Saturday, October 16, 2021

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चित्रकूट में यौन शोषण: बच्चियों के बलात्कार का विरोध सरकार का विरोध क्यों है?

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बलात्कार का विरोध करना भी अब सरकार का विरोध करना हो गया है? बलात्कारी का विरोध करना भाजपा का विरोध हो गया है? आखिर क्या वजह है कि चित्रकूट में कोल जनजाति समुदाय की बच्चियों का खनन माफियाओं और ठेकेदारों द्वारा बलात्कार की घटना को डिफेंड करने के लिए भाजपा को अपनी प्रोपोगैंडा सेल (साइबर सेल) लगानी पड़ी है? आखिर चित्रकूट बच्चियों के यौन शोषण मामले में भाजपा आरएसएस ‘सरकार विरोध’ की तर्ज पर क्यों काउंटर अटैक कर रही हैं। जो ‘इंडिया टुडे’, ‘आज तक’ मोदी सरकार की चरण वंदना में लगा हुआ था उसी आज तक, इंडिया टुडे की चित्रकूट में बच्चियों के यौन शोषण की रिपोर्ट सरकार को नागवार गुज़र रही है। 

भाजपा के साइबर सेल सरगना अमित मालवीय सोशल मीडिया पर लगातार ट्वीट करके चित्रकूट वाली ख़बर को झूठा बता रहे हैं। ट्वीट में उन्होंने एक वीडियो भी लगाया है जिसमें बच्चियों से कहलवाया गया है कि हमें नहीं पता कैसे वीडियो बना ली। हमने तो कैमरे में कुछ कही ही नहीं। 

अमित मालवीय ट्विटर पर आरोप लगाते हैं कि – “ ‘आज तक’ की संवाददाता ने अनाज देकर झूठा बयान दिलवाया।” और अपने इस बयान में ही वो अपनी सरकार को नंगा भी कर देते हैं। यानि जनजाति के लोग अनाज के दाने के लिए इस तरह मोहताज हैं कि अनाज देकर उनसे कुछ भी कहलवाया जा सकता है, कुछ भी करवाया जा सकता है।  

अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में राजदीप सरदेसाई के जिस ट्वीट का उल्लेख किया है वो भी देख लीजिए-

उत्तर प्रदेश प्रशासन बच्चियों के यौन शोषण मामले को दबाने में लगा

चित्रकूट बच्चियों के यौन शोषण मसले पर डीएम शेषमणि पांडेय ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, “वीडियो सामने आने के बाद हमने बच्चियों से संपर्क किया है, बच्चियों ने अब यौन उत्पीड़न की घटना से इनकार किया है।” वहीं जब प्रेस कान्फ्रेंस में ‘आज तक’ के पत्रकार ने इस मसले पर सवाल पूछे तो डीएम साहेब आनन-फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म करके चलते बने। 

वहीं अपने ट्विटर हैंडल पर मामले को रफ-दफा करते हुए डीएम चित्रकूट ने मुख्यमंत्री यूपी को टैग करते हुए लिखा, “आज तक की रिपोर्ट के विषय में रात्रि में ही कप्तान साहब के साथ तथा आयुक्त महोदय एवं डीआईजी सर की उपस्थिति में पूरे प्रकरण पर सम्बंधित बच्चियों, उनके परिवार एवं अन्य लोगों से भी वार्ता की गयी, उन सभी लोगों ने ऐसी किसी भी प्रकार की घटना से साफ इंकार किया हैँ, @CMOfficeUP @AwasthiAwanishK ।”

एक दूसरे ट्वीट में इससे एक दिन पहले बच्चियों के यौन शोषण मामले में कार्रवाई होता हुआ दिखाने के लिए डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश देते हुए लिखा था- “ अभी अभी मैंने आज तक चैनल पर प्रसारित विशेष रिपोर्ट को देखा, वर्णित घटना क्रम की गहन जांच करने के लिए मजिस्ट्रेटी जाँच के आदेश कर दिए हैं, इस निंदनीय कृत्य में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी तथा किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा।”

सीओ चित्रकूट रजनीश कुमार यादव ने अपने बयान में कहा, “किसी बच्ची ने इस तरह की शिकायत नहीं की है, ना ही किसी और ने बयान दिया है। जब उनसे लीपापोती पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पुलिस जांच कर रही है, कोई लीपापोती नहीं की जा रही है।”

