड़ी में भगवा दंगाइयों ने दी मुसलमानों को गांव छोड़कर जाने की धमकी

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में अल्पसंख्यक आबादी के साथ बड़े पैमाने पर की गई भयानक सुनियोजित हिंसा की ही पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आने दी जा रही है और उधर आसपास के इलाक़ों में भी ख़ौफ़ पैदा किया जा रहा है। गाज़ियाबाद जिले के साहिबाबाद के एक अपार्टमेंट में मुसलमानों के फ्लैट्स पर निशान लगा दिए जाने की घटना सामने आ चुकी है। दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर यूपी-बिहार के प्रवासी मज़दूरों की एक बस्ती में घुसकर नौजवानों के एक समूह ने मुसलमानों को होली तक घर छोड़कर चले जाने की चेतावनी दी है। यहां ख़ौफ़ का माहौल है। अखिल भारतीय किसान सभा, जनवादी महिला समिति और लॉयर्स यूनियन के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने कल 3 मार्च को इस बस्ती का दौरा किया। जनावादी महिला समिति की राज्य सचिव सविता की रिपोर्ट :

नूरेशां, शहनाज़, बेबी, राधा, सलिहा निशात, गुलशन खातून यह सब नाम उन महिलाओं के हैं जो पिछले 6 सालों से झज्जर जिला के ईस्सरहेड़ी गांव के तहत बसी कॉलोनी निखिल विहार में रह रही हैं। ये खेतों में बसी कच्ची बस्ती है जो आधी दिल्ली में और आधी हरियाणा में आती है। बस्ती में खंभे गड़े हैं लेकिन लाइट की व्यवस्था नहीं है। गलियां कच्ची हैं जो बारिश होते ही कीचड़ से भर जाती हैं। इस बस्ती में रहने वाले ज्यादातर लोग यूपी और बिहार के प्रवासी मजदूर हैं। पुरुष खुली दिहाड़ी का काम करते हैं और महिलाएं घरों में साफ-सफाई का काम करती हैं। अपने पेट को काट-काट कर इन लोगों ने बहुत मुश्किल से अपने खुद के घर बनाए हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग सालों से मिलजुल कर रह रहे हैं। परंतु दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद यहां भी असामाजिक तत्वों ने मुस्लिम परिवारों को डराने धमकाने की कोशिश की।

29 फरवरी की दोपहर को 50-60 लोगों का समूह कॉलोनी में आया। उनमें से ज्यादातर लोग नौजवान थे तथा अच्छे पढ़े-लिखे व खाते पीते घरों से लग रहे थे। उन्होंने आते ही बस्ती के एक दुकानदार से पूछा कि बस्ती में कितने मुस्लिम रहते हैं और उनके घर कौन से हैं। इसके बाद उन्होंने मुस्लिम परिवारों को धमकाया कि या तो 10 मार्च यानी होली तक अपने घरों को छोड़कर चले जाओ वरना अंज़ाम भुगतने के लिए तैयार रहना। उन्होंने उनके घरों से नेम-प्लेट्स को भी उतार कर फेंकने की कोशिश । इन लोगों ने डरकर कहा कि हम खुद ही उतार लेते हैं। किसी ने अगर मोबाइल निकाल कर फोटो या वीडियो लेने की कोशिश की तो उन्हें धमकाया गया कि ऐसी हिमाकत मत करना। इस घटना के बाद से कॉलोनी में बेहद दहशत का माहौल है। पुरुषों ने काम पर जाना छोड़ दिया है। बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। जिन बच्चों की परीक्षाएं थीं, उन्होंने परीक्षाएं भी नहीं दी हैं। जवान लड़कियों को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया गया है। कई लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन कर चुके हैं।


महिलाओं ने बताया कि यहां आए दिन जहरीले सांप निकलते हैं परंतु उन्हें कभी डर नहीं लगा। लाइट ना होने के बावजूद अंधेरे में भी कभी डर नहीं लगा लेकिन इन जहरीले लोगों ने यहां आकर इतनी दहशत फैला दी है कि जिंदगी सामान्य नहीं हो पा रही है। फ़िलहाल, हरियाणा और दिल्ली दोनों जगह की पुलिस वहां तैनात है। इन नागरिकों ने अखिल भारतीय किसान सभा, जनवादी महिला समिति और लॉयर्स यूनियन के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल से कहा कि उन्हें सुरक्षा चाहिए ताकि कोई भी अनहोनी घटना न घटित हो। कॉलोनी में सीसीटीवी कैमरे लगने चाहिएं ताकि इस तरह के असामाजिक तत्वों को पहचाना जा सके। संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह घटना बेहद निंदनीय है और समाज के सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली है।

अखिल भारतीय किसान सभा, जनवादी महिला समिति और लॉयर्स यूनियन के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अभी तक भी उन लोगों को पहचाना नहीं गया है जिन्होंने घटना को अंजाम दिया है । प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि उन लोगों को चिह्नित किया जाए और कानूनी कार्रवाई करते हुए कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए। प्रतिनिधिमंडल में किसान सभा के इंद्रजीत सिंह, कैप्टन शमशेर मलिक, जनवादी महिला समिति की सविता व मुनमुन और लॉयर्स यूनियन के एडवोकेट अतर सिंह शामिल थे।

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