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Categories: बीच बहस

विशेष रिपोर्ट: पांच महीने में देश के एक फीसदी लोगों का भी नहीं हो पाया कोविड 19 टेस्ट

भारतीय रिसर्च और मेडिकल काउंसिल के वेबसाइट पर उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक 22 जून 2020 तक कुल 71,37,716 सैंपल की जांच हुई है। साथ ही वेबसाइट पर ये भी दावा किया गया है कि इसमें से केवल 22 जून को 1,87,223 सैंपल की जांच हुई है।

जनसंख्या घड़ी के मुताबिक 23 जून 2020 की सुबह 8-10 मिनट तक भारत की कुल आबादी 1,379,775,220 है। अब यदि हम अब तक कुल किए गए कोविड-19 टेस्ट सैंपल का प्रतिशत निकालें तो ये .5173% है। यानि मोदी सरकार और तमाम राज्य सरकारों ने मिलकर पूरे पांच महीने में अब तक देश के एक प्रतिशत से भी कम आबादी के कोविड-19 टेस्ट कर सके हैं।

5 जून को बोलते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया था कि अमेरिका में कोविड-19 के मामले इसलिए ज़्यादा दिख रहे हैं क्योंकि यहां टेस्ट ज़्यादा हुए हैं जबकि भारत में अगर टेस्ट ज़्यादा हों तो वहां अमेरिका से ज़्यादा कोरोना मरीज सामने आएंगे। इस तरह की बातें तमाम और भी संस्थाएं बोलती रही हैं।

बता दें कि भारत में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को सामने आया। तब से अब तक पांच महीने बीत चुके हैं। पांच महीने के लंबे समय में सरकार देश के 1 प्रतिशत आबादी की भी जांच नहीं कर पाई है ये बेहद शर्मनाक बात है।

भारत में कुल कोविड- 9 टेस्टिंग लैब और कोविड-19 के जांच के विभिन्न तरीके इंडियन रिसर्च & मेडिकल काउंसिल की वेबसाइट पर दिए आँकड़ों के मुताबिक 23 जून की मौजूदा तारीख में देश में 730 सरकारी और 270 प्राइवेट लैबों कोविड-19 की जांच हो रही हैं। इनमें RT-PCR, True Nat, CB Nat टेस्टिंग सब शामिल है।

RT-PCR के कुल 557 (359 सरकारी और 198 प्राइवेट) लैब हैं।

True Nat Test – 363 ( 343 सरकारी और 20 प्राइवेट) लैब हैं।

CB Naat Test – 80 (28 सरकारी और 52 प्राइवेट) लैब हैं।

‘ट्रू नेट’ और ‘सीबी नैट’ क्या है

ट्रू नेट मशीन का इस्तेमाल दरअसल टीबी (ड्रग रजिस्टेंट ट्युबरोकुलोसिस) की जांच के लिए होता है। इसे टीबी मशीन भी कहते हैं। 4 अप्रैल को भारतीय रिसर्च और मेडिकिल काउंसिल ने टीबी मशीन की इस्तेमाल कोविड-19 की जांच के लिए करने की इज़ाज़त दी। ट्रू नेट मशीन से एक घंटे में रिपोर्ट आ जाती है। ट्रू नेट मशीन से एक टेस्ट की लागत 1000 से 1500 रुपए आती है।

जबकि 20 अप्रैल को आईसीएमआर ने कोविड-19 टेस्ट के लिए सीबी नैट (कैट्रिज बेस्ड न्युक्लिक एसिड एंप्लीफिकेशन टेस्ट) के इस्तेमाल की भी मंजूरी दे दी। सीबी नैट टेस्ट का इस्तेमाल भी टीबी की जांच के लिए किया जाता है। बताया जाता है कि कोविड-19 टेस्ट के लिए कार्ट्रिज के सॉफ्टवेयर को मॉडीफाई किया गया है। इससे कोविड-19 सैंपल की जांच सिर्फ़ 45 मिनट में हो जाती है। बताया जाता है कि CBNAAT से ‘E’ और ‘N2’ जींस की पहचान आसानी से हो जाती है। ‘E’  जीन आरएनए वायरस वाले कोरोना वायरस समूह का जीन है जबकि ‘N2’ जीन विशेष रूप से सार्स-कोव-2 का जीन है जिसके चलते कोविड-19 होता है। इसे जीन एक्सपर्ट टेस्ट भी कहते हैं।

झारखंड के साहिबगंज में 29 मई को 5 लोगों की ट्रू नेट मशीन से कोरोना टेस्ट किया गया। टेस्ट में झारखंड के साहिबगंज में पांच लोग ट्रू नेट टेस्ट में पोजिटिव पाए गए थे। बाद में धनबाद के लैब में हुए आरटी पीसीआर टेस्ट में पांचों लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई।

इसके अलावा ELISA (enzyme-linked-immune-sorbent-assay) और रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

