Subscribe for notification

दलित महिलाओं के खिलाफ अपराध का गढ़ बना गया है उत्तर प्रदेश: एनसीआरबी की रिपोर्ट

जिस समय हर संवेदनशील इंसान हाथरस की शर्मशार कर देने वाले सामूहिक बलात्कार कांड की खौफनाक तस्वीरों को देखकर विचलित एवं आक्रोशित है और भीतर से हिला हुआ है, ऐसे समय में महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा, बलात्कार और यौन उत्पीड़न के संदर्भ में नेशलन क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा कल (29 सिंतबर) को जारी 2019 की रिपोर्ट कंपा देने वाली है। यह भारतीय समाज की एक क्रूर एवं वीभत्स तस्वीर प्रस्तुत करती है।

रिपोर्ट बाताती है कि 2018 की तुलना में 2019 में महिलाओं के साथ होने वाले विभिन्न किस्म के अपराधों में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। संख्या के हिसाब से देखें तो उत्तर प्रदेश में महिलाएं सबसे अधिक संख्या में अपराधियों का शिकार बनी हैं, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से देखें, तो महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक अपराध असम में हुए हैं, जबकि दलित महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक अपराध इस दौरान राजस्थान में हुए।

2019 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की कुल संख्या 4,05,861 दर्ज की गई। हम सभी जानते हैं कि अभी बहुलांश मामलों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को या तो दर्ज नहीं कराया जाता है या दर्ज नहीं होते हैं। विशेषकर घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न के विभिन्न तरह के मामले। दुखद यह है कि सबसे अधिक 30.9 प्रतिशत (करीब एक तिहाई) महिलाओं के खिलाफ अपराध पतियों द्वारा किए गए, जिन्हें जीवन-साथी कहा जाता है। 21.8 प्रतिशत यौन उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज हुईं, 21.9 प्रतिशत बलात अपहरण और 7.9 बलात्कार की घटनाएं दर्ज हुईं।

सबसे अधिक 59,853 घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुईं। उसके बाद क्रमश: राजस्थान और महाराष्ट्र का नंबर आता है। जनसंख्या के अनुपात में देखें तो असम सबसे ऊपर है, उसके बाद राजस्थान और हरियाणा का नंबर आता है। सबसे अधिक बलात्कार की 5,997 घटनाएं राजस्थान में हुईं, उसके बाद 3,065 घटनाएं उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं। तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश का स्थान है। बच्चियों के साथ अपराध के सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश में घटित हुए।

यह संख्या 7,444 थी, इसके बाद महराष्ट्र और मध्य प्रदेश का नबंर है। जनसंख्या के अनुपात के संदर्भ में देखें, तो बच्चियों के साथ अपराध के मामले में सिक्किम पहले स्थान पर है, उसके बाद मध्य प्रदेश और हरियाणा है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक दहेज उत्पीड़न के मामले सामने आए, इसके बाद बिहार का नंबर है। रिपोर्ट के अनुसार 2019 में देश भर में 150 एसिड अटैक हुए, जिसमें 42 उत्तर प्रदेश और 36 पश्चिम बंगाल में दर्ज किए गए।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की इस रिपोर्ट के अनुसार दलित महिलाओं ( एससी) के खिलाफ कुल 45,935 आपराधिक घटनाएं  हुईं। इसका मतलब है कि करीब 12 प्रतिशत आपराधिक घटनाएं दलित महिलाओं के साथ हुईं। 3,486 दलित महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं दर्ज की गईं। उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं के खिलाफ अपराध की सबसे अधिक 11,829 घटनाएं दर्ज हुईं, जो पूरे देश में दलित महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं का 25.8 प्रतिशत है। इसके बाद राजस्थान का नंबर आता है, जहां 6,794 घटनाएं दर्ज की गईं। इस मामले में तीसरे नंबर पर बिहार है। क्रमश: राजस्थान (554 ) उत्तर प्रदेश (537) और मध्यप्रदेश (510) में दलित महिलाओं के साथ सबसे अधिक बलात्कार की घटनाएं दर्ज हुईं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि भारतीय समाज को एक सभ्य नागरिक समाज नहीं कहा सकता है और न ही भारतीय राज्य को एक ऐसा राज्य कहा जा सकता है, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान कर करता हो। कुछ महीनों पहले विश्वव्यापी एक रिपोर्ट में भारत को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश कहा गया था।

(डॉ. सिद्धार्थ जनचौक के सलाहकार संपादक हैं।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on October 4, 2020 12:42 pm

Share