एएसपी आरएस पांडे का कहना है कि- “ऐसी कोई बात प्रकाश में नहीं आई।”

चित्रकूट के खनन माफियाओं को यौन शोषण के लिए मेकअप और चूड़ी बिंदी वाली लड़कियां चाहिए 

‘आज तक’ न्यूज चैनल की रिपोर्टर मौसमी सिंह ने चित्रकूट के खदानों में काम करने वाली बच्चियों से बात करके यौन शोषण के बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

पीड़ित लड़कियों के बयानों के हम वैसे का वैसा ही रख रहे हैं जैसा कि मौसमी सिंह की रिपोर्ट में दर्ज़ है। 

कर्वी की रहने वाली सौम्या (बदला हुआ नाम) कहती है, -“जाते हैं और काम पता करते हैं तो वो बोलते हैं कि अपना शरीर दो तभी काम पर लगाएंगे, हम मजबूरी में ऐसा करते हैं, फिर भी पैसे नहीं मिलता। मना करते हैं तो बोलते हैं कि काम पर नहीं लगाएंगे। मजबूरन हमें यह सब करना पड़ता है।”

सौम्या (बदला हुआ नाम, निवासी डफई गांव) कहती है, -“नाम नहीं बताएंगे, नाम कह देंगे मर जाएंगे। हमको इसलिए नाम नहीं बताता। धमकी भी देते हैं कि काम करना है तो करो जो इस तरह का काम करोगे तभी लगाएंगे नहीं तो चली जाओ। फिर हम करते हैं….(क्या तीन चार आदमी रहते हैं ?) हां, ऐसा तो होता है पैसे का लालच करा देते हैं ऐसा तो होता है…अगर नहीं जाएंगे तो कहते हैं कि हम तुमको पहाड़ से फेंक देंगे तो हमें जाना पड़ता है।”

सौम्या की मां (घर के भीतर से) कहती हैं,- “बोलते हैं कि काम में लगाएंगे जब अपना शरीर दोगे। मजबूरी है पेट तो चलाना है तो कहती है चलो भाई हम काम करेंगे। 300-400 दिहाड़ी है। कभी 200 कभी 150 देते हैं। घर चलाना है परिवार भूखे ना सोए। पापा का इलाज भी कराना है।”

सौम्या के पिता कहते हैं कि –“अब क्या बताएं गरीबी जैसे हम लोग झेल रहे हैं। छोटे बच्चे हैं कमा के लाते हैं। किसी दिन खाए किसी दिन ऐसे ही सो गए।”

बिंदिया, निवासी कर्वी (चेक कुर्ता में है) कहती है, -“पहाड़ के पीछे बिस्तर लगा है नीचे, लेकर जाते हैं। वहीं यह सब चलता है। नहीं करते तो मारते हैं गाली देते हैं। चिल्लाते हैं, रोते हैं दर्द होता है, क्या करें सह लेते हैं… दुख तो बहुत होता है कि मर जाएं। गांव में ना रहें। अपन पेट रोटी तो चलाएंगे जैसे चलाएं।”

बिंदिया कहती है,-“ अगर मेकअप करके नहीं जाएं तो बोलता है कि पैसा देते हैं तो तुम उसका क्या करती हो। 100 रुपये में क्या होता है। पायल, हाथ के कंगन बाजार में लेते हैं जाकर। जो नहीं लेते हैं तो कहते हैं कि पैसा खा लेती हो।”

बिंदिया कि मां बताती है,- “जब से मजदूरी कर रहे हैं। अभी तक नहीं बताया। 3 महीने काम बंद था। 3 महीने से छटपटा रहे हैं। भाग रहे हैं। कैसे हमारा पेट पले, हमारी औलाद का पेट पले। तो अपना शरीर बिके या हमारी इज्जत जात तो है। बच्चों का पेट पले यह कहां तक चलेगा दीदी बताओ।”