तेजी से बढ़ रही है संक्रमितों की संख्या, हालात संभालने में फेल हो रही सरकार

कम जांच के बावजूद भारत में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ते हुए आज सुबह तक 4,56,115 हो गई है। अब एक दिन में यानि 14 घंटों में कोविड-19 के मरीजों की संख्या में सीधे 15 हजार का इजाफा हो जा रहा है।

सवाल उठता है कि 5 महीने के समयांतराल में भारत सरकार ने कोविड-19 से निपटने के लिए क्या नए मेडिकल स्ट्रक्चर खड़े किए हैं? और जवाब है, कुछ भी नहीं। अब हालत ये हो गई है कि कोविड-19 के गंभीर मरीजों को भी अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में अवर सचिव रीता मल के मामले में हम देख ही चुके हैं कैसे कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि होने के बाद भी अस्पताल मरीजों को एहतियात बरतने की सलाह देकर घर भेज दे रहे हैं। तमाम राज्यों में क्वारंटाइन सेंटर तक बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य दूसरे राज्यों को कोविड-19 संक्रमितों का अपने राज्य के अस्पतालों में इलाज देने से इन्कार कर रहे हैं।

कोविड-19 से होने वाली मौतों का आँकड़ा भी बढ़ रहा

जैसे-जैसे संक्रमितों की संख्या मौजूदा संसाधनों के पार जा रही है वैसे-वैसे कोविड-19 से होने वाली मौतों की भी संख्या बढ़ रही है। 

देश में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 14,483 के पार हो चुकी है। अब प्रतिदिन कोविड-19 से मरने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। 12 जून को 396, 18 जून को 334 लोग, 19 जून को 336 लोग, 20 जून को 375 लोग, 21 जून को 306 लोग, 22 जून को 445 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है।

मौत के आँकड़े छुपा रही सरकारें

मौत के आँकड़े छुपाने की एक लंबी परंपरा रही है। फिर वो किसानों की आत्महत्या के आंकड़े हों या कुपोषण और भुखमरी से होने वाली मौतों के आँकड़े।

कोविड-19 से होने वाली मौतों के छुपाने के आरोप तमाम राज्य सरकारों पर लग रहे हैं। जिन-जिन राज्यों में म्युनिसिपल कार्पोरेशन भाजपा के पास है और राज्य में सरकार किसी दूसरी पार्टी की है वहां कोविड-19 से होने वाली मौत के आंकड़ों में भारी झोल दिख रहा है।

महाराष्ट्र में 24 मई से 15 जून तक 2551 लोगों की मौत हुई जिसमें से 1509 लोगों की मौत की जानकारी देरी से दी गई। राज्य सरकार द्वारा अपने अधिकारियों से मौत का आंकड़ा ठीक करने का आदेश दिए जाने के बाद ये सवाल और गहरा गया है।

महाराष्ट्र में बीएमसी पर भाजपा का कब्जा है जबकि राज्य में कांग्रेस, एनसीपी समर्थित शिव सेना सत्ता में है। यहां  मौत के आँकड़ों में फर्जीवाड़े का मामला समाने आया है। बताया जा रहा है कि बीएमसी ने कम से कम 451 कोविड-19 मरीजों के मौत के आँकड़े नहीं दिए। राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर डेटा मिलान में ये सामने आया है। इनमें नाम का दोहराव और आत्महत्या या दुर्घटना से हुई मौतों को भी कोविड-19 मौतों में जोड़ने का आरोप बीएमसी पर लगाया गया था। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर 950 मौतों को दबाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा 500 मौतों का डेथ कमेटी द्वारा रिपोर्ट न किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

वहीं राजधानी दिल्ली में भी भाजपा के कब्जे वाले दिल्ली नगर निगम आम आदमी पार्टी वाली केजरीवाल सरकार पर कोविड-19 से होने वाली मौत के आँकड़े पर सवाल उठा रही है।

अब बात करें देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की तो यहां मौत के आंकड़े छुपाने के आरोप लगाने वाले ट्वीट पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ़ आगरा के जिलाधिकारी की ओर से नोटिस भेजा गया है। बता दें कि प्रियंका गांधी ने अपने ट्वीट में पिछले 48 घंटे में आगरा में कोविड-19 से होने वाली 28 मौतों पर सवाल उठाया था।

इससे पहले 17 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लेटर जारी करके कोविड-19 से होने वाले मौत के आंकड़ों पर रोष व्यक्त करते हुए आंकड़ों को दुरुस्त करके पेश करने का आदेश दिया था। 22 जून को एक बार फिर मुख्यमंत्री ने मरीजों की मौत की सही फीडिंग न होने पर नाराज़गी जाहिर करते हुए हिदायत दिया कि ऑनलाइन पोर्टल में सही जानकारी फीड नहीं करने पर मेडिकल कॉलेज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और अन्य लोग जिम्मेदार होंगे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)  

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This post was last modified on June 24, 2020 7:39 pm

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