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अमेरिकी संसद पर ट्रंप समर्थकों का हमला, अब तक चार की मौत

कल बुधवार को ट्रंप के हथियारबंद समर्थकों की हिसंक और बेकाबू भीड़ ने यूएस कैपिटल बिल्डिंग में घुसकर हिंसा शुरू कर दी। वहां उस समय अमेरिकी कांग्रेस में इलेक्टोरल कॉलेज को लेकर संयुक्त सत्र चल रहा था। भीड़ में कई लोगों के पास हथियार भी थे। हमले में अब तक एक महिला समेत चार लोगों की मौत हुई है। बता दें कि अमेरिका में बुधवार को कैपिटल बिल्डिंग पर हुए हमले के दौरान सदन में जो बाइडन के चुनाव जीतने की पुष्टि की जाने वाली थी। डीसी में बुधवार की सुबह से ही ट्रंप समर्थकों का विरोध-प्रदर्शन वाशिंगटन डीसी में हो रहा था, क्योंकि राष्ट्रपति-चुनाव में जो बाइडन की जीत की पुष्टि की गई थी।

पुलिस के मुताबिक अमेरिका में कैपिटल हिल्स पर हमले के मामले में 50 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि एक को मार गिराया गया है। वॉशिंगटन डीसी मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया है कि पांच बंदूकें जब्त की गई हैं, जिनमें हैंडगन और लांग गन भी शामिल हैं। मेयर मुरियल बाउजर से 21 जनवरी तक कैपिटल में सार्वजनिक आपातकाल लगा दिया है। वहीं बिल्डिंग में मौजूद अधिकारियों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

बता दें कि 14 दिसंबर को जिस सील बैलेट बॉक्स में सर्टिफिकेट भेजे गए थे वो छह जनवरी को कांग्रेस में लाया गया था, लेकिन कांग्रेस में इलेक्टोरल वोटों की गिनती उस वक़्त रोकनी पड़ी जब ट्रंप के समर्थक कैपिटल बिल्डिंग में घुस गए। कैपिटल पुलिस ने ट्रंप समर्थक प्रदर्शनकारियों को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने और ये झड़प हिंसा में बदल गई। इस दौरान ट्रंप के हथियार बंद समर्थक बैलेट बॉक्स को हासिल करना चाहते थे। एक सीनेटर ने ट्वीट करके बताया है कि स्टाफ के कुछ लोगों ने इस अफरातफरी के बीच बैलेट बॉक्स को किसी तरह वहां से बाहर निकाल लिया।

2700 नेशनल गार्ड्स किए गए डीसी में तैनात, शाम तक कर्फ्यू
नेशनल गार्ड्स के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि डीसी सेना और एयर नेशनल गार्ड्स के क़रीब 2,700 सैनिक राजधानी में तैनात किए गए हैं। इनके अलावा वर्जीनिया से भी 650 सैनिकों को बुलाया गया है। डीसी पुलिस फिलहाल प्रदर्शनकारियों को कैपिटल से दूर खदेड़ने में लगी है। शहर में स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। वाशिंगटन डीसी के मेयर ने 15 दिनों के लिए कैपिटल में आपातकाल लगा दिया है।

अमेरिकी कैपिटल को प्रदर्शनकारियों से सुरक्षा के उल्लंघन के कारण लॉकडाउन पर रखा गया था। कैपिटल के बाहर प्रदर्शन का वीडियो फिल्माने पर पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है।

ट्रंप ने ट्वीट कर उकसाया
बुधवार रात को ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा था, “यह अधिकतम साहस दिखाने का समय है माइक। राज्य अपने वोटों में सुधार करना चाहते हैं, उन्हें चुनावी धांधली का पता चल गया है। माइक को बस इतना करना है कि वो उन्हें वापस राज्यों को भेज दें, और हम जीत जाएंगे। यह कर दो माइक।”

ट्रंप दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी राज्य एक बार फिर वोटों की गिनती करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें वोटिंग फ़्रॉड के बारे में पता चला है, लेकिन चुनाव अधिकारी उनके इस दावे को विवादित बताते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अब तक इस हिंसा की निंदा नहीं की है, हालांकि उन्होंने दंगाइयों से शांत रहने की अपील की है।

वहीं यूएस कैपिटल बिल्डिंग में हुई हिंसा के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने ट्वीट करके हमला करने वालों को देश भक्त बताया। उनके इस ट्वीट की जब आलोचना हुई तो उन्होंने उसे डिलीट कर दिया। इसके बाद इवांका ट्रंप ने एक दूसरा ट्वीट करके सफाई में लिखा, “अमेरिकी देश भक्तों- सुरक्षा का किसी भी तरह उल्लंघन या हमारे क़ानून के प्रति अनादर को स्वीकार नहीं किया जाएगा। हिंसा तुरंत बंद करनी होगी। कृपया शांति बनाए रखें।”

ट्विटर फेसबुक ने किया ट्रंप के ब्लॉक
कैपिटल बिल्डिंग में हिंसा के बाद डोनाल्ड ट्रंप का फ़ेसबुक और ट्विटर अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया है।

उनके चुनाव संबंधी ट्वीट्स पर ट्विटर ने कहा है, “वॉशिंगटन डीसी में बनी अभूतपूर्व हिंसक स्थिति को देखते हुए हमें लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप को अपने तीन ट्वीट्स हटाने चाहिए। ये ट्वीट्स हमारी ‘सिविक इंटेग्रिटी पॉलिसी’ का उल्लंघन करते हैं। अगर डोनाल्ड ट्रंप ये तीन ट्वीट्स नहीं हटाते, तो उनका अकाउंट ब्लॉक ही रहेगा।”

