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सिंघू बॉर्डर के जंगी चेहरे

पिछले 15 दिन से तमाम किसान संगठनों के नेताओं की अगुवाई में लाखों किसान दिल्ली से लगे हरियाणा और यूपी बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। दो दिन पहले 13 किसान संगठनों के नेताओं से गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। इससे पहले 40 किसान संगठनों के नेता तीन केंद्रीय मंत्रियों संग पांच बैठकें कर चुके हैं। नतीजा अब तक सिफ़र रहा है, क्योंकि सरकार कृषि कानून को अपनी नाक का सवाल बनाते हुए इसे वापस न लेने की जिद पर अड़ी है। ऐसे में किसान आंदोलन का और लंबा चलना तय माना जा है। किसानों ने पहले ही बता दिया है कि उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं है। वो अपने संग साल भर का राशन लेकर आए हैं। कौन हैं किसान संगठनों के नेता जो लगातार एक दमनकारी सरकार के सामने डट कर खड़े हैं। डालते हैं एक नजर-

डॉ. दर्शनपाल सिंह
68 साल के दर्शनपाल क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। पटियाला के रणबीरपुरा गांव निवासी डॉक्टर दर्शनपाल सिंह MBBS और MD हैं। 20 वर्ष पंजाब के स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करने के बाद साल 2003 में उन्होंने स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लिया और अपनी 15 एकड़ जमीन पर खेती करने लगे। दर्शनपाल तब से किसानों के बीच काम कर रहे हैं। सरकारी नौकरी करने के दौरान दर्शनपाल कर्मचारी ट्रेड यूनियन में सक्रिय रहे और साल 2016 में क्रांतिकारी किसान यूनियन का गठन किया। 30 संगठनों को एक मंच पर लाने में दर्शनपाल अहम कड़ी हैं और संयुक्त किसान मोर्चा के कोऑर्डिनेटर हैं।

गुरनाम सिंह चढ़ूनी
60 वर्षीय गुरुनाम सिंह चढ़ूनी हरियाणा के कुरुक्षेत्र के बड़े किसान और आढ़तिया हैं। वह कई वर्षों से किसानों के मुद्दों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में उनका व्यापक प्रभाव भी है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था।

जोगिंदर सिंह उगराहां
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से किसान नेताओं को अनौपचारिक बातचीत के लिए दिए आमंत्रण पर भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने तुरंत वीडियो बयान जारी करके किसान नेताओं को आगाह करते हुए कहा था कि नेताओं को अकेले बैठक में नहीं जाना चाहिए था, इससे किसान संगठनों की एकता को लेकर शंकाएं खड़ी हो सकती हैं। जाहिर तौर पर उन्होंने ही सबसे पहले सरकार की ओर से आंदोलन में विभाजन करने की कोशिश की शिनाख़्त की।पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां को किसानों का जननेता कहा जाता है और वो भारत में किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं।

किसान परिवार में जन्मे जोगिंदर सिंह संगरूर ज़िले के सुनाम शहर के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2002 में भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) का गठन किया और तब से वो लगातार किसानों के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं। उनका संगठन पंजाब का एक प्रमुख किसान संगठन है। पंजाब का मालवा क्षेत्र इस संगठन का गढ़ माना जाता है।जोगिंदर सिंह चार साल तक सेना में भी रहे हैं, फिर सेना की नौकरी छोड़ उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) में काम करना शुरू किया।

1989 में भारतीय किसान यूनियन (एकता-सिद्धूपुर) का गठन हुआ तभी से जोगिंदर सिंह उसमें काम करने लगे। फिर साल 2002 में उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहां) का गठन किया। उनका संगठन पंजाब के 30 संगठनों के मोर्चे का हिस्सा नहीं है, लेकिन कृषि क़ानूनों के मामले में इस मोर्चे के साथ समन्वय करके जोगिंदर सिंह का किसान संगठन काम कर रहा है।

