Wednesday, December 8, 2021

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हिंदुस्तान के सबसे बड़े बिटक्वाइन घोटाले पर मोदी-शाह चुप क्यों?

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“यह हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिटक्वाइन घोटाला है। इसके तार 14 – 15 मुल्कों से जुड़े हैं। इस मामले में हर चीज पर पर्दा डालने के षड्यंत्रकारी प्रयास किए गए। एनआईए और दूसरी एजेंसियों को अंधेरे में रखा गया। कर्नाटक की भाजपा सरकार इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।’’

उपरोक्त आरोप एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लगाया है।

बिटक्वाइन्स स्कैम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ‘चुप्पी’ पर सवाल खड़ा करते हुये कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।

मामले में गंभीर सवाल खड़ा करते हुये कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और जेपी नड्डा से पूछना चाहते हैं कि बिटक्वाइन घोटाले के पीछे कौन लोग हैं ? इंटरपोल को सूचित क्यों नहीं किया गया ? कर्नाटक की भाजपा सरकार नवंबर, 2020 में कथित हैकर की गिरफ्तारी होने के बाद पांच महीने चुप क्यों रही ? मुख्यमंत्री की भूमिका और जिम्मेदारी क्या है क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम के समय वह राज्य के गृह मंत्री थे ? एनआईए, ईडी और दूसरी एजेंसियों तथा रिजर्व बैंक को सूचित क्यों नहीं किया गया ?’’

सुरजेवाला ने आगे कहा, ‘‘इसकी जांच भाजपा सरकार नहीं कर सकती। यह एक अंतरराष्ट्रीय बिटक्वाइन घोटाला है। इसकी जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी गठित की जाए। इंटरपोटल, दूसरी संबंधित एजेंसियों और रिजर्व बैंक के प्रतिनिधियों को भी इस जांच में शामिल किया जाए।’’

प्रेस कांफ्रेंस में कुछ दस्तावेज़ जारी करते हुए उन्होंने दावा किया कि दो मौकों पर यानि एक दिसंबर, 2020 और 14 अप्रैल, 2021 को बिटक्वाइन ट्रांसफर किए गए। इस अवधि में कथित हैकर श्रीकृष्णा बेंगलुरू पुलिस की हिरासत में था। इस पूरे मामले में कर्नाटक की सत्ता में मौजूद लोगों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी पर सवाल खड़े होते हैं।’’

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के मुताबिक, मुख्यमंत्री बासवराव बोम्मई ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और खुद कहा है कि उन्होंने इस बैठक के दौरान बिटक्वाइन घोटाले पर चर्चा की।

मैं बिटक्वाइन्स बात करना चाहता था लेकिन पीएम मोदी ने बात काट दी

दो दिन पहले दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराव बोम्मई ने कहा था कि – “पीएम मोदी से बिटकॉइन स्कैम को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई। मैं बात करना चाहता था लेकिन पीएम मोदी ने बात काट दी। प्रधानमंत्री ने मुझसे यही कहा कि गंभीरता से काम करिए, सब ठीक हो जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह को इस बारे में ज्यादा जानकारी है।’

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बोम्मई दो दिन के दिल्ली दौरे पर थे और बुधवार शाम उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की थी।

हैकर गिरफ्तार 9 करोड़ की बिटकॉइन ज़ब्त

बता दें कि पुलिस ने बेंगलुरु के एक 26 वर्षीय हैकर श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीक्की के पास से 9 करोड़ की बिटकॉइन जब्त की थी। आरोप है कि इसमें बहुत सारे राजनेता भी शामिल थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक पुलिस श्रीकृष्ण और उनके सहयोगियों पर सख्ती नहीं बरत रही है।

भारत में कई कंप्यूटर हैकिंग अपराधों में शामिल रहे आरोपी श्रीकृष्ण ने बेंगलुरु पुलिस को दिए बयान में दावा किया है कि उसने हांगकांग स्थित क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज बिटफिनेक्स बिटकॉइन की पहली हैकिंग और चोरी की थी। उसने पुलिस को बताया कि वह साल 2015 में जब नीदरलैंड में था उस वक्‍त उसने बिटकॉइन एक्सचेंज में सेंध लगाई थी।

बता दें कि श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीक्की को पुलिस ने नवंबर 2020 में एक ड्रग मामले में गिरफ्तार किया था।

उसने Bitfinex एक्सचेंज को दो बार हैक किया था। पहली हैकिंग साल 2015 और दूसरी हैकिंग का मामला साल 2016 में सामने आया था। इस दौरान हैकर्स ने बिटकॉइन की चोरी भी की थी। साल 2015 में हुई चोरी काफी छोटी थी, जबकि साल 2016 में हैकर्स ने Bitfinex एक्सचेंज में सेंध लगाकर 1,20,000 बिटकॉइन की चोरी की थी, जिसकी कीमत उस समय लगभग $72 मिलियन थी और अब इसकी कीमत लगभग $7 बिलियन है। दूसरी हैकिंग को अब तक की सबसे बड़ी बिटकॉइन डकैती में से एक माना जा रहा है।

बेंगलुरु में कई हैकिंग अपराधों में आरोपित श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीक्की ने साल 2019 में राज्य सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट सेल से 11.5 करोड़ रुपये की चोरी की थी। बेंगलुरु क्राइम ब्रांच पुलिस को दिए अपने बयान में उसने दावा किया है कि वह बिटफिनेक्स को हैक करने वाला पहला व्यक्ति था और वह कई साइबर क्राइम और ड्रग पेडलिंग के आरोपों में शामिल रहा।

उस पर नरमी बरती गई

श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीक्की पहली बार साल 2015 में पुलिस के रडार पर आया था। उसे सबसे पहले साल 2015 में एक बैंक अकाउंट की हैकिंग में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे जल्‍द ही ज़मानत मिल गई थी। इसके बाद मामले की निगरानी न होने के बाद उसका हौसला बढ़ गया और उसने और हैकिंग करना शुरू कर दिया।

इसके बाद श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीक्की को साल 2018 में शांतिनगर के विधायक और कांग्रेस नेता एनए हारिस के बेटे मोहम्‍मद नलपद हारिस से जुड़े एक पब विवाद मामले में नामित किया गया था। श्रीकृष्‍ण पर उस समय हत्‍या का आरोप लगा था, लेकिन वह फरार हो गया था। जबकि इस मामले में सभी आरोपी जेल गए लेकिन श्रीकृष्‍ण को जब तक इस मामले में अग्रिम ज़मानत नहीं मिली, तब तक वह फरार ही रहा। बता दें कि इस पूरी घटना के बाद श्रीकृष्‍ण ने मोबाइल का इस्‍तेमाल नहीं किया, जिसके कारण पुलिस उसे ट्रेस ही नहीं कर सकी।

इसके बाद श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीक्की को नवंबर 2020 में पेंडोरा के नकली साइबर अपराधों का पिटारा खोलते हुए गिरफ्तार किया गया।

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