कौन है शाइस्ता परवीन, जिसके पीछे शिकारी कुत्ते की तरह पड़ा है मीडिया?

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प्रयागराज। 15 अप्रैल की रात अतीक और अशरफ़ की पुलिस कस्टडी में मीडिया के सामने हत्या कर दी गयी। जबकि, जब अतीक को साबरमती और अशरफ को बरेली जेल से प्रयागराज ले आने की कवायद शुरू हुई, ठीक तब से अतीक-अशरफ का परिवार लगातार कोर्ट, सरकार और प्रेस कान्फ्रेंस करके मीडिया में गुहार लगाता रहा कि दोनों को जान से मारने के लिए ही ये सब किया जा रहा है।

परिवार जेल में पूछताछ करने और जेल से ही वीडियो कान्फ्रेंसिग के जरिए कोर्ट में पेश करने की दलीलें देता आ रहा है। बावजूद इसके सुरक्षा के लिहाज से कोर्ट, सरकार और पुलिस प्रशासन ने समुचित कदम नहीं उठाए। अतीक और अशरफ ने कोर्ट में याचिका डालकर सुरक्षा मांगी थी लेकिन कोर्ट ने यूपी सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा कि यूपी पुलिस उनकी सुरक्षा करेगी उन्हें पुलिस पर भरोसा करना होगा। 

और फिर 15 अप्रैल को वही हुआ जिसकी आकांक्षा भाजपा नेताओं को थी, जिसकी आशंका अतीक, अशऱफ, शाइस्ता और उनके परिवार को थी, जिसका इंतज़ार मुंह में ख़ून लग चुके जनता के एक वर्ग को थी। हत्या के बाद यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ट्विटर पर लिखा- ‘पाप-पुण्य का हिसाब इसी जन्म में होता है’। वहीं यूपी सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना ने तीन अपराधियों द्वारा अंजाम दिए गए इस कुकृत्य को ‘आसमानी फ़ैसला’ बताया।

वहीं दो महीने पहले कन्नौज से भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने एनकाउंटर के पक्ष में माहौल बनाते हुए कहा कि ‘याद रखो जब विकास दुबे नहीं बचा तो इन दुर्दांतों का क्या होगा, ये बताने की आवश्यकता नहीं है। अब यदि अतीक की गाड़ी पलट जाये तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा’। यूपी भाजपा के महामंत्री जेपीएस राठौर ने कहा कि ‘मैं अपराधियों से कहना चाहता हूं कि अगर पकड़े जायें तो बहुत हाय तौबा न करें। गाड़ी पलट भी सकती है। अगर ऐसा हुआ तो वो खुद जिम्मेदार होंगे’।

अतीक-अशरफ़ की पुलिस कस्टडी में हत्या की नाकामी को दबाने और जनता के भीतर ख़ून की प्यास को और बढ़ाने के लिए रक्त-पिपासु मीडिया ने और आक्रामक रवैया अपनाते हुए अपने नये टारगेट शाइस्ता परवीन पर फोकस किया। अब उसके लिए गॉड मदर, लेडी डॉन जैसे उपमान गढ़े जा रहे हैं। पिछले दो दिनों से मीडिया शिकारी कुत्ते की तरह शाइस्ता परवीन पर कपोलकल्पित, रहस्यमयी और सनसनीखेज ख़बरें प्लांट करता आ रहा है।

कुछ उसकी लानत-मलानत कर रहे हैं कि कैसी महिला है पति मर गया, देवर मर गया, बेटा मर गया लेकिन जनाजे तक में नहीं आयी। अब क्या बचा है जो अभी भी भागती फिर रही है। वहीं कुछ मीडिया संस्थान टीआरपी न गिरने पाये इसके लिए घंटे-पहर के हिसाब से शाइस्ता परवीन की लोकेशन को लेकर सनसनीखेज खुलासे कर रहे हैं। बुधवार को ऐसे ही एक चैनल के खुलासे पर पुलिस वाले सारा दिन ड्रोन उड़ाते रहे।  

इस बीच पुलवामा और प्रधानमंत्री पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का आरोप, अमित शाह की सभा में लू से 13 लोगों की मौत और भाजपा के कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री के कांग्रेस में जाने की ख़बरें पूरी तरह से ब्लैकआउट कर दी गयीं।