नहीं टूटी राष्ट्रीय महिला एवं बाल कल्याण विभाग की नींद

राष्ट्रीय महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने पूरे मामले पर आँख मूँदी हुई है। वहीं कानपुर शेल्टर होम मामले पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को नोटिस जारी करने वाले उत्तर प्रदेश राज्य महिला कमीशन को सावन में सब कुछ हरा हरा ही हरा दिखने के कारण चित्रकूट में बच्चियों के यौन शोषण का मामला दिखाई नहीं दे रहा है।   

उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता कहते हैं, “चित्रकूट की घटना का उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण ने लिया संज्ञान। तीन सदस्यों की टीम का गठन किया।”

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी मामले पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को टैग करते हुए ट्विटर पर लिखते हैं- “चित्रकूट में बलात्कार और नाबालिग लड़कियों को सेक्स के लिए बेचने की खबर सरासर शर्मनाक है। इस तरह की घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य हैं। मैं सीएम योगी आदित्यनाथ से मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच शुरू करने का आग्रह करता हूं ।”

दिल्ली महिला कमीशन की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल पूरे मामले पर मुख्यमंत्री आदित्यानाथ को टैग करते हुए ट्वीट करती हैं- “उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में 10 से 18 साल की बच्चियों के साथ खदानों में काम के बहाने दरिंदगी की जा रही है। ऐसा कैसे हो सकता है कि इन नन्हीं बच्चियों को इस तरह नोचा जा रहा है और प्रशासन को भनक तक नहीं है? बेहद शर्मनाक! @myogiadityanath जी, तुरंत सख़्त ऐक्शन करवाएँ! ” 

उत्तर प्रदेश में बाबाओं से लेकर भाजपा विधायकों के निशाने पर रही हैं बच्चियाँ

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री चिन्मयानंद के खिलाफ़ साल 2011 में उनकी छात्रा साध्वी ने रेप करने का केस किया था। जिसे सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वापस ले लिया था। लेकिन इसके बाद ही उनका अपने लॉ कॉलेज की एक लड़की से नग्न होकर मालिश करवाने का एक वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तार किया गया। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने न्याय करते हुए आरोपी को अस्पताल और पीड़िता को ब्लैकमेलिंग के आरोप में जेल में डाल दिया था।

भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक लड़की से गैंगरेप मामले में सुप्रीमकोर्ट के दखल के बाद गिरफ्तार किया गया। इस मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने पीड़िता के पूरे परिवार को खत्म कर दिया।

देवरिया बालिकागृह में बच्चियों से यौनशोषण का काफी बड़ा मामला सामने आया था। संस्थान की मान्यता रद्द होने के बावजूद संस्थान एक साल से चल रहा था। इस मामले में भी बड़े राजनीतिक नामों को बचाने की कोशिश में बहुत लीपापोती की गई थी। 

काम के बदले श्रम और देह दोनों देना पड़ता है

सामतंवादी काल में सामंती पुरुषों द्वारा दलित आदिवासी समुदाय की बच्चियों, स्त्रियों का यौन शोषण आम बात थी क्योंकि संसाधन और संस्थाएं सब उन्हीं के लोगों के हाथों में थी। लेकिन आजादी के बाद जब देश में संविधान लागू हुआ तो लगा सब ठीक हो जाएगा। लेकिन पूँजीवादी व्यवस्था में असमान वितरण के चलते गरीब और गरीब होते गए और अमीर और अमीर। नतीजा ये हुआ कि जिनके पास संसाधन या पूँजी कुछ भी नहीं हैं उन्हें अपने जीवन के लिए पूंजी वाले लोगों की हर बात मानने के लिए बाध्य होना पड़ता है। कोरोना काल में लॉकडाउन में जब हर जगह काम बंद है। रोज़ के रोज़ कमाकर खाने वाला मेहनतकश तबका (जिसमें दलित आदिवासी सबसे ज़्यादा आते हैं) दाने-दाने को मोहताज हैं। ऐसे में छोटी छोटी बच्चियों को काम के बदले श्रम और देह दोनों ठेकेदार और खनन माफियाओं को देने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ये किसी एक चित्रकूट की बात नहीं हैं। इस देश में जहां- जहाँ आर्थिक असमानता ज़्यादा है वहां वहां स्त्रियों और बच्चियों को अपनी देह सौंपना पड़ रहा है। 

(सुशील मानव जनचौक के विशेष संवाददाता हैं।)  

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