Monday, January 24, 2022

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भाजपा के राज में किसानों से ज्यादा आत्महत्या कारोबारियों ने की

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राजनीति के गलियारों में सर्वमान्य रूप से माना जाता है कि व्यापारी समुदाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रकारांतर से भाजपा का बैकबोन है और जनसंघ कि स्थापना से लेकर आज तक व्यापारी समुदाय ने संघ और भाजपा को पुष्पित और पल्लवित किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वर्ष 2020 में आर्थिक दुरावस्था के कारण 11,716 बिजनेसमैन ने आत्महत्या की, जबकि इसी साल 10,677 किसानों ने आत्महत्या की। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आकड़े कह रहे हैं।

एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 में 11,716 बिजनेसमैन ने आत्महत्या की, जबकि इसी साल 10,677 किसानों ने आत्महत्या की। इन 11 हजार से ज्यादा आत्महत्या के मामलों में 4,356 मामले व्यापारियों के थे, वहीं 4,226 मामले वेंडर्स के थे। वहीं अन्य मामले दूसरे बिजनेस से जुड़े हुए हैं। दरअसल एनसीआरबी ने इन तीन कैटेगरी को ही बिजनेस समुदाय से जुड़े मामलों को दर्ज करते हुए रेखांकित किया है। 2019 से तुलना करें तो बिजनेस समुदाय में 2020 में आत्महत्या के मामलों में 29 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। व्यापारी लोगों में आत्महत्या के मामलों में 2019 (2906) के मुकाबले 2020 (4356) में 49.9 फीसदी की उछाल दर्ज की गई है।

ये 2021 में हाल की कुछ सुर्खियाँ हैं –

‘कपड़ा व्यापारी ने आत्महत्या की, फाइनेंस में घाटे के बाद अपनाया था ये …’

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‘गुजरात: कर्ज का बोझ और लॉकडाउन से ठप बिजनस, 24 घंटे में तीन’

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‘आर्थिक रूप से परेशान व्यापारी ने की आत्महत्या’

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‘व्यापारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की’

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‘आगरा व्यापारी आत्महत्या प्रकरण: 70 लाख रुपये के तगादे पर तीन …’

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‘भाई ने नहीं दी करोड़ों की राशि, कपड़ा व्यापारी ने की आत्महत्या’

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‘लॉकडाउन की वजह से कर्ज से दबे व्यवसायी ने की खुदकुशी …’

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‘कपड़ा व्यापारी ने की आत्महत्या, पत्नी ने बिजनेस पार्टनर पर लगाया …’

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वर्ष 2020 में दुनिया ने बहुत कुछ देखा। महामारी कोविड-19 के प्रकोप ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है। नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक से पहले से ही पैदा आर्थिक दुरावस्था के बीच कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुए आर्थिक संकट ने हजारों जिंदगियों को संकट में डाला है, और यही वजह है कि भारत में व्यापारियों के बीच आत्महत्या के मामलों में 50 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। अगर 2019 से तुलना करें तो 2020 में किसानों से ज्यादा व्यापारियों ने आत्महत्या की है। एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 में 11,716 बिजनेसमैन ने आत्महत्या की, जब कि इसी दौरान कुल 10,677 किसानों ने आत्महत्या की थी। इन 11 हजार से ज्यादा आत्महत्या के मामलों में 4,356 मामले व्यापारियों के थे, वहीं 4,226 मामले वेंडर्स के थे। वहीं अन्य मामले ‘दूसरे बिजनेस’ से जुड़े हुए हैं।

दरअसल एनसीआरबी ने इन तीन कैटेगरी को ही बिजनेस समुदाय से जुड़े मामलों को दर्ज करते हुए रेखांकित किया है। 2019 से तुलना करें तो बिजनेस समुदाय में 2020 में आत्महत्या के मामलों में 29 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। व्यापारी लोगों में आत्महत्या के मामलों में 2019 (2906) के मुकाबले 2020 (4356) में 49.9 फीसदी की उछाल दर्ज की गई है। वहीं पूरे देश की बात करें तो आत्महत्या के मामलों में 10 फीसदी की उछाल दर्ज की गई है, जो बढ़कर 1,53,052 हो गई है।

परंपरागत तौर पर बिजेनस समुदाय में किसानों के मुकाबले आत्महत्या के कम मामले देखे जाते हैं। हालांकि महामारी के समय और लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के चलते छोटे व्यापार और कारोबारियों को काफी नुकसान हुआ है। बड़ी संख्या में कारोबारियों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं तो लोन के भुगतान में उन्हें डिफॉल्टर होना पड़ा।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि व्यवसायी हों या किसान, सभी भारत सरकार की खराब नीतियों के शिकार हैं। अर्थव्यवस्था की मरम्मत करें और जीवन बचाएं। राहुल ने ट्विटर पर कुछ आंकड़े भी पेश किए हैं। इसके तहत साल 2016 में 8573 व्यापारियों ने सुसाइड की थी। साल 2017 में 7778, साल 2018 में 7990, साल 2019 में 9052, साल 2020 में 11716 व्यापारियों ने सुसाइड की। वहीं कृषि क्षेत्र से जुड़े 11379 लोगों ने साल 2016 में सुसाइड की। साल 2017 में ये आंकड़ा 10655, साल 2018 में 10349, साल 2019 में 10281 और साल 2020 में 10677 पहुंच गया। राहुल ने महंगाई को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा और ट्वीट कर कहा, ‘दिवाली है लेकिन महंगाई चरम पर है। ये व्यंग्य की बात नहीं है। काश मोदी सरकार के पास जनता के लिए एक संवेदनशील दिल होता।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि त्यौहार का समय है। महंगाई से आमजन परेशान हैं। भाजपा सरकार की लूट वाली सोच ने त्यौहार से पहले महंगाई कम करने की बजाय गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल, तेल, सब्जी के दाम आसमान पर पहुंचा दिए। चुनाव के समय भाजपा 1-2 रुपए घटाकर जनता के बीच जाएगी, तब उसे करारा जवाब मिलेगा। जनता माफ नहीं करेगी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज का कहना है कि कोविड साल में, छोटे व्यवसाय बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अब तक यह माना जाता था कि फसल खराब होने और बढ़ते कर्ज के कारण अधिक किसान आत्महत्या करते हैं, लेकिन इससे पता चलता है कि व्यवसायी कम तनाव में नहीं हैं और महामारी ने इसे बदतर बना दिया है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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