अब बात शाइस्ता परवीन की। आखिर कौन है शाइस्ता परवीन, जिस पर पुलिस ने 50 हजार रुपये का ईनाम रखा है। प्रयागराज जिले के दामूपुर निवासी और यूपी पुलिस में कांस्टेबल मोहम्मद हारुन के घर साल 1972 में शाइस्ता का जन्म हुआ। चार बहनों और दो भाईयों में सबसे बड़ी शाइस्ता परवीन का बचपन पिता के साथ प्रतापगढ़ के सरकारी क्वार्टर में पुलिस कॉलोनी बहुत ही साधारण माहौल में बीता। पढ़ने में तेज शाइस्ता ने कक्षा 12 तक की तालीम किदवई गर्ल्स इंटर कॉलेज से हासिल की। फिर प्रयागराज के किसी डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। 

अतीक और शाइस्ता दोनों पसमांदा मुस्लिम समाज आते हैं और दोनों के परिवारों का आपस में पहले से मेलजोल था। फिर अतीक का शाइस्ता के घर आना-जाना भी था। अतीक चौथी बार विधायक बने तो एक दिन शाइस्ता के पिता मोहम्मद हारुन ने अतीक से अपनी बेटी शाइस्ता से विवाह का प्रस्ताव रखा। अतीक ने विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। फिर 24 साल की उम्र में 2 अगस्त 1996 में अतीक अहमद से शाइस्ता की शादी हो गयी।

शादी के बाद शाइस्ता की ज़िन्दगी घर, परिवार, बच्चों को सम्हालने में सिमटकर रह गयी। शाइस्ता ने पांच बेटों अली, उमर, असद, अज़ान और अबान को जन्म दिया। अली और उमर क्रमशः नैनी और लखऩऊ की जेल में हैं। असद को 13 अप्रैल को यूपीएसटीएफ ने एनकाउंटर में मार दिया। जबकि सेंट जोसेफ कॉलेज में कक्षा 12 और कक्षा 9 में पढ़ने वाले अज़ान और अबान बाल सुधार गृह में हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक रिटायर्ड शिक्षक के बयान के मुताबिक शाइस्ता परवीन बेहद विनम्र स्वभाव की महिला हैं और वो कोई भी पैरेट्स-टीचर मीटिंग मिस नहीं करती थीं।

पति अतीक अहमद के जेल जाने और उनका राजनीतिक कैरियर डांवाडोल होने के बाद शाइस्ता परवीन ने राजनीति में अपने कदम जमाने के लिए हाथ पांव मारना शुरू किया। साल 2018 में फूलपुर संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में जब अतीक अहमद ने जेल से नामांकन किया तो शाइस्ता परवीन पहली बार चुनावी प्रचार के लिए घर से बाहर निकलीं।

इसके बाद सितंबर 2021 में शाइस्ता परवीन असदुद्दीन ओवैशी की पार्टी एआईएमआईएम में शामिल हुईं। फिर 5 जनवरी 2023 में उन्होंने बसपा का दामन थामा। बसपा ने उन्हें प्रयागराज के महापौर पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया। 

शाइस्ता परवीन के आपराधिक रिकॉर्ड की बात करें तो पुलिस डोजियर के मुताबिक साल 2009 में उसके खिलाफ 4 केस दर्ज़ हुए। इसमें एक हत्या का और तीन धोखाधड़ी का मामला है। एक प्रॉपर्टी डीलर जीशान ने शाइस्ता परवीन पर फोन करके धमकाने और अतीक के नाम पर रंगदारी मांगने का आरोप लगाया था।

24 फरवरी को उमेश पाल हत्याकांड में सहआरोपी बनाये जाने के बाद उसी रात शाइस्ता परवीन अग्रिम जमानत के लिए आवेदन देने धूमनगंज पुलिस स्टेशन गयी थीं। ऐसा तमाम मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट किया है। लेकिन तब पुलिस वालों ने उसे गिरफ़्तार नहीं किया। 25 फरवरी को दर्ज़ एफआईआर में शाइस्ता परवीन को भी नामज़द किया गया।

पुलिस को शाइस्ता परवीन पर साबरमती जेल में अपने पति अतीक अहमद तक मोबाइल फोन और सिम पहुंचाने का शक़ है। साथ ही प्रयागराज के मेयर का प्रत्याशी घोषित होने के बाद चुनाव प्रचार के समय के एक वीडियो में शाइस्ता परवीन के साथ शूटर अरमान दिख रहा है। वहीं एक दूसरे वीडियो में शाइस्ता एक अन्य शूटर साबिर के साथ दिख रही हैं।

(प्रयागराज से स्वतंत्र पत्रकार सुशील मानव की रिपोर्ट)

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