Tuesday, December 7, 2021

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर यूपी मांगे रोजगार अभियान के तहत रोजगार अधिकार सम्मेलन संपन्न!

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश छात्र युवा रोजगार अधिकार मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे यूपी मांगे रोजगार अभियान के तहत आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर रोजगार अधिकार सम्मेलन हुआ। उत्तर प्रदेश की वर्तमान योगी सरकार ने 4 लाख नौकरियां देने का ढिंढोरा दिल्ली तक पीट चुकी है जबकि हकीकत यह है कि 70 लाख रोज़गार देने के वादे के साथ सत्ता में आई भाजपा सरकार का रिकॉर्ड रोज़गार देने के मामले में बेहद खराब रहा है।

अनेक भर्तियों में धांधली, सामाजिक न्याय की हत्या, भ्र्ष्टाचार, लीक आदि बातें देखने में आई हैं। 69000 शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला इस बात का जीता जागता उदाहरण है। एक ओर तो निजीकरण की आंधी में सामाजिक न्याय का सवाल ही खत्म करने की साजिश चल रही है वहीं दूसरी ओर बची-खुची सरकारी नौकरियों में भी इस तरह की धांधली योगी सरकार की सामाजिक न्याय को खत्म करने की आतुरता का पर्दाफाश करती है। उक्त बातें आइसा के कार्यकारी राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने रोजगार अधिकार सम्मेलन में कहीं।

उन्होंने आगे कहा कि, “उत्तर प्रदेश में चल रहे रोज़गार आंदोलन पर योगी सरकार लगातार दमन कर रही है। वह सोच रही है कि लाठी, दमन से यह बात दब जाएगी लेकिन रोज़गार की लड़ाई यूपी में और अधिक मजबूत होती जा रही है। पूरे देश के बेरोजगार युवाओं की 10% आबादी यूपी में रहती है। कोरोनाकाल के दौरान लॉक डाउन में लाखों नौकरियाँ खत्म हुईं जिसका एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से था लेकिन इसपर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।”

समाजवादी छात्र सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा यादव ने कहा कि रोज़गार देने की बात तो छोड़िए, खाली पदों को भरना भी दूर की बात है, लेकिन इस सरकार में तो नौकरियों को व्यवस्थित रूप से खत्म किया जा रहा है। इसके ख़िलाफ़ युवाओं द्वारा छेड़ी गयी यह लड़ाई सरकार के होश उड़ा देगी। उन्होंने रोजगार ना दे पाने की स्थिति में ₹10000 बेरोजगारी भत्ता देने की लड़ाई को महत्वपूर्ण मानते हुए आंदोलन को व्यापक और मजबूत करने में पूरी भूमिका निभाने की बात कही एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष व इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कियुवा शक्ति अपने रोज़गार के लिए आज लड़ रही है.यह लड़ाई एक वर्ग की लड़ाई नहीं है बल्कि देश बचाने की लड़ाई है.

रोज़गार की लड़ाई सरकार बदलने की लड़ाई ही नहीं है बल्कि सरकार बदल जाने के बाद भी जारी रहने वाली लड़ाई है और इसे बड़ी एकजुटता के साथ जारी रखना होगा।”

एसएफआई के राज्य सचिव विकास स्वरूप ने कहा कि सरकार इस बात पर ज़ोर दे रही है कि हमें मोनेटाइजेशन करने की ज़रूरत है लेकिन यही सरकार सेंट्रल विस्ता जैसे फिजूलखर्ची वाले प्रोजेक्ट बना रही है। रोज़गार देना इस सरकार की प्राथमिकता नहीं है। यह सरकार चाहती है कि आप रोज़ी की लड़ाई में उलझे रहें और इनसे सवाल न पूछ सकें। उस सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए जिससे रोज़गार मांगने की ज़रूरत पड़ने लगे। समाज के एक बड़े हिस्से को, और खासकर वंचित तबकों को, इस सरकार ने गहरे गड्ढे में धकेल दिया है।

सिंघु बॉर्डर पर शहीद हो रहे किसानों, इलाज के अभाव में मर रहे लोगों से सरकार को रत्ती भर भी संवेदना नहीं है।”

सम्मेलन को आर वाई ए के सह- संयोजक सुमित गौतम व डीवाईएफआई के जिला प्रभारी अखिल विकल्प आईसीएम के संयोजक रितेश विद्यार्थी युवा स्वाभिमान मोर्चा के संयोजक डॉ आरपी गौतम युवा नेता किसान रहमानी ओबीसी एससी संगठित मोर्चा की जिला अध्यक्ष मुक्ता कुशवाहा युवा मंच के संयोजक राजेश सचान विद्यार्थी युवजन सभा के शैलेश मौर्य, अंकित कामत, एसएससी आंदोलन के नेता सुनील यादव आदि ने संबोधित किया।

सम्मेलन का संचालन आरवाईए के राज्य सचिव व छात्र युवा रोजगार अधिकार मोर्चा के संयोजक सुनील मौर्य ने किया धन्यवाद ज्ञापन आइसा के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पासवान ने किया।

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