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स्वामी अग्निवेश के निधन पर पुलिस शपथ का अपमान है नागेश्वर राव का ट्वीट

कल स्‍वामी अग्निवेश का दुःखद निधन हुआ। लोगों ने स्वामी अग्निवेश के निधन पर अपनी शोक संवेदना प्रगट की, पर सीबीआई के पूर्व प्रमुख का एक बेहद निंदनीय ट्वीट आया, ‘अच्‍छा है छुटकारा मिला’। यह संवेदना की अभिव्यक्ति है या घृणा की, यह आप खुद ही पढ़ें और तय करें। एम नागेश्‍वर राव ने ट्विटर पर स्‍वामी अग्विनेश के निधन पर एक पोस्‍ट लिखी,  ‘बढ़िया है छुटकारा मिला। स्वामी अग्निवेश, आप भगवा पोशाक में हिंदू विरोधी थे। आपने हिंदूवाद का बड़ा नुकसान किया है। मुझे शर्म आती है कि आप तेलुगु ब्राह्मण के रूप में पैदा हुए थे।’ उन्होंने संस्कृत में लिखा, ‘गोमुख व्याग्रं.’ आगे उन्‍होंने लिखा, ‘हिरण की खाल में भेड़िया। यमराज से मुझे शिकायत है कि उन्होंने इतना लंबा इंतजार क्यों किया!’ नागेश्वर राव को यमराज से शिकायत है कि वे देर से आये और अग्निवेश को ले गए।

इस टिप्‍पणी पर अब विवाद खड़ा हो गया है। इस ट्वीट को लोग जमकर ट्रोल कर रहे हैं। कई जाने माने लोगों के साथ ही आम यूजर्स ने भी नागेश्‍वर राव की पोस्‍ट को लेकर निशाने पर लिया। इस पर इतिहासकार एस. इरफान हबीब ने लिखा,

” तुम एक धब्‍बा हो। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपने पुलिस अधिकारी रहते हुए क्‍या किया होगा?”

आम नागरिकों और पुलिस को एक मंच पर लाने की दिशा में काम करने वाले इंडियन पुलिस एसोसिएशन ने राव के पोस्‍ट पर लिखा, ” खुद को आईपीएस अधिकारी के तौर पर पेश करने वाले एक रिटायर्ड अधिकारी की तरफ से ऐसा नफ़रती पोस्‍ट ट्वीट किया गया। उन्‍होंने पुलिस की वर्दी को नीचा दिखाया है और सरकार को भी शर्मसार किया है। उन्‍होंने देश के समूचे पुलिस बल को शर्मिंदा किया है। विशेषकर युवा अधिकारियों को।”

सामाजिक कार्यकर्ता और आर्य समाज के जाने-माने नेता स्वामी अग्निवेश का 80 साल की उम्र में 11 सितंबर की शाम को निधन हो गया। अभी कुछ दिन पहले ही स्वामी अग्निवेश को नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलरी साइंसेज/आईएलबीएस में भर्ती कराया गया था। लिवर सिरोसिस और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण उन्‍हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। अस्पताल के एक प्रवक्ता ने कहा था, ‘वह लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे और उनकी हालत बिगड़ गयी थी। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था तथा शाम छह बजे हृदयाघात आने के बाद उनका निधन हो गया।’

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के बैनर तले, स्वामी अग्निवेश ने, बंधुआ मज़दूरों की मुक्ति के लिए, एक बेहद सफल अभियान 1981 में चलाया था। हालांकि बंधुआ मजदूरी अधिनियम, ( बोंडेड लेबर एक्ट ) का कानून, संसद ने, 1976 में पारित कर दिया था पर उस कानून में कई कमियां थीं। बंधुआ मुक्ति मोर्चा के ही प्रयासों से, 1986 में बाल श्रम निवारण अधिनियम बना। इस कानून की राह, बंधुआ मुक्ति मोर्चा की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1984 में दिए गए निर्णय पर प्रशस्त हुई। इसके अतिरिक्त वे मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिये होने वाले आंदोलनों में भी सदैव आगे रहते थे।

