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Thursday, September 16, 2021

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रूल आफ लॉ में बिना अपराध कठोर धाराओं में क्यों फंसा रही एनसीबी!

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एक ओर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत को शिकायत है कि देश में कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र है, लेकिन यक्ष प्रश्न यह है कि जब ज्यादा लोकतंत्र है तो देश में कानून के शासन का अनुपालन क्यों नहीं हो रहा है? क्यों हर मामले में राष्ट्रद्रोह से लेकर एनएसए और ड्रग्स एक्ट तक का दुरुपयोग किया जा रहा है? अब एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) को ही ले लें तो इसके गठन का उद्देश्य बड़े ड्रग तस्कर की जानकारी जुटाना, अंतरराज्यीय स्तर पर ड्रग की तस्करी का भंडाफोड़ करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग माफिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना था, लेकिन यह मुंबई की फ़िल्मी दुनिया में 10 ग्राम से लेकर 90 ग्राम गांजा तक की बरामदगी और गिरफ़्तारी में संलग्न है। सवाल उठ रहा है कि क्या एनसीबी किसी दबाव में तो काम नहीं कर रही?  

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती नारकोटिक्स के मामलों में तीन महीने जेल में रहे, जिन्हें अदालत ने कोई आरोप ही नहीं माना है। एक हफ़्ते पहले ही विशेष अदालत के आदेश के बाद शौविक को जेल से रिहा किया गया है और अब कोर्ट का विस्तृत फ़ैसला आया है। इस आदेश में कोर्ट ने कहा है कि ड्रग्स की तस्करी के लिए धन मुहैया कराने के सख़्त आरोप उनके मामले पर लागू ही नहीं होते हैं, जबकि उन पर जो आरोप लगाए गए थे, उसमें 20 साल की सज़ा का प्रावधान था। यही वह आधार था जिस पर शौविक की ज़मानत याचिका को पहले खारिज कर दिया गया था।

अब सवाल उठ रहा है कि क्या सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई को कुछ नहीं मिला तो क्या एनसीबी किसी दबाव में रिया और शौविक के ख़िलाफ़ काम कर रही थी? नारकोटिक्स से जुड़ी धारा 27 में ड्रग्स के इस्तेमाल के लिए सज़ा का प्रावधान है और धारा 27ए में ड्रग्स की तस्करी के लिए धन मुहैया कराने पर सज़ा का प्रावधान है। क्या इन दोनों में से किसी भी मामले के दायरे में रिया चक्रवर्ती, शौविक या दूसरे एक्टर आते हैं?

दरअसल ड्रग्स जितनी मात्रा में (59 ग्राम हशीश) जब्त होना बताया गया है, उससे इसकी सज़ा अधिकतम एक साल तक की हो सकती है। इसके लिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। सामान्य तौर पर तीन साल से कम सज़ा होने पर तुरंत ज़मानत का प्रावधान है और इस बारे में सुप्रीम कोर्ट का ही साफ़ तौर पर निर्देश है। एनसीबी ने शौविक चक्रवर्ती को सितंबर महीने में गिरफ़्तार किया था। उसने आरोप लगाया था कि शौविक ड्रग्स की तस्करों की कड़ी का एक हिस्सा थे। एजेंसी ने उनके ख़िलाफ़ 27ए के तहत केस दर्ज किया था।

रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती को जमानत देने वाली अदालत ने कहा है कि उन पर ड्रग्स की खरीद-फरोख्त का आरोप नहीं बनता है। सितंबर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक को सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग केस में अरेस्ट कर लिया था। रिया को 28 दिन जेल में गुजारने के बाद जमानत मिल गई थी, जबकि शौविक की बेल कई बार खारिज हुई थी। हाल ही में स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने शौविक को बेल दी थी। अदालत ने शौविक पर ड्रग ट्रैफिकिंग के लिए फाइनेंसिंग के आरोपों को खारिज किया है।

अदालत ने शौविक पर सेक्शन 27ए (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकॉट्रोपिक सब्स्टेंसेज एक्ट) के तहत लगे आरोपों को खारिज कर दिया। इस धारा के तहत आरोप साबित होने पर दोषी व्यक्ति को 20 साल तक की जेल हो सकती है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी पर सेक्शन 27ए के तहत केस लगाया गया है, लेकिन उन पर यह चार्ज लागू नहीं होते। यही नहीं अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए ही यह फैसला लिया है।

अदालत ने इस पर विचार किया कि शौविक के ख़िलाफ़ जांच पूरी हो गई थी और एनसीबी ने केवल पांच सह-आरोपियों के बयानों के रूप में साक्ष्य प्रस्तुत किया था, जिसमें रिया और उसका अपना इकबालिया बयान शामिल था। ये बयान इसलिए स्वीकार नहीं किए गए, क्योंकि पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश दिया था, जिसमें कहा गया है कि आरोपियों को सिर्फ़ ऐसे इकबालिया बयानों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

दरअसल रिया चक्रवर्ती की बेल को मंजूर करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आरोपों को खारिज किया था। अदालत ने कहा था कि ड्रग्स रखने का अर्थ यह नहीं है कि उस व्यक्ति ने अवैध ड्रग तस्करी में हिस्सा लिया था या फिर उसके लिए फाइनेंसिंग की थी। इसी को आधार बनाते हुए स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने शौविक को बेल दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने कहा कि आरोप पर सेक्शन 27ए लागू नहीं होता। सुशांत राजपूत केस में सीबीआई, ईडी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जांच में जुटे हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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