Wednesday, December 8, 2021

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गिरिडीह: पारंपरिक हथियारों के साथ आदिवासियों ने किया सीआरपीएफ कैंप का विरोध

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विगत 21 नवंबर 2021 को गिरिडीह जिले के पारसनाथ पहाड़ की तराई में बसे मोहनपुर गांव में सीआरपीएफ कैम्प खोलने की तैयारी का ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक हथियार तीर-धनुष व लाठी-डंडों से लैश बाजे-गाजे के साथ पुरजोर विरोध किया और सीआरपीएफ कैम्प नहीं बनने की मांग को लेकर स्थानीय विधायक सुदिव्य कुमार सोनू को एक मांग पत्र भी सौंपा। 

बता दें कि कैम्प खोलने के प्रस्तावित स्थल दाहुटांड़ी के मैदान में 21 नवंबर को मोहनपुर के मांझी हड़ाम दोदम हांसदा, जागो मांझी व चारू मुर्मू के नेतृत्व में मोहनपुर सहित टेसाफुली, दलान चलकरी और जोभी के छक्कुडीह सहित कई गांवों के दर्जनों महिला-पुरूषों ने पारंपरिक हथियार तीर-धनुष व लाठी-डंडों के साथ सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया। इस दौरान ग्रामीणों ने ”जान देंगे परंतु जमीन नहीं,” ”पुलिस द्वारा जनता को गाली-गलौज मारपीट व गिरफ्तार करना अविलंब बंद करे”, ”देहाती क्षेत्र से तमाम पुलिस कैम्प वापस लें,” ”हमें पुलिस कैम्प नहीं रोजगार चाहिए,” आदि नारे लगा रहे थे। कैम्प का विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कैम्प खुलने से आदिवासी-मूलवासी लोगों पर पुलिसिया जुल्म और बढ़ जायेगा। यदि सरकार हमें कुछ देना चाहती है तो हमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, सिंचाई की सुविधा सहित रोजगार दे, जिससे हम ग्रामीणों का विकास हो सके।

ग्रामीणों ने कहा कि सरकार को कैंप बनाने से पहले हम ग्रामीणों की सहमति लेनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अगर इसी तरह सरकार मनमानी करती रही तो आदिवासी-मूलवासी संस्कृति को बचाये रखना मुश्किल होगा। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर पिकेट बनाने के लिए सर्वे किया गया है, वह जमीन वैसे रैयतों की है, जिनके पास इस जमीन के सिवा अन्य कोई जमीन नहीं है। अगर इसे ले लिया गया तो उनके समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो जायेगी। 

ग्रामीण कहते हैं अगर यहां पुलिस कैम्प खोलने के प्रस्ताव पर विराम नहीं लगेगा तो कैंप का विरोध जारी रहेगा। इसे लेकर गांव के मांझी हड़ाम के साथ बैठक हो चुकी है। जोग मांझी, चारो मुर्मू, व मांझी हड़ाम दोदमा हांसदा ने बताया कि पुलिस कैम्प बनने के बाद जाहिर है पुलिस के जवान रहेंगे। इसलिए हम आदिवासियों का कहना है कि हम आदिवासी संथाल समाज को पुलिस कैम्प की कोई आवश्यकता नहीं है। हम आदिवासी समाज छोटी मोटी समस्याओं को मांझी हड़ाम के समक्ष बैठ कर सुलझा लेते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हम ग्रामीण जल जंगल व जमीन की रक्षा करते आये हैं और आगे भी करते रहेंगे। हम अपनी जमीन पुलिस कैम्प के लिए नहीं दे सकते।

इस अवसर पर सीआरपीएफ द्वारा पीरटांड़ ग्रामीणों के साथ 20 नवंबर, 2021 को दुर्व्यवहार किए जाने के मामले को लेकर पीरटांड़ के दर्जनों ग्रामीण स्थानीय विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के आवास हरसिंग रायडीह पहुंचकर आवदेन सौंपा। आवेदन में पीरटांड़ के लोगों ने सीआरपीएफ पेट्रोलिंग पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीआरपीएफ पुलिस बिना किसी कारण हम लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने का काम करती रही है। जिससे वे लोग काफी भयभीत हो रहे हैं। उन लोगों ने विधायक से सीआरपीएफ कैंप पीरटांड़ से हटाने का मांग की। इस संबंध में विधायक ने बताया कि पीरटांड़ की जनता उनको उसके आवास पर पहुंचकर एक आवेदन दिया है, जिसे संज्ञान में लिया जाएगा।

अवसर पर बसंती देवी, बबिता देवी, नुनिया देवी, मंझली देवी, सविता देवी, तलेश्वर मरांडी, भोला मुर्मु, कटिलाल हेम्ब्रम, नूनूचंद मुर्मू, अर्जुन मरांडी, चारो सोरेन, अनिल मुर्मू, रामा हेम्ब्रम सहित दर्जनों महिला पुरुष शामिल रहे।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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