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दंगाइयों को बचाने की अपनी परिपाटी का ही निर्वहन कर रहे हैं योगी: शाहनवाज़ आलम

लखनऊ। अल्पसंख्यक कांग्रेस ने योगी सरकार द्वारा मुज़फ्फरनगर दंगों के आरोपी 3 भाजपा विधायकों पर से मुकदमा हटाने की अर्जी दाखिल करने को योगी सरकार के अपराधियों को बचाने की पुरानी परिपाटी के अनुरूप बताया है।

कांग्रेस मुख्यालय से जारी बयान में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने कहा कि जब योगी मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहले अपने ख़िलाफ़ दंगा, लूट, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी जैसी गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमे हटा लेते हैं तो उनकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वो दंगों के अन्य भाजपाई आरोपियों पर से भी मुकदमें हटा लें। इसी नैतिक ज़िम्मेदारी के तहत सरकार ने मंत्री सुरेश राणा, विधायक संगीत सोम और कपिल देव के खिलाफ दर्ज मुकदमों को हटाने की अर्जी मुज़फ्फरनगर ज़िला अदालत में दाखिल किया है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि सीएम योगी ऐसी हरकतों से लगातार संदेश दे रहे हैं कि उनका मकसद क़ानून का मज़ाक उड़ाना है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि मुज़फ्फरनगर साम्प्रदायिक हिंसा में मारे गए लोगों के प्रति यह घोर अन्याय है जिसमें सपा की पूर्वर्ती अखिलेश सरकार भी बराबर की सहभागी है। जिसके प्रमुख नेताओं ने दंगों में मारे गए लोगों को न्याय दिलवाने के बजाए उस समय सैफई में फ़िल्मी नायिकाओं के डांस का आयोजन कर के उनके जले पर नमक छिड़कने का काम किया था।

भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने भी तीनों विधायकों से मुकदमा हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू करने का कड़ा विरोध किया है।  माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि योगी सरकार की यह कार्रवाई न्याय व्यवस्था का मखौल उड़ाने वाली, अपराध को संरक्षण देने वाली, भेदभाव पूर्ण, साम्प्रदायिक और दोहरे मापदंड की द्योतक है। उन्होंने कहा कि डा. कफील खान मामले में अलीगढ़ विवि में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाकर उन पर योगी सरकार द्वारा अवैध रूप से रासुका तक लगा दिया गया। यह अलग बात है कि तथाकथित भड़काऊ भाषण से इंसान तो क्या एक मच्छर तक के मरने की खबर नहीं मिली थी।

लेकिन भाजपा के मौजूदा तीन विधायकों – संगीत सोम, सुरेश राणा व कपिल देव – के खिलाफ तो एसआईटी ने चार्जशीट तक दाखिल कर दी है और इनके भड़काऊ भाषणों के बाद भड़के मुजफ्फरनगर दंगे में 65 लोगों की मौत हुई थी और चालीस हजार लोगों को पलायन करना पड़ा था। ऐसे में इन आरोपियों पर से मुकदमे हटाने की कार्रवाई शुरू करना अपने आप में अपराध और मृतकों व पीड़ितों के प्रति घोर अन्याय है। उन्होंने कहा कि एसआईटी ने अपनी जांच में भाजपा विधायकों को दोषी पाया था। अब सरकार को खुद ही जज बनने और उक्त आपराधिक मुकदमे की वापसी की अर्जी लगाने के बजाय न्याय करने की जिम्मेदारी न्यायालय पर छोड़ देनी चाहिए।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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This post was last modified on December 24, 2020 7:22 pm

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