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करनाल गैंगरेप: महिला आयोग की सदस्य ने किया दौरा, कहा- पद पर रहते तहसीलदार कर सकता है साक्ष्यों से छेड़छाड़

करनाल। हरियाणा राज्य का महिला आयोग मानता है कि करनाल प्रताप पब्लिक स्कूल गैंगरेप के आरोपी तहसीलदार के पद पर बने रहने से केस के एविडेंस नष्ट किए जाने का ख़तरा है। दूसरी तरफ़ खट्टर सरकार अपने तहसीलदार को ऐसा करने का भरपूर मौक़ा मुहैया करा चुकी है। राज्य महिला आयोग की सदस्य नम्रता गौड़ ने कहा कि प्रताप पब्लिक स्कूल केस में कार्रवाई न होने के कारण ही जिले में एक और गैंगरेप की वारदात हुई। जनवादी महिला समिति ने तहसीलदार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा है कि ऐसा किए बिना इस केस में निष्पक्ष जाँच की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

गौरतलब है कि शहर के एक नामी प्राइवेट स्कूल प्रताप पब्लिक स्कूल की कर्मचारी ने स्कूल मालिक अजय भाटिया और करनाल के तहसीलदार राज़बख्श के ख़िलाफ़ 6 जुलाई को गैंगरेप का केस दर्ज़ कराया था। आरोप है कि इस महिला को काम के बहाने बुलाकर भाटिया ने रेप किया और फिर उस पर तहसीलदार के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव बनाता रहा। आरोप है कि बाद में भाटिया की मदद से तहसीलदार ने भी इस महिला से रेप किया। इस केस में स्कूल की प्रिंसिपल भी नामजद की गई है। शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ भी ब्लैकमेल करने का केस दर्ज है। पुलिस ने दो एसआईटी गठित कर जाँच के नाम पर इतने गंभीर केस को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। आरोप है शिकायतकर्ता महिला का मनोबल तोड़ने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के विधानसभा क्षेत्र के शहर के इस केस में प्रशासन का रवैया सरकार की मंशा को भी संदिग्ध बना रहा है। इस बीच करनाल जिले के तरावड़ी इलाके की एक राइस मिल में नौकरी का झांसा देकर एक लड़की के साथ आठ लोगों द्वारा रेप किए जाने की वारदात भी सुर्खियों में है। गुरुवार को करनाल पहुँचीं राज्य महिला आयोग की सदस्य नम्रता गौड़ ने कहा कि प्रताप स्कूल केस में जल्द कार्रवाई होती तो शायद गैंगरेप की तरावड़ी जैसी वारदात न होती। एक स्थानीय चैनल से बात करते हुए महिला आयोग की सदस्य ने कहा कि प्रताप स्कूल केस में कार्रवाई न होने से और लोगों को हौसला मिला कि उनका भी कुछ नहीं बिगड़ेगा।

नम्रता गौड़ ने कहा कि जाँच की बात समझ में आती है पर दुखद है कि इतने दिनों बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। जाँच के नाम पर बहुत अधिक समय लग गया है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि पुलिस को पुख्ता सबूत मिल चुके हैं। लेकिन, यह भी दोहराया कि इस केस में अब तक का रवैया ढुलमुल है। तहसीलदार को सस्पेंड नहीं किया गया है। वह कुर्सी पर है तो एविडेंस के साथ छेड़छाड़ कर सकता है, उन्हें हटाकर खुद को निर्दोष साबित कर सकता है।

महिला आयोग के इस नजरिए के बावजूद लग नहीं रहा है कि सरकार इतनी बदनामी के बावजूद तहसीलदार को पद से हटाने की सोच रही है। एविडेंस हटाने की आशंका की महिला आयोग की बात करें तो आरोपी को पर्याप्त मौक़ा मिल ही चुका है।

जनवादी महिला समिति ने भी तहसीलदार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए बयान जारी किया है। जनवादी महिला समिति की जिला सचिव जरसो देवी द्वारा जारी किया गया बयान –

“करनाल, शहर के नामी-गिरामी स्कूल में कार्यरत एक महिला स्टाफ के साथ स्कूल मालिक व तहसीलदार द्वारा सामूहिक बलात्कार के मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जांच होने तक तहसीलदार को पद से बर्खास्त किया जाए। ‌

उक्त मांग जनवादी महिला समिति की जिला सचिव जरासो व अध्यक्ष तोशी देवी ने उठाई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह नगर करनाल में यह बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। करनाल शहर के नामी-गिरामी स्कूल के मालिक अजय भाटिया व तहसीलदार राज़बख़्श पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगा है। इस महिला का आरोप है कि स्कूल की एक उच्च अधिकारी ने भी उसकी मदद करने के बजाय स्कूल मालिक को ख़ुश करने के लिए ही कहा। महिला द्वारा 6 जुलाई को एफआईआर दर्ज करवाई गई है। शिकायतकर्ता महिला ने एफआईआर में लिखवाया है कि स्कूल मालिक उससे कहता था कि उसकी ऊपर तक पहुंच है तथा वह अधिकारियों को भी लड़कियां सप्लाई करता है। शिकायतकर्ता महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस भी मामले को रफा-दफा करने के लिए उस पर दबाव डाल रही है। इस मामले में दो एसआईटी गठित की हुई है लेकिन अभी तक संतोषजनक कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

जनवादी महिला समिति के नेताओं ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष ढंग से उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए। जिले का एक प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर मामले में आरोपी है। हैरानी की बात यह है कि एफआईआर दर्ज हुए 10 दिन बीत जाने के बावजूद भी आरोपी तहसीलदार राज़बख़्श को बर्खास्त करना तो दूर जिले से ट्रांसफर तक नहीं किया गया है। संगठन का मानना है यदि आरोपी प्रभावशाली पद पर है तो वह जांच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए आरोपी को बर्खास्त करना या कम से कम तबादला करना कार्रवाई की निष्पक्षता के लिए ज़रूरी है ताकि शिकायतकर्ता महिला को विश्वास हो सके कि वह जांच को प्रभावित नहीं कर सकेगा। इसलिए संगठन यह मांग करता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तहसीलदार को बर्खास्त किया जाए।’

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on July 28, 2020 9:48 pm

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