रेहड़ी पटरी वालों के लिए काल बनी यूपी पुलिस

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विकास दुबे जैसे गैंगस्टर को पाय लागूँ और रेहड़ी पटरी वालों को मौत का फ़रमान यही उत्तर प्रदेश पुलिस का चरित्र है। पूरे कोरोनो काल में यूपी पुलिस ने लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर गरीब सब्जी विक्रेताओं और रेहड़ी पटरी वालों को ख़ूब प्रताड़ित किया है। जबकि दूसरी ओर कल कारखाने और बड़ी दुकानें धड़ल्ले से चलती रहीं। लोग बाग तमाम धार्मिक सामाजिक आयोजनों में एकजुट होकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते रहे। पर क्या मजाल की पुलिस वहां फटक भी जाए।   

पुलिस की पिटाई से पटरी दुकानदार की मौत

यूपी पुलिस की मार से जख्मी नरोत्तम उर्फ पंचू की 29 अगस्त को मौत हो गई। दारागंज थाना निवासी नरोत्तम उर्फ पंचू पुत्र श्रीराम सब्जी का ठेला लगा कर अपना परिवार चलाते थे स्थानीय फुटपाथ दुकानदार बताते हैं कि तीन दिन पहले कच्ची सड़क पर पुलिस ने पंचू को लाठी डंडे लात घूसों से बुरी तरह पीटा जिससे नरोत्तम सड़क पर गिर गए मुंह से खून फेंक दिया। घर वालों को सूचना मिली तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन दो दिन बाद उनकी मौत हो गई।

मरहूम के परिजन बताते हैं पुलिस आये दिन गरीबों का उत्पीड़न कर रही है। गाली देना, लाठी मारना आम बात हो गई है। वहीं नेशनल हॉकर फेडरेशन के लोग इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करा कर दोषी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। 

इसी तरह गाज़ीपुर दिलदार नगर के ठेला लगाकर फल बेंचने वाले सलीम कुरैशी को मार मारकर यूपी पुलिस ने उसका पैर तोड़ दिया। पीड़ित परिवार के मुताबिक 29 अगस्त शनिवार रात करीब 2 बजे पुलिस टीम उनके घर पहुंची। बाहर से आवाज़ देकर दरवाजा खुलवाया गया। दरवाजा खुलते ही पुलिस सलीम को घसीटते हुए बाहर ले जाने लगी। पत्नी सरवरी और परिवार की अन्य महिलाओं ने इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें गालियां दीं और थप्पड़ मारने लगे। फिर वह सलीम को घसीटकर घर के बाहर ले गए। बेरहमी से पिटाई की वजह से सलीम बेहोश हो गए। परिवार का कहना है कि इस दौरान उनकी जेब में रखे 20 हजार रुपये निकाल लिए गए। मारपीट के बाद पुलिसकर्मी सलीम को वहीं छोड़ चले गए। 

सीओ जमानियां सुरेश प्रसाद शर्मा के मुताबिक-“सलीम कुरैशी के घर पुलिस टीम पहुंची थी। दरअसल, सलीम कुरैशी के घर गोवंश काटने की खुफिया जानकारी पुलिस को मिली थी। पुलिस टीम को देख भागने की कोशिश में सलीम अपनी छत से कूद गए। उसके चलते उनके घुटने की हड्डी टूटने की खबर मिली है। इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से होगी।” 

यूपी पुलिस की कुछ और कारस्तानियां

30 जून को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के घूरपुर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें घूरपुर थाने के दरोगा सुमित आनंद ने रेहड़ी पटरी पर बिकने के लिए सजी सब्जियों को अपनी गाड़ी के पहिए तले रौंद डाला था। और गरीब किसान अपनी डबडबाई आँखों से अपनी खून पसीने की कमाई को मिट्टी में मिलते देखने के सिवा और कुछ नहीं कर पाए। 

एक वीडियो वायरल हुआ कानपुर शहर का जहां यूपी पुलिस का एक सिपाही एक गरीब सब्जी वाली का ठेला पलट देता है।

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में एक दरोगा वरुण कुमार शाही गरीब फल विक्रेता के ठेले से केले को फेंकता और ठेला उलटता दिखता है। ये वीडियो भी ख़ूब वायरल हुआ था।

रेहड़ी पटरी वालों की प्रतिक्रिया

बाबूगंज बाज़ार में चना चबैना भूनकर गुजारा करने वाले राम खेलावन धुरिया बताते हैं कि “मार्च से शुरू हुआ लॉकडाउन मानो अगस्त में भी चल रहा है। हमें भी अपनी और परिवार के जान की चिंता है। मास्क हमेशा लगाकर रखते हैं, और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखते हैं बावजूद इसके पुलिस पुट्ठे पर लट्ठ बजा जाती है।”

रेहड़ी पर सब्जी की दुकान लगाने वाले जितेंदर पटेल कहते हैं, “ यूपी पुलिस गरीब और अपेक्षाकृत पिछड़े व दलित समाज से आने वाले रेहड़ी पटरी वालों से रुपए नहीं वसूल पाती क्योंकि उनकी आय उतनी होती ही नहीं। इसीलिए वो रेहड़ी पटरी पर दुकानदारी करने वालों को डंडे मारकर बड़े दुकानदारों पर अपनी हदस बनाती है ताकि बड़े दुकानदार लोग उनको चारा डालते रहें। बड़े दुकानदारों के गलत होने पर भी वो छू नहीं सकते, लेकिन उगाही के लिए डर भी तो ज़रूरी है तो वो डर पैदा करने के लिए रेहड़ी पटरी वालों को ढोल की तरह पीटते हैं।”

चौराहे पर फल का ठेला लगाने वाले संतलाल बताते हैं कि पुलिस वालों ने उनके ठेले पर लट्ठ पटक कर ख़ूब फल खाए हैं। हम यथासंभव एहतियात तो बरतते ही हैं पर पुलिस के आगे किसकी चलती है। गलती हो, न हो पर अगर पुलिस कहती है गलती किए हो तो समझ लो किए हैं।

सोरांव तहसील में सब्जी की खेती करने वाले नंदू कोइरी कहते हैं, “हम किसानों की तो हर ओर से मरन है। नीलगाय और छुट्टा सांड़ों ने वैसे ही खेती करना अब मुहाल कर दिया है। मेरे साथ के कई लोगों ने सब्जी उगाना इसी के कारण बंद कर दिया है। दूसरे इस गर्मी कोरोना के चलते सब्जियां औने-पौने दाम बिकी हैं। लागत तक नहीं निकाल पाए हम लोग। अब यूपी पुलिस जीने कमाने नहीं दे रही है।”

कोरोना काल में जब भारत की जीडीपी 23 प्रतिशत गिरते हुए नकरात्मक संख्या में चली गई है। CMIE की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन और कोविड-19 महामारी के चलते अब तक संगठित क्षेत्र में 1.89 करोड़ लोगों की नौकरी गई है। लेकिन अब सरकार ने लोगों की जान की कीमत पर भी सब कुछ खोल देने का ऐलान कर दिया है। सारी सार्वजनिक संस्थाएं धड़ल्ले से बेच दी जा रही हैं। कोविड-19 को फैलने से रोकने का सारा जिम्मा बेचारे रेहड़ी पटरी वालों पर ठेल दिया गया है। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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