एशियाई खेलों के उद्धाटन में चीन ने आभासी दुनिया का अद्भुत नजारा दिखाया

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चीन के हांगझाऊ में शनिवार को हुए एशियाई खेलों के उद्धाटन समारोह में दुनिया ने एक अद्भुत नजारा देखा। टेक्नोलॉजी की भावी दुनिया कैसी होगी, कुछ उसके संकेत वहां देखने को मिले। फेसबुक कंपनी का नाम बदलकर मेटा रखते समय इस कंपनी के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि मेटा एक आभासी दुनिया होगी, जिसमें मानव को आभासी दुनिया (वर्चुअल वर्ल्ड) में अपनी कल्पनाओं को साकार होते देखने का मौका मिलेगा।

हांगझाऊ में कुछ-कुछ ऐसा ही हुआ। यह पहला मौका है, जब किसी ऐसे खेल आयोजन के समय जलाई जाने वाली मशाल को एक वर्चुअल (आभासी) मनुष्य ने जलाया। फेसबुक का मेटा अभी तक हकीकत नहीं बना है। लेकिन हांगझाऊ के बिग लॉटस स्टेडियम में मौजूद एक लाख दर्शकों और अपने टीवी स्क्रीन पर नजर गड़ाए बैठे करोड़ों दर्शकों ने हकीकत की तरह दिख रहे आभासी दृश्यों को देखा। 

आभासी नदियां, आभासी तितलियां, आभासी मनमोहक नजारे- और उनके साथ सचमुच के इंसानों के करतबों का तालमेल! उनसे मोहित हुए अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा कि हांगझाऊ एशियन गेम्स ने भविष्य के खेलों के लिए एक उदाहरण पेश किया है। बाक ने कहा- ‘पहली बात तो यह है कि यह आयोजन अब तक का सबसे बड़ा है, जिसमें 12,000 से ज्यादा एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। दूसरी बात यह है कि इसने ऐसे खेलों के सस्टेनेबल (पर्यावरण सम्मत) आयोजन के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। कार्बन उत्सर्जन, शून्य कचरा (waste) की नीति, और ऐसे कई अन्य प्रयासों को यहां लागू किया गया है।’

हांगझाऊ खेलों की विशेषता यह है कि इसमें डिजिटल गेम्स को भी शामिल किया गया है। यानी अभी तक जिन खेलों को ऐप के जरिए नौजवान लोग मोबाइल स्क्रीन या कंप्यूटर पर खेलते थे, उनमें भी इन खेलों के दौरान मुकाबला होगा। इस तरह ओलंपिक खेलों की परिभाषा में कुछ नया जुड़ने जा रहा है।

ऐसा पहली बार इन्हीं खेलों के दौरान होगा, जब ई-स्पोर्ट्स यानी इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स में किसी खिलाड़ी को पदक मिलेगा। ई-स्पोर्ट्स श्रेणी के तहत कुल सात गेम्स को शामिल किया गया है। हालांकि प्रदर्शनी के तौर पर 2018 के एशियाई खेलों के दौरान भी ई-स्पोर्ट्स को जगह दी गई थी, लेकिन उन खेलों में पदक पहली बार हांगझाऊ में ही प्रदान किए जाएंगे।

चीन में हुई इस पहल ने खेलों की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बढ़ रही भूमिका पर नए सिरे से रोशनी डाली है। दरअसल, उद्घाटन समारोह में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका देखने को मिली। नई तकनीक के सुचारू संचालन के लिए चीन ने इन खेलों में 5.5जी इंटरनेट नेटवर्क की व्यवस्था की है। 5.5-जी दरअसल, 5-जी का उन्नत रूप है, जिसे एडवांस्ड 5-जी भी कहा जाता है। 5-जी टेक्नोल़ॉजी में चीन दुनिया में अग्रणी देश है और वह तेजी से 6-जी को विकसित करने के प्रयास में जुटा हुआ है। इस बीच उसने एक बीच का नेटवर्क 5.5-जी के रूप में विकसित किया है। इसकी सेवा और सुविधाएं हांगझाऊ में खेल स्थलों पर प्रदान की गई हैं।

तकनीक विशेषज्ञों के मुताबिक तीव्र गति का नेटवर्क ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ थ्री डी प्रिटिंग आदि टेक्नोलॉजी को हकीकत में बदलने के लिए अनिवार्य है। हांगझाऊ में ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ और ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ के प्रयोग देखने को मिल रहे हैं। यह संभव इसीलिए हुआ है कि चीन इंटरनेट की सेवाएं उस रफ्तार से प्रदान करने में सक्षम हो गया है, जो अभी बाकी दुनिया में सपना या अधिक से अधिक भविष्य की योजना का हिस्सा हैं।

जहां तक खेलों की बात है, तो एशिया में चीन का कोई मुकाबला ही नहीं है। ओलंपिक्स में जरूर उसके और अमेरिका के बीच कड़ी होड़ होती है, जिसमें अब तक सिर्फ एक मौके (2008 में हुए बीजिंग ओलिंपिक) को छोड़ कर अमेरिका बाजी मारता रहा है। मगर एशिया में चीन इतना अधिक आगे है कि एशियाई खेलों में पहले नंबर पर कौन रहेगा, इस पर कोई बहस नहीं बची है। अपनी इस ताकत का नजारा चीन ने रविवार को यानी खेलों के पहले दिन ही दिखा दिया। 24 सितंबर की रात जब उस रोज के मुकाबले खत्म हुए तब तक वह 20 स्वर्ण पदक जीत चुका था, जबकि दूसरे नंबर पर दक्षिण कोरिया था, जिसे पांच स्वर्ण पदक ही मिले थे। भारत को अपना पहला स्वर्ण पदक जीतने के लिए अगले दिन यानी सोमवार का इंतजार करना पड़ा, जब निशानेबाजी में 10 मीटर टीम राइफल स्पर्धा में भारतीय टीम को कामयाबी मिली।

बहरहाल, खेलों का सिलसिला अभी लंबा है। समापन समारोह आठ अक्टूबर को होगा। इस दौरान खिलाड़ियों की प्रतिभा और क्षमता के खूबसूरत नजारे दुनिया को देखने को मिलेंगे। मानव शरीर और मस्तिष्क की क्षमताओं की जोरदार स्पर्धा खेल स्थलों पर होगी।

लेकिन तकनीक प्रेमी लोगों की अब अपेक्षा यह है कि उस रोज एक बार फिर भविष्य की टेक्नोलॉजी के मनमोहक नजारे उन्हें देखने को मिलेंगे। तकनीक की दुनिया की जानी-मानी वेबसाइट ‘टेक्नोलॉजी मैग्जीन’ ने उद्घाटन समारोह से ठीक पहले एक रिपोर्ट में कहा था- एशियन गेम्स 2023 का उद्घाटन समारोह (23 सितंबर 2023) ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के टेक्नोलॉजिकल आउटलुक (तकनीकी नजरिए) और उसकी इस विरासत का एक उत्सव होगा। इसके जरिए वह अपने इस दृष्टिकोण को श्रद्धा सुमन अर्पित करेगा। इसमें जिन टेक्नोलॉजी के तत्व शामिल होंगे, उनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इकॉ-फ्रेंडली तकनीक भी शामिल है।

(जनचौक की रिपोर्ट।)

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