रुलदू सिंह मानसा
68 वर्षीय रुलदू सिंह मनसा अखिल भारतीय किसान महासभा के संस्थापक नेता हैं, जोकि सीपीआईएमएल से संबद्ध है। इससे पहले वो भारतीय किसान यूनियन (एकता-सिद्धूपुर) में थे। 13 किसान नेताओं को मीटिंग के लिए बुलाने के बाद जब पता चला कि गृह मंत्री अमित शाह फिजिकली नहीं वर्चुअली मीटिंग करेंगे, तो रुलदू सिंह मानसा और बोध सिंह बैठक से पहले नाराज होकर वापस सिंघू बॉर्डर चले गए गए थे। बाद में अमित शाह को मीटिंग में फिजिकली शामिल होना पड़ा। तब जाकर रुलदू सिंह मानसा इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) पूसा में हुई बैठक में शामिल हुए। पंजाब किसान यूनियन के रुलदू सिंह मानसा मालवा में प्रभावशाली हैं और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन से जुड़े हैं।

सुरजीत सिंह फूल
75 वर्षीय सुरजीत सिंह फूल भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के नेता हैं और वर्तमान किसान आंदोलन के सबसे प्रभावशाली किसान नेताओं में से एक हैं। सुरजीत सिंह फूल ने ही सबसे पहले सरकार द्वारा प्रस्तावित बुराड़ी के संत निरंकारी मैदान को ‘ओपेन जेल’ बताते हुए वहां आंदोलन शिफ्ट करने से मना किया था। साल 2009 में पंजाब की तत्कालीन सरकार ने यूएपीए के तहत उनको गिरफ्तार करके अमृतसर जेल में रखा था। उन पर माओवादियों से संबंध रखने के आरोप लगाए गए थे।

हन्नान मौला
74 वर्षीय हन्नान मौला पश्चिम बंगाल की ऑल इंडिया किसान सभा के जनरल सेक्रेटरी हैं। उनके सचिव रहते अखिल भारतीय किसान महासभा ने साल 2018 में महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली में बड़ा आंदोलन किया था। मात्र 16 वर्ष की आयु से सीपीएम से जुड़ने के बाद वो पोलित ब्यूरो सदस्य भी रहे हैं। वो हावड़ा जिले के उलुबेरिया संसदीय सीट से 8 बार चुनाव लड़े हैं और लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। छात्र जीवन में 11 साल DYFI के जनरल सेक्रेटरी रहे हैं।

बलबीर सिंह राजेवाल
78 वर्षीय बलबीर सिंह भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के अध्यक्ष हैं और लुधियाना जिले के राजेवाल गांव से आते हैं। बलबीर सिंह 1971 से भारतीय किसान यूनियन के साथ हैं। पहले BKU एक ही यूनियन हुआ करती थी। किसान आंदोलन में एक बार उनके ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (यूएपीए) के तहत भी मुकदमा दर्ज हुआ था। 1992 में उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) की स्थापना की थी और इसके अध्यक्ष हैं। उन्हें कृषि मामलों का एक्सपर्ट माना जाता है और इस किसान आंदोलन के सूत्रधार भी बने हुए हैं।वह स्कूल, कॉलेज और एक ‘ऑनेस्टी’ नाम की दुकान चलाते हैं, जिसमें कोई दुकानदार नहीं रहता है, बल्कि एक बाक्स रखा रहता है और ग्राहक को जो लेना होता है, उसका पैसा उसमें डालकर ले लेता है। वह कहते हैं कि वे जीवन में किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े।

शिव कुमार कक्का
शिव कुमार कक्का मध्य प्रदेश में भारतीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष और संस्थापक हैं। शिव कुमार कक्का का नाम जून 2017 में मंदसौर मध्य प्रदेश के आंदोलन के बाद देश भर में ज़ुबान पर चढ़ गया था। इससे पहले 20 दिसंबर 2010 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को 15 हजार किसानों ने अपने ट्रैक्टरों से घेर लिया था। मुख्यमंत्री निवास से लेकर शहर के सभी प्रमुख रास्तों को किसानों ने जाम कर दिया था। किसानों के बिजली और पानी जैसी 85 मांगों को लेकर उस समय आरएसएस के अनुसांगिक किसान संगठन भारतीय किसान संघ की मध्य प्रांत इकाई के अध्यक्ष के रूप में कक्का ने मोर्चा संभाला था।

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के वनखेड़ी के पास ग्राम मछेरा खुर्द में 28 मई 1952 को एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ। जबलपुर विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट और एमए राजनीति शास्त्र की शिक्षा प्राप्त कक्का जी छात्र राजनीति में शरद यादव के साथ जुड़े रहे। मध्य प्रदेश सरकार के विधि बोर्ड में विधिक सलाहकार के रूप में काम किया। कुछ समय नौकरी करने के बाद वह किसान आंदोलन में कूद पड़े। संघ के अनुसांगिक किसान संगठन भारतीय किसान संघ में पहले महामंत्री और बाद में अध्यक्ष रहे।