नागेश्वर राव सर, स्वामी अग्निवेश की मृत्यु पर आप का ट्वीट न केवल शर्मनाक है बल्कि वह एक पुलिस जन द्वारा लिए गए शपथ का अपमान है। नागेश्वर राव, उड़ीसा कैडर के आईपीएस हैं और जब, सीबीआई में निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना, जो अब सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ और एनसीबी, (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) के भी निदेशक हैं, के बीच विवाद हुआ था और जब सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद दोनों ही अफसर सीबीआई से हटा दिए गए थे तो, सीबीआई का कार्यभार नागेश्वर राव को ही सौंपा गया था। नागेश्वर राव उस समय सीबीआई के अपर निदेशक थे।

यह किस्सा अक्टूबर 2018 का है। हुआ यूं था कि राकेश अस्थाना के खिलाफ सीबीआई में एक जांच चल रही थी और उस जांच में उनके फंसने की संभावना थी। उन्होंने तत्कालीन सीबीआई प्रमुख, आलोक वर्मा के खिलाफ भी एक लंबी चौड़ी शिकायत गृह विभाग से की। आलोक वर्मा यूटी कैडर के आईपीएस थे, और राकेश अस्थाना गुजरात कैडर के। गुजरात कैडर के होने के कारण उनकी निकटता प्रधानमंत्री से स्वाभाविक रूप से थी। ऐसा होना असामान्य भी नहीं है। सीबीआई में लंबी तनातनी चलने लगी। राकेश अस्थाना को इसी वादे पर सीबीआई लाया गया था, कि जब आलोक वर्मा रिटायर हो जाएंगे तो, राकेश अस्थाना को सीबीआई का प्रमुख बना दिया जाएगा। सभी सरकारें महत्वपूर्ण पदों पर अपने भरोसे के अधिकारी की नियुक्ति करती ही हैं। यह भी एक सामान्य सी बात है।

इसी बीच, राफेल सौदे को लेकर एक प्रथम सूचना, एफआईआर दर्ज कराने के लिए पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट प्रशांत भूषण सीबीआई प्रमुख से उनके दफ्तर में मिले। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों व्यक्तियों की राफेल के ही संदर्भ में दायर याचिका खारिज कर दिया था, पर इससे राफेल सौदे की सीबीआई द्वारा जांच करने पर कोई कानूनी बाधा नहीं थी। आलोक वर्मा से इन लोगों की मुलाकात सीबीआई दफ्तर में हुई और आलोक वर्मा ने उनके प्रार्थना पत्र को रख लिया लेकिन तब कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं की गयी।

सरकार, आलोक वर्मा के इस कदम से नाराज़ हो गयी और गृह विभाग ने इस नाराज़गी को सीबीआई प्रमुख को जता भी दिया कि उन्हें यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण से इस संदर्भ में कोई मुलाक़ात नहीं करनी चाहिये थी। देर रात तक सरकार ने आलोक वर्मा का तबादला फायर सर्विस के डीजी के पद पर कर दिया लेकिन दूसरे दिन आलोक वर्मा ने अपने तबादले के बारे में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने तबादला आदेश पर स्थगनादेश तो दिया पर उनके काम करने और ऑफिस जाने पर रोक लगा दी।

सीबीआई प्रमुख या निदेशक की नियुक्ति एक पैनल करता है जिसमें प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सीजेआई या उनके कोई प्रतिनिधि रहते हैं। यह पद दो साल के लिये निर्धारित होता है। आलोक वर्मा का दो साल पूरा नहीं हुआ था और तबादले का आदेश भी बिना निर्धारित पैनल के अनुमोदन के हुआ था अतः इस पर आलोक वर्मा की याचिका आधारित थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस एके पटनायक को, राकेश अस्थाना के उस प्रार्थना पत्र की जांच सौंपी जिसमें उन्होंने आलोक वर्मा के खिलाफ कुछ आरोप लगाए थे। जांच से उन आरोपों की पुष्टि नहीं हुयी। फिर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैनल की बैठक पुनः बुला कर सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति की जाए। अब जब यह पैनल दुबारा बैठा तो सीबीआई प्रमुख के रूप में नए डीजी की नियुक्ति हुयी।

