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यूपी के गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर 5922 करोड़ रुपये बकाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट द्वारा किसानों के बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देने के आदेश से चीनी मिल मालिकों के साथ सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। किसानों का चीनी मिलों पर 5922 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सामान्य समादेश जारी करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव और गन्ना आयुक्त को एक महीने में सभी किसानों के बकाये का भुगतान 15 फीसदी ब्याज के सहित भुगतान कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस शशिकांत गुप्ता और जस्टिस एसएस शमशेरी की खण्डपीठ ने किसान जयपाल सिंह और अन्य की याचिका पर दिया है।
खंडपीठ ने कहा कि कंट्रोल आर्डर के तहत गन्ना खरीद से 14 दिन के भीतर उसका भुगतान की बाध्यता है। यदि 14 दिन में भुगतान नहीं होता तो 15 प्रतिशत ब्याज देना होगा। इस सख्त नियम के बावजूद भुगतान न होने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी है, उन्हें सोते रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। खंडपीठ ने याचियों के बकाये का भुगतान ब्याज के साथ 15 दिन में किए जाने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं का 1,60,660 रुपये और 1,01,814 रुपये चीनी मिल पर बकाया है। किसानों को भुगतान नहीं किया गया और किसानों द्वारा बैंक से लिए गए लोन की वसूली का दबाव डाला जा रहा है,जिसपर उन्होंने गन्ना मूल्य बकाये के भुगतान के लिए हाई कोर्ट की शरण ली थी।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि भुगतान न करना किसानों का उत्पीड़न और उन्हें अनावश्यक मुकदमेबाजी में धकेलना भी है। अधिकारियों व गन्ना मिलों के कदाचार को रोकने के लिए बकाया भुगतान तुरंत कराना जरूरी है। खंडपीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता तो जवाबदेह अधिकारी की कोर्ट के प्रति जवाबदेही होगी। खंडपीठ ने अधिकारियों के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि जिन अधिकारियों पर गन्ना भुगतान की जिम्मेदारी है, उनको सोते रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। गन्ना मूल्य का भुगतान न करना न केवल किसानों का उत्पीड़न है, बल्कि उनको अनावश्यक मुकदमेबाजी में धकेलना भी है। अधिकारियों और गन्ना मिलों के कदाचार को रोकने के लिए बकाए गन्ना मूल्य का तुरंत भुगतान कराया जाना जरूरी है।खंडपीठ ने महानिबंधक को आदेश की प्रति मुख्य सचिव व गन्ना आयुक्त लखनऊ को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट द्वारा किसानों के बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देने के आदेश से चीनी मिल मालिकों के साथ सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। किसानों का चीनी मिलों पर 5922 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।गत पेराई सत्रों के बकाया गन्ना मूल्य के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 -17 को 22.29 करोड़ व 2017-18 का 40.54 करोड़ रुपये अभी तक मिलों पर अटके हैं। सत्र 2018-19 की बात करें तो निजी क्षेत्र की चीनी मिलों पर 5524.30 करोड़ रुपये, सहकारी चीनी मिलों पर 364 करोड़ व निगम की मिल पर 33.86 करोड़ रुपये की देनदारी है।
सरकार ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान 30 अगस्त करने की तारीख घोषित की थी, लेकिन समस्या कम नहीं हो पा रही है। जिन मिल समूहों द्वारा बकाया भुगतान में अधिक दिलचस्पी नहीं ली जा रही उसमें बजाज समूह की 14 मिलें भी शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार बजाज समूह द्वारा 54.26 प्रतिशत भुगतान ही किया गया है। यदि समूह की दो मिलों द्वारा मात्र 18.69 प्रतिशत ही भुगतान किया गया है। मोदी समूह की दो मिलों ने 48.57 फीसद और सिंभावली समूह की तीन मिलों ने 32 प्रतिशत व बेव समूह ने 70 फीसद भुगतान किया है। लखीमपुर व बेहड़ी की मिलें भी बड़ी देनदारी दबाए हैं। वहीं दो दर्जन मिलें ऐसी है जो शत- प्रतिशत भुगतान कर चुकी हैं।

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This post was last modified on September 21, 2019 7:40 pm

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