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अभी तक क्यों नहीं बदले गये कर्ज़ को बट्टेखाते में डाले जाने के नियम

देश के कई बड़े पूंजीपतियों के 68,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बट्टे खाते में डाले जाने पर मोदी सरकार और कांग्रेस के बीच घमासान जारी है। आरोप-प्रत्यारोप, वार-पलटवार का दौर जारी है। लेकिन इन सबके बीच वित्तमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संसद में पूछे जाने पर सरकार ने 50 विलफुल डिफाल्टर्स का नाम क्यों नहीं बताया? सवाल यह भी उठ रहा है कि कर्ज माफी या बट्टे खाते में डाले जाने के नियम मोदी सरकार ने पिछले छह साल में खत्म क्यों नहीं कर दिया। इतने विशाल बहुमत की मोदी सरकार ने आखिर इन नियमों को क्यों अभी तक बनाये रखा।

दरअसल बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले जिन 50 बड़े कर्जदारों और भगोड़ों का कर्ज माफ किया गया है उससे विवादों का पिटारा खुल गया है। इसे लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला, जिसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार किया और जवाब दिया। इस पर जवाबी पलटवार करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि कोई इस बात से इनकार नहीं कर रहा है कि जान बूझ कर कर्ज अदा नहीं करने वालों पर कर्ज बट्टे खाते में डालने वाला नियम लागू नहीं होना चाहिए। परंतु हम इन भगोड़ों के बारे में सवाल कर रहे हैं। वे देश छोड़कर भाग चुके हैं। आप यह नियम नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या के लिए लागू क्यों कर रहे हैं। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि भगोड़े लोगों के मामले में तकनीकी नियम लागू नहीं होना चाहिए।

पी चिदंबरम ने कई पूंजीपतियों के कर्ज बट्टे खाते में डालने से जुड़ी रिपोर्ट को लेकर गुरुवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक को नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे भगोड़ों से कर्ज की वसूली के लिए कदम उठाना चाहिए। पूर्व वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि इन लोगों से कर्ज वसूल करने के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव भी किए जा सकते हैं। चिदंबरम ने ट्वीट किया कि कर्ज माफी या बट्टे खाते में डाले जाने पर बहस अव्यवहारिक है। इससे नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या जैसे लोग खुश होंगे। नियम इंसानों ने ही बनाए हैं। अगर कोई नियम बनाया जा सकता है, तो उसे खत्म भी किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक गलती को दुरुस्त करने का एकमात्र रास्ता है कि रिजर्व बैंक सभी संबद्ध बैंकों को निर्देश दे कि वे अपने बही-खातों में लिखे ब्यौरे को पलटें और भगोड़ों से वसूल नहीं किए जा सके कर्ज को अपने बही खाते में बकाया कर्ज के तौर पर दिखाकर उनकी वसूली के लिए कदम उठाएं।

दरअसल, कांग्रेस का दावा है कि 24 अप्रैल को आरटीआई के जवाब में रिजर्व बैंक ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए 50 सबसे बड़े बैंक घोटाले बाजों का 68,607 करोड़ रुपये माफ करने की बात स्वीकार की। इनमें भगोड़े कारोबारी चोकसी, नीरव मोदी और माल्या के नाम भी शामिल हैं। कांग्रेस के इस दावे को लेकर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार रात कहा कि जान बूझ कर ऋण नहीं चुकाने वाले संप्रग सरकार की फोन बैंकिंग के लाभकारी हैं और मोदी सरकार उनसे बकाया वसूली के लिए उनके पीछे पड़ी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर कहा कि उनकी सरकार ने डिफॉल्टर्स के खिलाफ एक्शन लेकर काफी पैसों की वसूली की है। इसके लिए वित्त मंत्री ने मेहुल चोकसी, नीरव मोदी से लेकर विजय माल्या तक का पूरा हिसाब अपने ट्वीट में दिया है। उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि यह मोदी सरकार ही है, जिसने ऐसे विलफुल डिफॉल्टर्स पर एक्शन शुरू किया है। हमारी सरकार ने 9967 रिकवरी सूट और 3515 एफआईआर दर्ज किए हैं। इसके अलावा, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या के मामलों में करीब 18332 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच या सीज की जा चुकी है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सरकार से बैंक घोटालेनबाजों के नाम पूछे थे लेकिन संसद में इन कर्जदारों के नाम छिपाए गये हैं। राहुल ने ट्वीट किया “संसद में मैंने एक सीधा सा प्रश्न पूछा था- मुझे देश के 50 सबसे बड़े बैंक चोरों के नाम बताइए। वित्तमंत्री ने जवाब देने से मना कर दिया। अब रिजर्व बैंक ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी सहित भाजपा के ‘मित्रों’ के नाम बैंक चोरों की लिस्ट में डाले हैं। इसीलिए संसद में इस सच को छुपाया गया”।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on May 1, 2020 7:01 pm

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