26.1 C
Delhi
Thursday, September 16, 2021

Add News

प्रधानमंत्री ‘मन की बात’ करते रहे और किसान ताली-थाली बजाते रहे

ज़रूर पढ़े

आज रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व निर्धारित ‘मन की बात’ का आंदोलनरत किसानों ने ताली-थाली बजाकर विरोध किया। रेडियो पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम शुरू होते ही किसानों ने दिल्ली के बॉर्डर पर ताली, ड्रम और थालियां बजाना शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते हैं और सरकार जब तक कृषि क़ानून वापस नहीं लेती, हम इसी तरह प्रधानमंत्री का विरोध करते रहेंगे।

इस मौके पर गाज़ीपुर बॉर्डर से भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, “जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोरोना थाली बजाने से भागेगा, उसी तरह किसान भी थाली बजा रहें हैं, ताकि कृषि कानूनों को भगाया जाए।” उन्होंने कहा यह सरकार के लिए संकेत है कि सरकार जल्द सुधर जाए। 29 दिसंबर को हम सरकार के साथ मुलाकात करेंगे। नया साल सबके लिए शुभ हो और अगर मोदी जी भी कानून वापस ले लें, तो हम किसान भाइयों के लिए भी नया साल शुभ हो जाएगा।

बता दें कि तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने और एमएसपी की गारंटी क़ानून की मांग लेकर देश भर के किसान पिछले 32 दिन से दिल्ली बॉर्डर पर जमे हुए हैं। वहीं, क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने देशवासियों को सिंघु बॉर्डर पर किसानों के साथ नया साल मनाने का आमंत्रण देते हुए कहा, “हम दिल्ली समेत पूरे देश के लोगों से अपील करते हैं कि यहां आकर हमारे साथ नया साल मनाएं।” इससे पहले कल उन्होंने किसान आंदोलन की अगली रणनीति के तौर पर कहा था कि पंजाब और हरियाणा में टोल स्थायी तौर पर खुले रहेंगे। 30 दिसंबर को सिंघु बॉर्डर से ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।

केंद्र सरकार द्वारा प्रास्तावित धरना स्थल बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में किसानों ने प्याज उगा दिया है। हालांकि अधिकांश किसान किसान नेता सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन कुछ किसानों ने बुराड़ी के संत निरंकारी मैदान पर भी डेरा डाल रखा है। बुराड़ी के ग्राउंड पर कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने वहां प्याज की फसल लगाई है। किसानों का कहना है, “हमें यहां बैठे एक महीना हो गया है। खाली बैठे क्या करें, इसलिए खेती कर रहे हैं। ​अगर मोदी जी नहीं मानते तो पूरे बुराड़ी ग्राउंड में फसल उगा देंगे।”

राकेश टिकैत को जान से मारने की धमकी
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में गाज़ीपुर बॉर्डर पर मोर्चाबंदी किए बैठे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को जान से मारने की धमकी मिली है। उनकी शिकायत पर शनिवार को प्राथमिकी दर्ज की गई। नगर पुलिस अधीक्षक ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया है कि टिकैत के निजी सहायक अर्जुन बालियान ने शिकायत दर्ज कराई है कि एक अज्ञात कॉलर ने किसान नेता राकेश टिकैत को जान से मारने की धमकी दी है। राकेश टिकैट ने मीडिया से कहा, “बिहार से एक फोन आया था। वो मुझे जान से मारने की धमकी दे रहा था। मैंने पुलिस कप्तान को रिकॉर्डिंग भेज दी है। अब आगे जो भी करने की ज़रूरत है, वो करेंगे।”

वहीं पंजाब के गुरदासपुर-तरनतारन से 20 हजार से ज्यादा किसानों का जत्था जींद पहुंच गया है। ये जत्था आज दिल्ली पहुंचेगा। बताया जा रहा है कि जत्थे में हजारों की संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। वहीं पंजाब के बाद किसानों ने हरियाणा के टोल प्लाजा भी पक्के तौर पर फ्री करवा दिए हैं।

वहीं राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर शाहजहांपुर में किसान आंदोलन आज 14वें दिन में प्रवेश कर गया।

वहीं ट्वीटर पर ‘मोदी_बकवास_बंद_कर’ ट्रेंड कर रहा है। इसे अब तक 80 हजार ट्वीट रिट्वीट मिले हैं। ये मन की बात के विरोध और किसान आंदोलन के समर्थन में चलाया जा रहा है।

वहीं अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ के खिलाफ किसानों ने थाली बजाए जाने के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर पूरे बिहार में अखिल भारतीय किसान महासभा के नेताओं-कार्यकर्ताओं और आम किसानों ने थाली बजाकर अपना विरोध दर्ज किया। राजधानी पटना सहित राज्य के ग्रामीण इलाकों में यह कार्यक्रम व्यापक पैमाने पर हुआ।

