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यूपीः किसानों-नौजवानों के साथ धोखे का बजट- विपक्ष

कल 22 फरवरी को देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपना आखिरी बजट पेश किया। 5,50,270.78 करोड़ के बजट में धार्मिक स्थलों के विकास, गौशालाओं, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट के लिए सरकारी खजाना ही खोल दिया गया, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण जैसी जीवन की बुनियादी ज़रूरतों को या नज़रअंदाज कर दिया गया या फिर ऊंट के मुंह में जीरा की तर्ज़ पर नाममात्र का फंड देने का प्रावधान किया गया।

योगी सरकार के विदाई बजट पर प्रदेश के विपक्षी दलों ने जमकर आलोचनी की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इस बजट में बुनकर, चूड़ी, पीतल, चमड़ा, कार्पेट जैसे MSME उद्योग से जुड़े लोगों को भी कोई प्रोत्साहन या पैकेज न मिलने की बात कहते हुए इस बजट को गरीबों-नौजवानों से विश्वासघात बताया है। उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ सरकार उत्तर प्रदेश के युवाओं को बेरोजगार ही रखना चाहती है। प्रदेश सरकार ने 56 लाख के सापेक्ष चार लाख रोजगार बताए। इसके बाद भी 24 में से 22 भर्ती अटकी पड़ी है। सरकार एक भी उद्योग नहीं लगा पाई।

उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड हों या पूर्वांचल या मध्यांचल कोई जगह, कहीं भी उद्योग नहीं लगा। निषाद भाइयों को कांग्रेस सरकार में जमीन के पट्टे का अधिकार था, बालू का अधिकार था, उनके लिए कोई योजना नहीं है। ब्रांडिंग और पीआर से उत्तर प्रदेश नहीं चल सकता है। यहां पर सुपोषण की बात कही गई। कुपोषण का शिकार सबसे अधिक उत्तर प्रदेश है। गौवंश के लिए भी पर्याप्त बजट नहीं दिया गया। किसानों की आय 2022 तक दोगुना करने को कहा गया है। गन्ने का रिकॉर्ड भुगतान करने को कहा गया। असलियत कुछ और है। कोई भी धान क्रय केंद्रों पर चला जाए, कोई रिकॉर्ड खरीदारी नहीं हुई है।

हमें उम्मीद थी कि यह सरकार किसानों के लिए कोई योजना या विशेष पैकेज लेकर आएगी, बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से बर्बाद किसानों को मुआवजा देगी, लेकिन सरकार ने केवल दिखावे के आलावा एक रुपये तक नहीं दिए। सरकार ने बिजली के बढ़े दामों के बावजूद न तो निजी नलकूप में किसानों को कोई छूट दी और न ही खाद्य, डीजल-पेट्रोल महंगा होने के बावजूद फसलों के दाम एक रुपये तक नहीं बढ़ाए।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि सरकार ने एक बार फिर नये जुमलों के साथ उत्तर प्रदेश के बजट को पेश किया है। जो पूरी तरह से निराशाजनक, किसानों के साथ धोखा और नौजवानों के साथ विश्वासघात है। इस बजट में गरीबों, शोषित-वंचितों के लिए कोई योजना नहीं लाई गई। यह बजट विकास से कोसों दूर है। वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने और गन्ने का रिकार्ड तोड़ भुगतान का दावा करने वाली सरकार न तो आज तक गन्ना किसानों के 10 हजार करोड़ रुपये का बकाया भुगतान कर पाई है, और न ही इस वर्ष गन्ने का दाम बढ़ाया है।

वहीं सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार का बजट सभी वर्ग को धोखा देने वाला और पूंजीपतियों को लाभ देने वाला बताया है। अखिलेश यादव ने कहा, “बजट में भी किसानों के साथ धोखा हुआ है। सरकार ने एक बार फिर से किसानों को धोखा दिया। यह सरकार तो सिर्फ उद्योगपतियों को लाभ पहुंचा रही है। सरकार किसानों को फसल की एमएसपी नहीं दे पाई। आज भी किसान के सामने संकट है और किसान परेशान हैं। देश में डीजल-पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं।”

उन्होंने कहा कि प्रदेश में गंगा नदी तो साफ नहीं हुई बजट साफ हो गया। आज भाजपा सरकार में हर वर्ग परेशान है। भाजपा ने हमेशा देश में नफरत फैलाने का काम किया है। बजट में झूठ बोला जा रहा है। किसानों, युवाओं के लिए कुछ नहीं किया गया। सरकार बस उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के लिए ही काम कर रही है। प्रदेश सरकार का अंतिम बजट आज पूरा हो गया है। यह पांचवां बजट था। अब उनके पास करने को कुछ नहीं है।

सूबे की एक और पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने यूपी बजट पर दो-दो ट्वीट करके प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज पेश भाजपा सरकार का बजट भी केंद्र सरकार के बजट की तरह ही है। यह बजट प्रदेश में खासकर बेरोजगारी की क्रूरता दूर करने के लिए रोजगार आदि के मामले में अति-निराश करने वाला है। केंद्र सरकार की तरह उत्तर प्रदेश के बजट में भी जनता को वादे के साथ हसीन सपने दिखाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यूपी की लगभग 23 करोड़ जनता के विकास की लालसा की तृप्ति के मामले में यूपी सरकार का रिकार्ड केंद्र और यूपी में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद भी वादे के अनुसार संतोषजनक नहीं रहा। खासकर गरीबों, कमजोर वर्गों और किसानों की समस्याओं के मामले में भी उत्तर प्रदेश सरकार का यह बजट भी अति-निराशाजनक है।”

राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने उत्तर प्रदेश सरकार के बजट को विकासहीन और किसान विरोधी बताते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश के किसानों को सरकार के अंतिम बजट से बड़ी उम्मीदें बंधी थीं कि सरकार अपने बजट भाषण में अच्छी घोषणाएं करेगी, लेकिन बजट देखने के बाद उत्तर प्रदेश के किसानों को निराशा ही हाथ लगी है। इस बजट में किसान, मंहगाई और आम आदमी के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश सरकार का यह बजट जनता को गुमराह करने वाला है।”

अनिल दुबे ने कहा कि बजट में किसानों की आय दोगुनी करने की बात ज़रूर की गई है, लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि किस तरह से किसानों की आय बढ़ाने का काम करेगी, क्योंकि बजट में न तो गन्ना मूल्य बढ़ाने की घोषणा की गई है और न ही पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम कम करने की कोई घोषणा की गई है और न ही युवाओं के रोजगार के बारे में कोई योजना बनाई गई है।”

वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पूर्व कैबिनेट मंत्री राम गोविंद चौधरी ने बजट पर कहा, “इससे पहले के भी चार बजट में कोई विकास कार्य नहीं दिखा है। इसमें पेट्रोलियम कीमतों को लेकर रोडमैप नहीं है। यह बजट पेपरलेस के साथ रोजगार लेस है। इसमें यह तो बताया नहीं गया कि किसानों का कितना बकाया है। अगर अधिक बकाया है तो फिर उसको कैसे दिया जाएगा। यह तो धोखा देने वाला बजट है। अब तो यह तय है कि जब सरकार हटेगी तो महंगाई काबू में आएगी।”

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This post was last modified on February 23, 2021 4:06 pm

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