Sunday, May 22, 2022

छत्तीसगढ़: राज्यपाल से मिलने जा रहे आदिवासी प्रतिनिधिमंडल की गिरफ्तारी की चौतरफा निंदा

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बस्तर संभाग के सुकमा बीजापुर जिला के आदिवासी मूलनिवासी बचाव मंच के नेतृत्व में जल-जंगल-जमीन पर्यावरण की रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ पेयजल जैसे बुनियादी सुविधाओं की मांगों और फर्जी मुठभेड़ के जरिये आदिवासियों की पुलिस दमन को रोकने, जबरिया पुलिस कैम्प स्थापना के खिलाफ आदिवासियों का आंदोलन जारी है। सिलगेर के आंदोलन को नौ माह पूरा हो चुका है। पूरे बस्तर संभाग में आदिवासियों की समस्याओं के संदर्भ में प्रतिनिधि मंडल के 21 जनवरी को दोपहर दो बजे राजभवन रायपुर में राज्यपाल से मुलाकात करने के लिए 19 जनवरी को आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव तथा छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही, जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर हेमंत टंडन ने बताया कि बस्तर संभाग के प्रतिनिधि मंडल में शामिल रघु मिडियामी, गजेंद्र मंडावी, रामा ओराम, सुशील कोरसा, हिरन कोवासी, सुनीता पोटाम, महेश रेंगा, अंजली मंडावी, रामेश उइका, उर्रा करटम 19 जनवरी बुधवार रात 10.30 बजे गीदम से बस में बैठकर रायपुर के लिए निकले थे। 20 जनवरी गुरुवार को सुबह नई राजधानी प्रभावित किसानों के आंदोलन में अपना समर्थन व्यक्त कर 21 जनवरी शुक्रवार दोपहर 2 बजे राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके से मुलाकात करने वाले थे।

परंतु 20 जनवरी की सुबह तक रायपुर नहीं पहुंचने पर रघु मिडियामी के मोबाइल से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन शाम तक भी उनसे संपर्क नही हो पाया। रात को राज्यपाल कार्यालय के जरिये पता करने पर मालूम हुआ कि उन्हें कोंडागांव पुलिस थाने में रोक लिया गया है जो कि पुलिस प्रशासन द्वारा आदिवासियों की आवाज को दबाने का भरसक प्रयास है। एक तरफ आंदोलनकारियों से स्थानीय प्रशासन की बेरुखी रही है और दूसरी तरफ जब प्रतिनिधि मंडल राजधानी आकर अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें भी अवैधानिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। इस संबंध में हस्ताक्षेप करने 21 जनवरी को राज्यपाल की अनुपस्थिति में कार्यालय में पत्र देकर पुलिस द्वारा उठाये गए नौ प्रतिनिधि मंडल को रिहा करने और राज्यपाल महोदया से मुलाकात हेतु समय सुनिश्चित करने निवेदन किया है। साथ ही उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर किया गया है क्योंकि पहले भी वे लोग राज्यपाल और मुख्यमंत्री से अपनी सुरक्षा की मांग कर चुके हैं।

उधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्यपाल से मिलने आ रहे मूलवासी बचाओ मंच से जुड़े आदिवासी कार्यकर्ताओं को कोंडागांव में हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की है।

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने सरकार से सीधा सवाल पूछा है कि क्या किसी आदिवासी प्रतिनिधिमंडल का राज्यपाल से मिलना गुनाह है कि उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया है? पार्टी ने कहा है कि इन अवैध गिरफ्तारियों ने बस्तर और आदिवासियों के संबंध में संवेदनशील होने के सरकार के दावे की पोल खोल दी है।

माकपा नेता ने इन आदिवासी कार्यकर्ताओं को अज्ञात स्थान में ले जाने और उनकी स्थिति के बारे में सही जानकारी न दिए जाने पर भी पार्टी का विरोध जताया है और मांग की है कि उन्हें तुरंत कोर्ट में पेश किया जाए, जो कि किसी भी हिरासती बंदी का मौलिक अधिकार है।

माकपा ने कहा है कि राज्यपाल महोदया और उच्च न्यायालय को स्वतः इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और आदिवासी कार्यकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उचित हस्तक्षेप करना चाहिए।

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