पटना में अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य सचिव रामाधार सिंह, राष्ट्रीय कार्यालय के सचिव राजेंद्र पटेल, राज्य कार्यालय के सचिव अविनाश कुमार, कयामुद्दीन अंसारी, नेयाज अहमद आदि नेताओं ने छज्जूबाग स्थित भाकपा-माले विधायक दल कार्यालय में थाली बजाकर विरोध किया। किसान नेता रामाधार सिंह ने कहा कि विगत एक महीने से अपनी जायज मांगों को लेकर दिल्ली में किसान आंदोलनरत हैं। कड़ाके की ठंड ने अब तक कई किसानों की जान ले ली है, लेकिन मोदी सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी को किसानों की बात सुननी चाहिए, लेकिन वे अपनी धुन में ही ‘मन की बात’ के नाम पर लगातार बकवास किए जा रहे हैं और देश की खेती-किसानी को कॉरपोरेट के हवाले करने के लिए बेचैन हैं। भाजपा सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है, बल्कि उसके एजेंडे में कॉरपोरेट घरानों की सेवा है। आंदोलनरत किसानों से सहानुभूतिपूर्वक बात करने के बजाए भाजपा और संघ गिरोह लगातार किसान आंदोलन को बदनाम करने और उसमें फूट डालने के ही कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा की इस किसान विरोधी राजनीति को अब पूरे देश के किसान समझने लगे हैं। बिहार के किसानों ने भी मोर्चा थाम लिया है। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, बिजली बिल 2020 वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद की गारंटी करने आदि सवालों पर 29 दिसंबर को आयोजित राजभवन मार्च में भी किसानों के आक्रोश का इजहार होगा। इस कार्यक्रम में पूरे राज्य से दसियों हजार किसानों की भागीदारी होगी। बिहार के किसानों की हालत बेहद खराब है। बिहार में सबसे पहले मंडी व्यवस्था खत्म करके यहां के किसानों को बर्बादी के रास्ते धकेल दिया गया। बिहार की भाजपा-जदयू सरकार ने किसानों के साथ छलावा किया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बताएं कि बिहार में किस स्थान पर किसानों के धान का समर्थन मूल्य मिल रहा है? पैक्सों को धान भंडारण के लिए बोरे खरीदने तक का पैसा बिहार सरकार उपलब्ध नहीं कर रही है। किसान नेताओं ने कहा कि आज भगत सिंह का पंजाब और स्वामी सहजानंद के किसान आंदोलन की धरती बिहार के किसानों की एकता कायम होने लगी है, इससे भाजपाई बेहद डरे हुए हैं।

बिहार की धरती सहजानंद सरस्वती जैसे किसान नेताओं की धरती रही है, जिनके नेतृत्व में जमींदारी राज की चूलें हिला दी गई थीं। आजादी के बाद भी बिहार मजबूत किसान आंदोलनों की गवाह रही है। 70-80 के दशक में भोजपुर और तत्कालीन मध्य बिहार के किसान आंदोलन ने इतिहास में एक नई मिसाल कायम की है। अब एक बार नए सिरे से बिहार के छोटे-मंझोले-बटाईदार समेत सभी किसान आंदोलित हैं। बिहार से पूरे देश को उम्मीदें हैं और 29 दिसंबर के राजभवन मार्च से भाजपा के इस झूठ का पूरी तरह पर्दाफाश हो जाएगा कि बिहार के किसानों में इन तीन काले कानूनों में किसी भी प्रकार का गुस्सा है ही नहीं।

राजभवन मार्च में पूरे बिहार से दसियों हजार किसानों की गोलबंदी होगी। इसकी तैयारी को लेकर अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में 2000 से अधिक किसान पंचायतों का आयोजन किया गया है, पद यात्रायें और प्रचार टीम निकाली गई है। पटना के अलावा भोजपुर, सिवान, अरवल, जहानाबाद, समस्तीपुर, गया, गोपालगंज, पूर्णिया, भागलपुर आदि जिलों में किसान महासभा के बैनर से थाली बजाकर विरोध किया गया।

छत्तीसगढ़ में भी किसानों ने थाली बजाकर ‘मन की बात’ कार्यक्रम का विरोध किया। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर छत्तीसगढ़ किसान सभा, आदिवासी एकता महासभा और छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के अन्य घटक संगठनों द्वारा ताली-थाली बजाई गई। किसानों ने कृषि विरोधी काले कानूनों को वापस लेने की मांग की।

उधर, सोनभद्र में आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश उपाध्यक्ष कांता कोल की गिरफ्तारी के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उभ्भा चौकी पहुंचे और घेराव किया। वहां किसानों ने कांता कोल को बिना शर्त रिहा करने की मांग की। साथ ही किसान विरोधी कानून के खिलाफ नारे लगाए।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

यूपी में नहीं थम रहा है डेंगू का कहर, निशाने पर मासूम

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में जनसंख्या क़ानून तो लागू कर दिया लेकिन वो डेंगू वॉयरल फीवर,...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.