सात ही ट्विटर ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए यह भी कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप ने ‘सिविक इंटेग्रिटी पॉलिसी’ का दोबारा उल्लंघन किया, तो उनका अकाउंट हमेशा के लिए भी बंद किया जा सकता है।

नॉर्थ अमेरिका के टेक्नोलॉजी रिपोर्टर जेम्स क्लेटन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों को जो संदेश दिया, जिसके बाद अमेरिकी राजधानी में हिंसा हुई, उसे न सिर्फ़ ट्विटर, बल्कि फ़ेसबुक और यूट्यूब ने भी हटा दिया है।

ट्रंप ने अपने समर्थकों से घर जाने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने अपने संदेश में चुनावी धांधली के दावे को भी दोहराया। उनके इस बयान पर फ़ेसबुक ने कहा है कि उनके संदेश से ऐसा लगता है कि उससे स्थिति नियंत्रित नहीं होगी, बल्कि बिगड़ेगी। हिंसा से पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने समर्थकों से कहा था कि इस चुनाव में भी धांधली हुई है। इसके कुछ घंटे बाद, जब अमेरिकी राजधानी और बाहर के इलाक़े में हिंसा शुरू हो गई, तब उन्होंने एक अन्य वीडियो संदेश में चुनावी धांधली के अपने दावे को दोहराया।

यूट्यूब ने ट्रंप के वीडियो संदेश को यह कहते हुए हटा दिया कि उनका वीडियो चुनावी धांधली का बेबुनियाद दावा करता है जो उनकी नीति के ख़िलाफ़ है।

रिपब्लिकन नेताओं ने भी की ट्रंप की बयानबाज़ी और कैपिटल हमले की निंदा
इस बीच अमेरिकी उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ने कैपिटल बिल्डिंग पर हमले को ‘अमेरिकी इतिहास में एक काला दिन’ बताते हुए कैपिटल हिंसा की निंदा की और इसमें हुई मौत पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए ट्विटर पर लिखा है, “हम उन लोगों के आभारी रहेंगे जिन्होंने इस ऐतिहासिक जगह को बचाने के लिए अपनी जगह नहीं छोड़ी। जिन लोगों ने भी कैपिटल में कहर बरपाने की कोशिश की, वो जीत नहीं सकते। हिंसा कभी नहीं जीत सकती। जीत स्वतंत्रता की ही होती है। यह सदन जनता और उनके प्रतिनिधियों के है। आज जब हम इस सदन से बोल रहे हैं, तो दुनिया फिर से अभूतपूर्व हिंसा और बर्बरता के बीच, हमारे लोकतंत्र के लचीलेपन और उसकी ताक़त की गवाह बनेगी।”

हिंसा के दौरान एक ट्वीट में पेंस ने लिखा, “शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करना हर अमेरिकी नागरिक का अधिकार है, लेकिन यूएस कैपिटल पर हमले को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जो भी इसमें शामिल है, उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी।”

वहीं रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कैपिटल बिल्डिंग हमले पर अपने बयान में इस हंगामे के लिए बिना नाम लिए कुछ नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा, “यह हंगामा, इस तरह का ‘राजद्रोह’ एक पागलपन है और जो नज़ारे देखने को मिल रहे हैं, उनसे उन्हें तकलीफ़ पहुंची है। चुनाव के नतीजों को लेकर इस तरह के विवाद असफल गणराज्यों (बनाना रिपब्लिक) में देखे जाते हैं, अमेरिका जैसे देश में नहीं।”

भारत के प्रधानमंत्री ने हिंसा को लेकर चिंता ज़ाहिर की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करके वाशिंगटन कैपिटल बिल्डिंग पर हमले की घटना पर लोकतंत्र की दुहाई देते हुए चिंता प्रकट किया है। उन्होंने कहा है, “वॉशिंगटन डीसी में दंगा और हिंसा की ख़बरें परेशान करने वाली हैं। सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ग़ैर-क़ानूनी विरोध से नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

हालांकि वहीं भारत के मध्य प्रदेश के मंदसौर, राजगढ़, उज्जैन, इंदौर आदि जिलों में दक्षिणपंथी भीड़ द्वारा जानबूझकर मूस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में राम मंदिर के लिए चंदा उगाहने वाली रैली में भड़काऊ उत्तेजक अपमानजनक नारे लगाकर मुस्लिम लोगों को प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य किए जाने और प्रतिक्रिया देने पर उनके घरों, दुकानों को लूटने-तोड़ने के बाद आग के हवाले कर देने, उनकी मस्जिदों पर भगवा झंडा लगाने और फिर प्रशासन द्वारा मुस्लिम पीड़ितों को पत्थरबाज बताकर उनके घरों को बुलडोदर से जमींदोज कर दिए जाने जैसे मामलों पर प्रधान सेवक ने पुरखामोशी ओढ़ रखी है।

बुधवार रात चलेगा सदन
अमेरिकी कांग्रेस में हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव्स की स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने घोषणा की है कि बुधवार रात को सदन चलेगा। उन्होंने कहा, “डेमोक्रेट नेताओं के साथ विचार करने और पेंटागन, न्याय विभाग और उपराष्ट्रपति से बातचीत के बाद हमने तय किया है कि कैपिटल के पूरी तरह साफ़ होने और इस्तेमाल के लिए तैयार होने पर हम आज रात प्रक्रिया पूरी करेंगे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on January 7, 2021 1:07 pm

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