राकेश टिकैत
राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के शीर्ष और कद्दावर नेता रहे महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे हैं। यह भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों की आवाज को लेकर कई बार सड़क पर आंदोलन कर चुके हैं। पिछले महीने भी वह हजारों किसानों के साथ मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे थे। उनके आह्वान पर हजारों किसान वहां एकत्र हुए थे।8 दिसंबर को भारत बंद के दौरान गृह मंत्रालय की ओर से किसानों संग बैठक की बात भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राकेश टिकैत के मार्फत ही शुरू हुआ था।

बूटा सिंह बुर्जगिल
62 वर्षीय बूटा सिंह बुर्जगिल भारतीय किसान यूनियन (एकता-डकौंदा) के अध्यक्ष हैं। पंजाब के मालवा क्षेत्र के ग्रामीण इलाक़ों में इनके किसान संगठन का ख़ासा प्रभाव है। बठिंडा जिले के बुर्ज गिल गांव से संबंध रखने वाले बूटा सिंह 1984 से किसान संगठन के साथ जुड़े हुए हैं। इस दौरान उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के अलग-अलग ग्रुपों के साथ काम किया और 2007 में भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) बनाई। 5वीं कक्षा तक पढ़े बूटा सिंह पर अलग-अलग किसान आंदोलनों में 50 मुकदमे दर्ज हैं।

जगजीत सिंह डल्लेवाल
62 वर्षीय जगजीत सिंह डल्लेवाल भारतीय किसान यूनियन (एकता-सिद्धूपुर) के अध्यक्ष हैं और फरीदकोट जिले के डल्लेवाल गांव से आते हैं। बीकेयू (एकता-उगराहां) के बाद इनके संगठन को पंजाब का दूसरा सबसे बड़ा किसान संगठन माना जाता है। पंजाब के 14 जिलों में इनके संगठन का काम है और अपने संगठन को गैर राजनीतिक संगठन बनाए रखा है। पटियाला की पंजाब यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में MA पास जगजीत सिंह 1983 से किसान संगठनों में काम कर रहे हैं। 15 एकड़ जमीन के मालिक जगजीत सिंह एक साधारण जीवन जीने में विश्वास रखते हैं।

मंजीत सिंह राय
मंजीत सिंह भारतीय किसान यूनियन दोआबा के नेता हैं। वो पंजाब के प्रमुख किसान नेता हैं और कई बार किसान आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। अमित शाह से मीटिंग करके आने के बाद उन्होंने दावा किया कि बैठक में अमित शाह ने किसानों से चर्चा न करने की गलती मानी है।

हरिंदर सिंह लखोवाल
भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह भी पंजाब के प्रमुख किसान नेता हैं और किसानों की मांग को लेकर आवाज उठाते रहते हैं और लंबे समय से किसान यूनियनों से जुड़े रहे हैं।

हरजिंदर सिंह टांडा
57 वर्षीय हरजिंदर सिंह टांडा आज़ाद किसान संघर्ष समिति (पंजाब) के संस्थापक नेता है। इनका संगठन चार जिलों में सक्रिय है और इसका कोई राजनीतिक लिंक नहीं है। टांडा में 13 एकड़ का खेत है, जिस पर वह धान और सब्जियां उगाते हैं और 15 वर्ष 2018 तक गांव के सरपंच थे। साल 2000 से किसान संघर्ष समिति के संस्थापक सदस्य बनने पर कई विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। वह समिति के चंचल समूह का हिस्सा बन गए और बाद में उन्होंने आजाद किसान संघर्ष समिति की स्थापना की।

बोध सिंह मानसा
बोघ सिंह मनसा (68) भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। वह पिछले 42 साल से किसानों के मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं। छात्र जीवन से ही वो एक्टिविज्म से जुड़े हुए हैं। वह पंजाब छात्र संघ से भी जुड़े रहे हैं।

कुलवंत सिंह संधू
65 वर्षीय कुलवंत सिंह संधू जम्हूरी किसान सभा के नेता है। सीपीएम की छात्र इकाई SFI के साथ जुड़कर उन्होंने पंजाब के अलगाववादी मूवमेंट के खिलाफ़ लड़ाई लड़ी थी। रुरका कलां गांव के सरपंच भी रह चुके हैं। आतंकवाद के खिलाफ़ अपने स्टैंड के लिए उन्होंने पांव में गोली भी खाई है। साल 2001 में वो सीपीएम छोड़कर रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की सेंट्रल कमेटी से जुड़ गए।

