‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-1: ये है मेरी यातना और मेरी अपार ख़ुशी

(अरुंधति रॉय के लेखन की सबसे बड़ी ख़ूबियां उसकी सच्चाई और उसकी मौलिकता हैं। ये खूबियां उन्हें अपने जीवन के खुरदुरे, रूखे, तकलीफ़ों और फटकार और गालियों और अंधड़ों से ‘भरे-पूरे’ अनुभवों से हासिल हुई हैं। उनके सधे और ताप से निखरे लेखन का नतीजा है कि उनका पहला संस्मरण हमें उनके औपन्यासिक रोमांचों की … Continue reading ‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-1: ये है मेरी यातना और मेरी अपार ख़ुशी