Saturday, May 28, 2022

बॉर्डरों पर नहीं बनेंगे स्थायी मकान, किसान यूनियनों का फैसला

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12 मार्च को पंजाब की 32 किसान यूनियनों की एक बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदर्शनकारियों को विरोध स्थलों में किसी भी स्थायी मकान का निर्माण नहीं करना चाहिए। यह निर्णय सिंघु व टीकरी बॉर्डर पर कुछ किसानों द्वारा पक्के मकान बनाने के संबंध में लिया गया।

SKM के कई नेता पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए गए हैं, वहां मोर्चा मतदाताओं से आग्रह कर रहा है कि वे किसान विरोधी भाजपा को वोट न दें। आज, SKM के एक प्रतिनिधिमंडल ने सिंगूर और आसनसोल में महापंचायतों को संबोधित किया।

किसान मोर्चे का कहना है कि लाल किले मामले से अलग मामलों में विभिन्न एफआईआर में गिरफ्तार 151 किसानों में से 147 अब तक जमानत पर रिहा हो गए हैं। रिहा किए गए लोगों में से कई धरना स्थलों पर वापस आ गए हैं। 4 किसानों (पंजाब से तीन और हरियाणा से एक) की जमानत का इंतजार है। पंजाब के रंजीत सिंह, जिन्हें 29 जनवरी 2021 को गिरफ्तार किया गया था, जिनकी जमानत अर्जी को अस्वीकार कर दिया गया था, अब उच्च न्यायालय में आवेदन करेंगे।

मोर्चे ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स में एक किसान आन्दोलन पर बहस के बाद, ऑस्ट्रेलिया के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक बहस हो सकती है जो एक याचिका द्वारा इस मामले को सदन उठा सकता है।

मोर्चे ने बताया कि ओडिशा में किसान यात्रा रायगड़ा जिले के गुनूपुर में पहुंची और उसका जोरदार स्वागत किया गया।  इस बीच, 7 अलग-अलग मार्गों पर 7 किसान रथों पर 7 किसान यात्राएं आज चौथे दिन में प्रवेश कर गयी हैं। ये यात्राएं पूरे बिहार में किसानों को जागरूक करेंगी।

आज सिंघु बॉर्डर पर थिएटर ग्रुप “द पार्टिकल कलेक्टिव” ने एक नाटक “दाना दाना इंकलाब” प्रस्तुत किया। इस नाटक में किसान आंदोलन के गीतों को भी सम्मिलित किया गया। कलाकारों ने कला के असली अर्थों को सार्थक करते हुए सरकारों के हमलों पर कटाक्ष रखे व किसान आंदोलन को खुला समर्थन दिया।

उत्तराखंड से शुरू हुई किसान मजदूर जागृति यात्रा का आज नौवां दिन था। आज यात्रा शाहजहांपुर जिले के खुटार से शुरू हुई यह यात्रा अब तक 600 किलोमीटर लंबा सफर तय कर चुकी है। यात्रा 300 से अधिक गांव कस्बे एवं 20 से अधिक शहरों से होकर गुजर चुकी है।

आज किसान नेता राकेश टिकैत के प्रयागराज आगमन पर बारा तहसील के हर्रो टोल पर सुबह से ही भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के नेतृत्व में किसानों मजदूरों की भीड़ का आगमन शुरू हो गया। लोगों ने खेती के तीनों कानूनों को रद्द करने, एवं हाल में पेट्रोलियम पदार्थों की हाल में हुई बेतहाशा मूल्य वृद्धि का कड़ा विरोध किया।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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