बलदेव सिंह सिरसा
72 वर्षीय बलदेव सिंह सिरसा ‘लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी’ के किसान नेता हैं और स्थानीय टीवी चैनलों पर एक जाना-माना चेहरा हैं और उच्च न्यायालय में किसानों के मुद्दों और सिख धार्मिक संस्थानों से संबंधित कई मुकदमों के लिए जाना जाता है। उन्होंने हरियाणा में एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी काम किया है। सिरसा के पिता चौधरी देवीलाल के करीबी माने जाते थे, जबकि खुद सिरसा को ओपी चौटाला का करीबी माना जाता है।

सतनाम सिंह बेहरू
81 वर्षीय सतनाम सिंह बेहरू ‘भारतीय किसान यूनियन’ के नेता हैं। बेहरू लगभग चार दशकों से कृषि संबंधी मुद्दों पर काम कर रहे हैं। स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को लागू नहीं करने वाली मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ़ साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में उनको याचिका दायर करने के लिए जाना जाता है। 2014 के चुनावों में उनके संगठन ने बीजेपी का समर्थन किया, लेकिन स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने से इनकार करने और ‘किसानों को धोखा देने’ के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ़ हैं।

मुकेश चंद्र
65 वर्षीय मुकेश चंद्र ‘दोआबा किसान संघर्ष समिति’ के उपाध्यक्ष हैं, जिसे जालंधर के आसपास के क्षेत्रों में प्रभावशाली माना जाता है। मुकेश चंद्र ने अगस्त और अक्तूबर 2016 के बीच जालंधर में विरोध प्रदर्शन में संगठन का नेतृत्व किया, जिसमें गन्ने की 0238 किस्म की अधिसूचना की मांग की गई, ताकि इसकी कीमत 370 रुपये प्रति क्विंटल हो सके। वह उन समूहों का हिस्सा थे, जिन्होंने पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह के साथ बातचीत की और अंततः रेल नाकाबंदी को उठाने के लिए सहमत हुए।

सुखपाल सिंह डफ़र
61 वर्षीय सुखपाल सिंह डफ़र ‘गन्ना संघर्ष समिति’ के अध्यक्ष हैं और मुख्य रूप से होशियारपुर में सक्रिय हैं। दसुआ में गन्ना किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। संगठन ने दो साल पहले चीनी मिलों की बकाया राशि और कीमतों में वृद्धि की मांग के लिए एक आंदोलन किया, जिसमें अपनी मांगे मनवाने के लिए जम्मू-जालंधर राजमार्ग और रेलवे ट्रैक ब्लॉक किया गया था।

हरपाल सिंह
60 वर्षीय हरपाल सिंह ‘आजाद किसान समिति दोआबा’ के नेता हैं। ये संगठन होशियारपुर में मुख्य रूप से सक्रिय है। हरपाल सिंह ने सितंबर में होशियारपुर में सड़क अवरोध के दौरान संगठन का नेतृत्व किया है।

बलदेव सिंह मियापुर
69 वर्षीय बलदेव सिंह मियापुर भारतीय किसान यूनियन (मान) के अध्यक्ष हैं, जिसका मुख्यालय हरियाणा में है। परंपरागत रूप से कांग्रेस के करीब मियापुर संगठन के पंजाब अध्यक्ष हैं और जुलाई 2019 में बीटी कपास उगाने की आजादी की मांग उठाने समेत पूरे उत्तर भारत में किसान आंदोलन का हिस्सा रहे हैं।

कृपाल सिंह नथुवाला
52 वर्षीय कृपाल सिंह नथुवाला ‘किसान बचाओ मोर्चा’ के अध्यक्ष हैं, जोकि अंतरराष्ट्रीय पंथिक दल के पंजाबी किसानों की शाखा है। नथुवाला पानी के बंटवारे समेत किसानों के मुद्दों के बारे में मुखर रहे हैं और रेल मार्ग अवरोध को लेकर पंजाब सरकार के साथ बातचीत में शामिल रहे थे।

