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Monday, July 26, 2021

भगवान राम की आस्था का सौदा करने वाले को मोदी का संरक्षण प्राप्त है : रणदीप सिंह सुरजेवाला

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नई दिल्ली। श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा कई गुना कीमत पर खरीदी गयी जमीन की असलियत परत-दर-परत खुलने लगी है। अयोध्या से लेकर दिल्ली तक इस मामले की चर्चा है और मुख्य आरोपी चंपत राय ने कहा है कि ऐसे आरोप लगते रहते हैं हम उसकी कोई परवाह नहीं करते। मामले के खुलासे के बाद से ही राजनीतिक दल विहिप और भाजपा पर निशाना साध रहे हैं।

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक गीत के माध्यम से संघ-भाजपा सरकार पर निशाना साधा है- “देते हैं जो भगवान को धोखा, इंसा को क्या छोड़ेंगे”

आस्था का सौदा है अधर्म व घोर पाप

चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्।

एक एकम् अक्षरम् पुंसां महापातक नाशनम्।।

बुद्धकौशिक ऋषि द्वारा रचित ‘रामरक्षास्तोत्र’ में इस श्लोक का अर्थ है कि -‘‘भगवान श्री राम के चरित्र और नैतिक मूल्य की व्यापकता इतनी विस्तृत है कि उनके चरित्र के ज्ञान का एक अक्षर भी महापाप का विनाश कर देता है।’’

भगवान श्री राम आस्था के प्रतीक हैं। पर भगवान राम की अलौकिक अयोध्या नगरी में श्री राम मंदिर निर्माण हेतु करोड़ों लोगों से एकत्रित चंदे का दुरुपयोग और धोखाधड़ी महापाप और घोर अधर्म है, जिसमें भाजपाई नेता शामिल हैं।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने पिता के वचन की अनुपालना में स्वेच्छा से चौदह वर्ष का वनवास काटा। पर साफ है कि भाजपाई मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के चरित्र से एक शब्द नहीं सीख पाए। उल्टा श्री राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित हुए चंदे का घृणित दुरुपयोग व मंदिर की जमीन खरीदने में करोड़ों का घोटाला अब जगजाहिर है।

तीन तथ्य साफ हैं:-

1. कुसुम पाठक व हरीश पाठक ने अयोध्या में 12,080 वर्ग मीटर जमीन 18 मार्च, 2021 को शाम 7:10 बजे रजिस्टर्ड सेल डीड से 2 करोड़ रु. में रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी को बेच दी।

उसी दिन, यानि 18 मार्च, 2021 को शाम 7:15 बजे यही 12,080 वर्गमीटर जमीन रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी द्वारा श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मार्फत सेक्रेटरी, श्री चंपत राय को 18.5 करोड़ रु. में बेचने का रजिस्टर्ड इकरारनामा कर पैसे का भुगतान कर दिया।

दोनों ही रजिस्टर्ड डॉक्यूमेंट्स पर अनिल मिश्रा व ऋषिकेश उपाध्याय गवाह हैं। अनिल मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रांत कार्यवाहक तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आजीवन सदस्य हैं। इन्हें प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है। ऋषिकेश उपाध्याय अयोध्या के मेयर भी हैं और प्रमुख भाजपा नेता भी, जो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नजदीकी हैं।

2. गड़बड़झाला केवल इस बात से ही साफ है कि 18 मार्च 2021 को शाम 7:10 व 7:15 बजे यानि पाँच मिनट के बीच रजिस्टर्ड दोनों कागजात में राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी जा रही जमीन की कीमत 2 करोड़ रु. से बढ़कर 18.5 करोड़ रु. हो जाती है। दुनिया के इतिहास में 5,50,000 रुपया प्रति सेकंड के हिसाब से बढ़ने वाली जमीन की यह अनोखी कीमत है। इस पैसे का भुगतान उस धनराशि से किया गया, जो करोड़ों भारतीयों ने आस्था से मंदिर निर्माण के लिए दी थी।