सीबीआई में शीर्ष अधिकारियों के बीच जारी जंग के बीच केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज कर आलोक वर्मा की जगह एम नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर का कार्यभार सौंपा गया। तेज तर्रार अफसरों में गिने जाने वाले राव तेलंगाना के वारंगल जिले के रहने वाले हैं।  राव लंबे समय से सीबीआई से जुड़े रहे हैं। सीबीआई हेडक्ववॉर्टर में आने से पहले राव चेन्नई में सीबीआई के साउथ जोन में बतौर जॉइंट डायरेक्टर रहे। सीबीआई मुख्यालय में आने के बाद राव पर ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों की जिम्मेदारी रही है।

सीबीआई के अंतरिम चीफ नागेश्वर राव के खिलाफ कई गंभीर आरोप भी लग चुके हैं। यह पता लगा है कि कि तत्कालीन सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने यह अनुशंसा की थी कि उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए, लेकिन तब के सीवीसी ने इसे निरस्त कर दिया। न ही उन्हें सीबीआई से हटाया गया और न ही जांच की गई। उन्हें फिर अंतरिम डायरेक्टर बना दिया गया। बाद में वे सीबीआई से हट कर फायर सर्विस के महानिदेशक बने। अब वे अवकाश ग्रहण कर चुके हैं।

नागेश्वर राव के साथ कुछ दिन बिताने का मुझे भी अवसर मिला है। 2007 में मैं जब एसपी रेलवे गोरखपुर था तो सरदार बल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी हैदराबाद में एक रिफ्रेशर कोर्स में भाग लेने गया था। उसी कोर्स में नागेश्वर राव जी भी आये थे। उनका और मेरा कमरा अगल बगल था तो मुलाक़ात रोज ही होती थी। वे भले और अच्छे अफसर माने जाते थे। पर उनका यह ट्वीट मुझे स्तब्ध कर गया। नागेश्वर राव एक पढ़े लिखे और आधुनिक सोच के व्यक्ति हैं और वे कैसे किसी की मृत्यु पर ऐसी दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक टिप्पणी कर सकते हैं ? यह टिप्पणी तो सनातन धर्म की उदात्त परंपरा के बिल्कुल प्रतिकूल है। फिर आर्य समाज तो हिन्दू धर्म की ही एक शाखा है जिसका मूल आधार ही वेदों की ओर लौटना रहा है।

हो सकता है स्वामी अग्निवेश की राजनीतिक विचारधारा और नागरिक अधिकारों के प्रति उनकी सक्रियता नागेश्वर राव को अच्छी न लगी हो, पर किसी भी प्रकार की ऐसी टिप्पणी, वह भी एक ऐसे आईपीएस अधिकारी द्वारा जो सरकार में सर्वोच्च पद पर नियुक्त रहा हो, बेहद निंदनीय और शर्मनाक है।

उनका यह ट्वीट, हम पुलिस अफसरों को जो एक कांस्टेबल से लेकर आईपीएस प्रशिक्षु तक, एक शपथ दिलाई जाती है, की न केवल मूल भावना के विपरीत है, बल्कि वह उसका उल्लंघन है। न केवल यह पुलिस शपथ का उल्लंघन है, बल्कि हर गणतंत्र दिवस पर हर नागरिक द्वारा ली जाने वाली शपथ का भी उल्लंघन और अपमान है।

सरकार और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में खड़े दिखने के लिये यह ट्वीट किया गया है या यह नागेश्वर राव की अंतरात्मा का उद्गार यह तो राव ही बता सकते हैं। स्वामी अग्निवेश सरकार के खिलाफ रहते थे। न केवल वे वर्तमान भाजपा सरकार के खिलाफ रहे हैं, बल्कि वे 2013 में, यूपीए सरकार के खिलाफ हुए अन्ना आंदोलन में भी शरीक थे। कांग्रेस के खिलाफ तो वे बंधुआ मुक्ति मोर्चा के आंदोलन के समय से ही थे।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज के बीच उन्होंने उनके हितों के लिये काफी काम किया है। वे हर उस जन आंदोलन में शरीक रहे हैं जो जनता के शोषण और उत्पीड़न तथा देश के संवैधानिक मूल्यों के विपरीत खड़ा हुआ था। नागेश्वर राव का यह ट्वीट, धर्म और समाज के साथ-साथ भारत की अवधारणा का भी अपमान है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

(विजय शंकर सिंह रिटायर्ड आईपीएस अफसर हैं। आप आजकल कानपुर में रहते हैं।)

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This post was last modified on September 13, 2020 8:06 am

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