परमिंदर सिंह पाल माजरा
65 वर्षीय परमिंदर सिंह पाल माजरा भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के पंजाब अध्यक्ष हैं। उनके संगठन ने अन्य किसान यूनियनों की अनुमति के बिना ही सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानूनों के खिलाफ याचिका दायर की थी। अक्तूबर में केंद्रीय कृषि सचिव के साथ बातचीत के दौरान, उन्होंने ‘किसानों को शिक्षित करने की कोशिश’ वाले बयान पर केंद्र पर जोरदार हमला बोला था।

प्रेम सिंह भंगू
प्रेम सिंह भंगू ‘कुल हिंद किसान फेडरेशन’ के संस्थापक अध्यक्ष हैं। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में प्रैक्टिस करते हैं। उन्होंने साल 2014 में इस संगठन को स्थापित किया है। वह 1992 से किसानों के मुद्दों से जुड़े हुए हैं और वामपंथी राजनीति में बहुत समय से हैं। अपने कॉलेज के दिनों में साल 1970 में SFI से जुड़कर उन्होंने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी।

किरनजीत सेखों
किरनजीत सेखों ‘कुल हिंद किसान महासंघ (संगरूर)’ के नेता हैं। ये संगठन संगरूर में सक्रिय है। अपने कॉलेज के दिनों और वाम किसान संगठनों के हिस्से के बाद से वामपंथियों के साथ जुड़े, सेखों संगरूर में एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं और दो साल पहले कुल हिंद किसान महासंघ के संगरूर गुट में शामिल हुए थे।

बूटा सिंह शादीपुर
59 वर्षीय बूटा सिंह शादीपुर ‘भारतीय किसान मंच’ के नेता हैं। उनके पिता शिरोमणि अकाली दल के सदस्य थे और खुद बूटा सिंह शादीपुर 30 साल से अधिक समय तक पार्टी की ओर से किसानों से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहे हैं, लेकिन उन्होंने 2016 में भारतीय किसान मंच को लांच करने के लिए उसी साल पार्टी छोड़ दी, और वर्तमान आंदोलन में विभिन्न संगठनों को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं।

जंगबीर सिंह टांडा
45 वर्षीय जंगबीर सिंह टांडा ‘दोआबा किसान समिति’ के नेता हैं। होशियारपुर जिले में टांडा ने गन्ने की खेती से संबंधित मुद्दों पर किसानों के लिए काम किया है। उनके संगठन ने कहा कि वे आंदोलन को राजनीतिक रखने के लिए दृढ़ हैं।

सतनाम सिंह साहनी
48 वर्षीय सतनाम सिंह साहनी भारतीय किसान यूनियन (दाओबा) के नेता हैं। मुख्य रूप से गन्ना किसानों के साथ दाओबा में सक्रिय हैं। सबसे कम उम्र के किसान नेताओं में, साहनी के पास लगभग 30 एकड़ जमीन है। उन्होंने पांच साल पहले गन्ने की कम खरीद दर के खिलाफ किसानों को जुटाकर राज्य सरकार को कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया था। खालसा कॉलेज से स्नातकोत्तर हैं और पंजाब विश्वविद्यालय में फुटबॉलर थे।

बलविंदर सिंह औलख
42 वर्षीय बलविंदर सिंह औलख ‘माजा किसान समिति’ के नेता हैं, जो कि माजा क्षेत्र में सक्रिय है। औलख ने पिछले छह वर्षों से गन्ना किसानों के सामने आने वाले मुद्दों से संबंधित आंदोलन का नेतृत्व किया है। अपने गांव के सरपंच रहे औलख ने 2014 में समिति का गठन किया और अपने क्षेत्र में मंडियों से संबंधित मुद्दों को भी संभाल रहे हैं।

हरजिंदर सिंह टांडा
57 वर्षीय हरजिंदर सिंह टांडा आज़ाद किसान संघर्ष कमेटी (पंजाब) के नेता है। उनका संगठन चार जिलों में सक्रिय है। वो साल 2018 तक अपने गांव के 15 साल सरपंच रहे हैं। उन्होंने साल 2000 में किसान संघर्ष कमेटी की स्थापना के बाद कई आंदोलनों में हिस्सा लिया है।