3. दोनों रजिस्टर्ड कागजों पर श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी, अनिल मिश्रा गवाह के तौर पर मौजूद हैं। दोनों रजिस्टर्ड कागजों पर दूसरे गवाह भाजपा के प्रमुख नेता और अयोध्या के मेयर, ऋषिकेश उपाध्याय हैं। इसका मतलब साफ है कि 2 करोड़ की जमीन पाँच मिनट में 18.5 करोड़ में खरीदने के निर्णय की राममंदिर निर्माण ट्रस्ट के ट्रस्टीज़ को पूरी जानकारी थी।

4. चौंकानेवाली बात यह भी है कि रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी द्वारा जमीन खरीदने के लिए स्टांप ड्यूटी जमा करवा ई-स्टांप सर्टिफिकेट 18 मार्च, 2021 को शाम 5:22 बजे जारी हुआ। परंतु श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जो जमीन रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी से खरीदी गई, उसके लिए स्टांप ड्यूटी जमा कर ई-स्टांप सर्टिफिकेट 18 मार्च, 2021 को शाम 5:11 बजे ही जारी हो गया। यानि ट्रस्ट ने रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी से जमीन खरीदने के लिए स्टांप ड्यूटी पहले ही जमा करवा दी थी, वो भी उस समय, जब न तो रवि मोहन तिवारी व सुल्तान अंसारी जमीन के मालिक थे और न ही उन्होंने जमीन खरीद की स्टांप ड्यूटी जमा करवा ई-स्टांप सर्टिफिकेट लिया था। यह अपने आप में गड़बड़झाले को स्पष्ट करता है।

तथाकथित तौर से यह भी बताया जा रहा है कि श्री रवि मोहन तिवारी, जिन्होंने 2 करोड़ की जमीन 5 मिनट में 18.5 करोड़ में राम मंदिर ट्रस्ट को बेच डाली, वह भाजपा के प्रमुख नेता-अयोध्या के मेयर तथा दोनों रजिस्टर्ड कागजों में गवाह, ऋषिकेश उपाध्याय के रिश्तेदार हैं।

श्री राम मंदिर निर्माण के ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 5 फरवरी, 2020 को हुआ। उपरोक्त तथ्यों से साफ है कि करोड़ों लोगों द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए दान राशि में घोर महापाप, अधर्म व घोटाला हुआ है। पर प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर ट्रस्ट का गठन किया, पूरी तरह से चुप हैं।

क्या प्रधानमंत्री जवाब देंगे कि:-

1. क्या भगवान राम की आस्था का सौदा करने वाले पापियों को मोदी जी का संरक्षण प्राप्त है?

2. मर्यादा पुरुषोत्तम, श्री राम, जिनके वचनों की, मर्यादा की, आदर्श मूल्यों की, नैतिक आचरण की कसमें खाई जाती हैं, उनके नाम पर इतना बड़ा कदाचरण भाजपा नेताओं ने कैसे किया?

3. इस प्रकार की और कितनी जमीन मंदिर निर्माण के चंदे से औने-पौने दामों पर खरीदी गई है?

देश के करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण के इस ट्रस्ट का गठन देश की सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से किया गया है। जब यह घोटाला और इसके तथ्य सामने हैं, तो देशवासियों की ओर से हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री उपरोक्त सवालों का देश को जवाब दें तथा देश के मुख्य न्यायाधीश व सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले का संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट मॉनिटर्ड जाँच करवाएं।

इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट मंदिर निर्माण के चंदे के रूप में सारी प्राप्त राशि व खर्च का अपने तत्वावधान में ऑडिट करवाए तथा मंदिर निर्माण के लिए चंदे से खरीदी गई सारी जमीन की कीमत के आकलन के बारे में भी जाँच करे तथा सुप्रीम कोर्ट सब देशवासियों व भक्तजनों के समक्ष वह ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करे। यही भगवान श्री राम के चरित्र, नैतिक मूल्यों और आदर्शों का अनुसरण होगा।

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