जमीनों के न्यायपूर्ण वितरण के बगैर नहीं रोके जा सकते हैं इस तरह के संघर्ष: अखिलेंद्र

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अखिलेंद्र प्रताप सिंह और घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मी।

अखिलेंद्र प्रताप सिंह और घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मी।

(स्वराज अभियान के नेता अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने सोनभद्र के उम्भा गांव में हुए आदिवासियों के नरसंहार पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि जमीन का सवाल प्रदेश में सबसे बड़ा सवाल बन गया है और विवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार को इस सवाल को हल ही करना होगा। पेश है उनका पूरा पत्र- जनचौक)

प्रति,
मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।

विषय: जमीन के सवाल को हल करे प्रदेश सरकार 

महोदय,
सोनभद्र के उम्भा गांव में घटी घटना बेहद दर्दनाक है। मारे गए परिवार के लोगों को महज मुआवजा देकर जमीन के सवाल से 
जुड़े हुए सवालों को हल नहीं किया जा सकता। वैसे तो जमींदारी उन्मूलन के इतने बरसों के बाद भी जमीन का सवाल पूरे प्रदेश में अभी बना हुआ है। उम्भा काण्ड बताता है कि ढेर सारे फर्जी ट्रस्ट व अन्य अवैध तरीकों से गरीबों की जमीन, गांव सभा की जमीन को भूमि माफियाओं को दे दिया जाता है।

सरकार को यह देखना होगा कि कैसे प्रशासनिक अधिकारी और भूमाफिया गांव सभा की जमीन को कब्जा कर लेते हैं, ट्रस्ट बना लेते हैं और फिर उस जमीन को ऊंचे दामों पर लोगों को बेंच देते है। भूमि अधिग्रहण के नाम पर एक बार फिर किसानों की भूमि का सवाल बड़ा सवाल बना। पूरे प्रदेश में औद्योगिक विकास के नाम पर सरकार ने किसानों की कृषि योग्य जमीनें अधिगृहित की जिन पर न तो कोई उद्योग लगे उलटे उन पर भूमाफियाओं का कब्जा हो गया।
वनाधिकार कानून ने तो आदिवासियों और वनाश्रितों के भूमि अधिकार के सवाल को सतह पर ला दिया है। पूरे हिंदुस्तान में 
लंबे संघर्ष के बाद वनाधिकार कानून आदिवासियों और वन पर आश्रित लोगों के लिए बना।

उसे ईमानदारी से लागू करने की जगह किसी तरह वनाधिकार कानून से मिलने वाले लाभ से लोगों को वंचित कर दिया जाए इस षड्यंत्र में शासन-प्रशासन लगा रहा, जो बेहद दुखद है। अभी भी माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र जिले में प्रशासन वनाधिकार कानून के तहत पुश्तैनी बसे हुए आदिवासियों और वन को जमीन दिलाने और उसका पट्टा देने की जगह उनको जमीनों से बेदखल कर रहा हैं और जिन जमीनों पर उनका कब्जा था उन्हें इस बार के सीजन में खेतीबाड़ी से भी रोका जा रहा है जबकि उनका दावा अभी निरस्त नहीं हुआ है और कानूनी तौर पर वे उन जमीनों के मालिक हैं। 

महोदय,
मिर्जापुर, सोनभद्र और खासकर चंदौली के चकिया व नौगढ़ क्षेत्र भूमि प्रश्नों पर आंदोलन, हिंसा और दमन के इलाके रहे हैं। 
यहां पर बैराठ फार्म से लेकर ढेर सारी अन्य जगहों पर गैरकानूनी ढंग से जमीनों को हड़पा गया है और अधिकांश जमीनों से आदिवासी, वनवासी, खेत मजदूर या तो बेदखल किए गए या जो कानूनी अधिकार उन्हें जमीनों को हासिल करने के लिए मिले थे, उनको उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। इस पूरे क्षेत्र में जमीन के सवाल को लेकर कई बार हिंसक झड़पें हुई हैं, ढेर सारे लोग मारे गए। 
इसलिए हम आपसे चाहेंगे कि उत्तर प्रदेश सरकार भूमि के प्रश्न पर महत्वपूर्ण निर्णय लें और भूमि के सवाल को जो विकास, 
रोजगार और सामाजिक न्याय दिलाने की कुंजी है उसे हल करें। 

अतः हम आपसे मांग करते हैं कि:-

1. उम्भा कांड की न्यायिक जांच करायी जाए और यह पता किया जाए कि कैसे एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा आर्दश कोआपरेटिव सोसाइटी बनाकर ग्रामसभा की इतनी ज्यादा जमीन हड़प ली और बाद में उसके परिजनों द्वारा उसकी खरीद बिक्री की गयी। खरीद बिक्री की इस पूरी प्रक्रिया में लिप्त प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन्हें दण्डित किया जाए। उम्भा गांव में कोआपरेटिव सोसाइटी की जमीन को सरकार द्वारा अधिगृहीत कर जो ग्रामीण उस पर काबिज हैं उन्हें पट्टा दिया जाए। उम्भा गांव में पीड़ित ग्रामीणों पर लगाए गए गुंडा एक्ट के मुकदमे तत्काल वापस लिए जाए। 


2. प्रदेश सरकार जमीन के सवाल को हल करने के लिए आयोग का गठन करे। आयोग ट्रस्ट या अन्य माध्यमों से गांव सभा या लोगों से छीन ली गई या हड़प ली गई जमीनों को अधिगृहीत करें और ग्राम सभा की फाजिल जमीनों समेत इन जमीनों को गरीबों में वितरित करने के लिए काम करें। औद्योगिक विकास के नाम पर भी जो जमीनें किसानों से ली गईं उन जमीनों को किसानों को वापस कर देना विधि सम्मत होगा।
3. प्रदेश में वनाधिकार कानून को ईमानदारी से लागू किया जाए और इसके तहत प्रस्तुत दावों का विधि सम्मत निस्तारण किया जाए और जो आदिवासी व वनाश्रित पुश्तैनी रूप से वन भूमि पर रहते हैं और खेती किसानी करते हैं, उन्हें तत्काल पट्टा दिया जाए और जब तक उनके दावों का विधिक निस्तारण नहीं हो जाता तब तक उन्हें बेदखल करने से रोके और वन विभाग उनके खेती-बाड़ी के अधिकार में हस्तक्षेप न करें। 
4. भूमि विवादों के तत्काल निस्तारण के लिए रेवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट का उत्तर प्रदेश सरकार गठन करे जो तय समयावधि में इसका निस्तारण करे।
मैं उम्मीद करता हूं उत्तर प्रदेश में सोनभद्र गांव की हृदय विदारक घटना अन्य जिलों और गांवों में न घटित हो इसलिए उत्तर 
प्रदेश की सरकार इस दिशा में पहल करेगी और भूमि सुधार को लागू किया जाएगा। 
सधन्यवाद!

(अखिलेन्द्र प्रताप सिंह)
राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य
स्वराज अभियान।

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