हरमीत सिंह
43 वर्षीय हरमीत सिंह भारतीय किसान यूनियन (कादियान) के नई पीढ़ी के किसान नेता हैं। उनके दादा बीकेयू के संस्थापक सदस्य थे और कादियान जिले में संगठन के 70,000 सदस्य हैं। उनके पास 20 एकड़ ज़मीन है। वह गांव और ज़िला स्तर पर नियमित बैठकों के माध्यम से जमीनी स्तर पर आंदोलन को ज़िंदा रखने की कोशिश करते हैं। वह 15 साल पहले संगठन में शामिल हुए थे।

निर्भय सिंह दूधिके
70 वर्षीय निर्भय सिंह दूधिके कीर्ति किसान यूनियन के नेता है। वह भारत के मार्क्सवादी लेनिनवादी (UCCRI-ML) के तारिमाला नेगी रेड्डी के यूनिटी सेंटर के साथ जुड़े थे और टिलर यूनियन की स्थापना की। आपातकाल के दौरान उन्हें 19 महीने की जेल हुई और 1980 के दशक के अंत में CPI (ML) न्यू डेमोक्रेसी में शामिल हो गए।

बलदेव सिंह निहालगढ़
64 वर्षीय बलदेव सिंह निहालगढ़ कुल हिंद किसान सभा के नेता हैं। उन्होंने सीपीआई की युवा शाखा, एआईवाईएफ के साथ शुरुआत की और बाद में पंजाब के अग्रणी किसान नेताओं में से एक बन गए। केएचकेएस सीपीआई की अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध हैं और निहालगर्म कम्युनिस्टों के एक परिवार से आता है।

मेजर सिंह पुनावल
60 वर्षीय मेजर सिंह पुनावल ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हैं और सीपीएम से जुड़े हुए हैं। उनका परिवार पुनावल में खेतों का मालिक है। 1973 में संगरूर के एक कॉलेज में SFI में शामिल होने के बाद से पुनावल लगभग पांच दशकों से वामपंथी संगठनों के साथ हैं।

इंद्रजीत सिंह कोट बुधा
50 वर्षीय इंद्रजीत सिंह किसान संघर्ष कमेटी (पंजाब-कोट बुद्धा) के समन्वयक हैं, जोकि मुख्यतः अमृतसर, तरन तारन, जालंधर फिरोजपुर आदि जिलों में सक्रिय है। बीमार होने के चलते वो मीटिंग में तो नहीं जा पाए पर उन्होंने अपना प्रतिनिधि भेजा था। उन्हें 2018 में संगठन का प्रमुख बनाया गया था।

गुरबख्श सिंह बरनाला
67 वर्षीय गुरबख्श सिंह बरनाला ‘जय किसान अंदोलन’ से जुड़े हुए हैं। वह बरनाला के कट्टू गांव में 2.5 एकड़ के छोटे किसान हैं। वह अपने संगठन के संस्थापक सदस्य है, जिसे उन्होंने साल 2015 में स्थापित किया था। हालांकि बीमार होने की वजह से वो बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं।

सतनाम सिंह पन्नू
65 वर्षीय सतनाम सिंह पन्नू किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता हैं। उनका संगठन माजा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों में 10 जिलों में सक्रिय है। तरनतारन के पिद्दी गांव से आने वाले, पन्नू अपने कॉलेज के दिनों से आंदोलनों में सक्रिय हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ बिल्कुल शुरुआत से वह बहुत मजबूत स्टैंड लेते आ रहे हैं। उनके संगठन ने अमृतसर के पास जंडियाला गुरु में पटरियों पर अपना धरना जारी रखा है, जबकि अन्य लोगों ने पिछले सप्ताह विरोध को बंद करने के लिए सहमति व्यक्त की थी। उनका संगठन साल 2000 में बना था, जब तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल-भाजपा सरकार मंडियों से धान नहीं खरीद रही थी और यह उनके आंदोलन के कारण ही सरकार को आखिरकार किसानों की फसल उठानी पड़ी थी।

कंवलप्रीत सिंह पन्नू
55 वर्षीय कंवलप्रीत सिंह पन्नू किसान संघर्ष समिति (पंजाब) के नेता हैं। उनका संगठन साल 2000 में स्थापित किया गया था और 2015 में भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन समेत कई आंदोलन का हिस्सा रहा है। अप्रैल में, उनके संगठन ने लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेसिंग के मापदंडों के साथ एक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें मांग की गई कि गेहूं की फसल को उठा लिया जाए और जरूरतमंदों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा और राशन प्रदान किया जाए।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 10, 2020 9:11 pm

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