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कल देश भर में फूंके जाएंगे मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले

सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ते-लड़ते किसानों का सामना अब सीधे कारपोरेट से हो गया है। और किसानों को भी यह बात अच्छे से समझ में आने लगी है कि केंद्र सरकार कारपोरेट के हितों और उसके दबाव में काम कर रही है। इसलिए अब उसने सीधे उससे ही मुकाबला करने का संकल्प ले लिया है। उसी कड़ी में किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कल 5 दिसंबर को देश भर में अडानी, अंबानी और नरेंद्र मोदी सरकार का पुतला फूंकने की अपील की है।

उन्होंन कहा है, “देश के अंदर जो आंदोलन चल रहा है वो जनता बनाम कार्पोरेट है। पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर चंद लोगों का कब्ज़ा है। देश भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। इस आंदोलन में हम आप सभी का सहयोग चाहते हैं। जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, अपने गांव मोहल्ले में बैठे हैं हम उन सबका सहयोग चाहते हैं। इसलिए 5 दिसंबर के लिए हमने एक प्रोग्राम तय किया है कि सभी भाई अपने अपने गांव में, अपने चौक पर जहां भी हो सकता है वहां नरेंद्र मोदी का, अडानी का, अंबानी जैसे कार्पोरेट का पुतले बनाकर जलाएं और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करें। ताकि इसका प्रभाव और संदेशा जनता की ओर से सरकार में जा सके। तो कल पांच दिसंबर को नरेंद्र मोदी का, अडानी का, अंबानी का पुतला बनाकर अपने गांव मोहल्ले, गली कूचे में फूंके और सरकार व कार्पोरेट के खिलाफ़ इस आंदोलन को समर्थन दें।”

बता दें कि कृषि कानून व एमएसपी के मुद्दे पर हो रहे किसान आंदोलन के समाधान के लिए कल  3 दिसंबर को सरकार की ओर से तीन मंत्रियों नरेंद्र तोमर, पीयूष गोयल, सोम प्रकाश ने 40 किसान नेताओं से 8 घंटे की लंबी बैठक की थी। इस बैठक के अगली कड़ी के तहत कल 5 दिसंबर को किसान संगठनों के अगुआ और सरकार के मंत्रियों की फिर से बैठक होनी है।

इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ किसान सभा, राजनांदगांव जिला किसान संघ और आदिवासी एकता महासभा सहित छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के घटक संगठन कल 5 दिसम्बर को गांव-गांव में मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले जलाएंगे और किसान विरोधी काले कृषि कानूनों और बिजली कानून में संशोधन को वापस लेने की मांग करेंगे। इस देशव्यापी आंदोलन का आह्वान अ. भा. किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े 500 से ज्यादा किसान संगठनों ने किया है।

आज यहां जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम और छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने यह जानकारी दी। इन कानूनों में संशोधन की सरकार की पेशकश को वार्ता में शामिल नेताओं और संगठनों द्वारा ठुकराए जाने का उन्होंने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ये कानून कॉर्पोरेटपरस्त है, हमारे देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण जन जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा है और इसलिए इन्हें वापस लिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिंदगी और मौत की लड़ाई में बीच का कोई रास्ता नहीं होता।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने ही किसानों का विश्वास तोड़ा है और उसके अड़ियल रवैये के कारण किसान संगठनों से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। सभी किसान संगठनों की एकमात्र मांग यही है कि इन कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। इससे ही विश्वास का माहौल पैदा होगा और संवाद की स्थिति बनेगी।

किसान नेताओं ने कहा है कि यदि 5 दिसम्बर की वार्ता का भी कोई नतीजा नहीं निकलता, तो दिल्ली की नाकेबंदी को और तेज किया जाएगा और राजमार्गों पर किसानों का जमावड़ा दिल्ली की ओर बढ़ने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि इस सरकार को किसानों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए और इन काले कानूनों की वापसी के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। इस मांग पर जोर देने के लिए कल छत्तीसगढ़ के सैकड़ों गांवों में मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले जलाए जाएंगे।

उधर, भाकपा-माले ने कल 5 दिसंबर को पूरे बिहार में चक्का जाम आंदोलन का निर्णय लिया है। यह चक्का जाम आंदोलन भाकपा-माले, अखिल भारतीय किसान महासभा व अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के संयुक्त बैनर से आयोजित होगा। पटना में चल रही भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी की बैठक में किसान विरोधी कृषि बिलों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन पर हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। बैठक में पार्टी के महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य सहित देश के विभिन्न इलाकों से पार्टी के नेता भाग ले रहे हैं।

बैठक के हवाले से पार्टी के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने बताया कि तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने, प्रस्तावित बिजली बिल 2020 को वापस लेने की केंद्रीय मांगों के साथ-साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिहार में धान खरीद की अविलंब गारंटी करने, 400 प्रति क्विंटल गन्ना खरीद की गारंटी आदि मांगें भी हमारे आंदोलन में प्रमुखता से शामिल होंगी। बिहार की सरकार लगातार किसानों के धान खरीद से पीछे भाग रही है।

अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह ने बताया कि सरकार व किसान प्रतिनिधियों से चलने वाली वार्ता के लिए बनी कमेटी में हमारे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूल्दू सिंह भी शामिल हैं और हमारा संगठन मजबूती से इस आंदोलन में उतरा हुआ है। गांव-गांव में तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जा रही हैं। खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा कि हमारा संगठन भी कल पूरे बिहार में आयोजित चक्का जाम आंदोलन में मजबूती से उतरेगा। भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी ने कहा है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं और सरकार तीनों कानूनों को रद्द नहीं करती, तब अनिश्चितकालीन सत्याग्रह व चक्का जाम होगा।

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This post was last modified on December 4, 2020 4:05 pm

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