Friday, March 1, 2024

अमेरिका में भारतीय छात्र को महीनों बंधक बनाकर रखा, पिटाई की, भारतीय मूल के तीन लोगों पर आरोप

नई दिल्ली। अमेरिका में पुलिस ने महीनों तक बंधक बना कर रखे गए एक भारतीय छात्र को मुक्त कराया है। छात्र की उम्र 20 वर्ष है। छात्र के चचेरे भाई और भारतीय मूल के दो लोगों पर उसे बंधक बनाने का आरोप है। पीड़ित को एक तहखाने में बंद करके महीनों तक रखा गया और इस दौरान उसे बेरहमी से पीटा गया। साथ ही उसे तीन घरों में काम करने के लिए मजबूर भी किया।

अमेरिकी पुलिस ने इस घटना को “बिल्कुल अमानवीय और बेहद गलत” बताया है। पुलिस ने पीड़ित के नाम का खुलासा नहीं किया है। पीड़ित छात्र अमेरिकी राज्य मिसौरी में तीन घरों में महीनों फंसा रहा और काम करता रहा।

बुधवार 29 नवंबर को, पुलिस सेंट चार्ल्स काउंटी में एक ग्रामीण राजमार्ग पर स्थित एक घर पर पहुंची। बाद में उन्होंने वेंकटेश आर सत्तारु, श्रवण वर्मा पेनुमेत्चा और निखिल वर्मा पेनमात्सा को गिरफ्तार कर लिया और गुरुवार 30 नवंबर को उन पर मानव तस्करी, अपहरण और हमले सहित अपराधों का आरोप लगाया।

इस बात का खुलासा तब हुआ जब अमेरिका के ही एक नागरिक को इस बात की भनक लगी और उसने पुलिस को इस बात की सूचना दी। जिसके बाद पुलिस ने तीनों घरों की तलाशी ली और छात्र को मुक्त कराया।

अभियोजक जो मैककुलोच ने बताया कि पीड़ित के कई हड्डियों में फ्रैक्चर है और साथ ही उसके पूरे शरीर पर घाव और चोट लगे हुए हैं। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

आरोप है कि छात्र को सात महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। उसे बाथरुम तक नहीं जाने दिया जाता था और एक कंक्रीट की जमीन पर सोने के लिए मजबूर किया गया।

एक प्रमुख क्षेत्रीय समाचार पत्र, सेंट लुइस पोस्ट-डिस्पैच ने बताया कि उसने पास के रेस्तरां के कूड़ेदानों में कूड़ा-कचरा खोजा और पाया कि छात्र को बिजली के तार, पीवीसी पाइप, धातु की छड़ें, लकड़ी के बोर्ड, लाठियों और वॉशिंग मशीन के लिए पानी की आपूर्ति वाली नली से पीटा गया।

मैककुलोच ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “यह बिल्कुल अमानवीय और बेहद गलत है कि एक इंसान दूसरे इंसान के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे कर सकता है।”

सेंट चार्ल्स काउंटी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, तीन प्रतिवादियों पर अप्रैल 2023 से शुरू होने वाले डिफेंस, डार्डेन प्रेयरी और ओ’फालोन में सत्तारू के तीन अलग-अलग घरों में पीड़ित को कैद करने और दुर्व्यवहार करने का आरोप है। जांचकर्ताओं ने सत्तारू की पहचान सरगना के रूप में की थी और वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ओ’फालोन घर में रहता है।

मामले में मुख्य संदिग्ध, 35 वर्षीय सत्तारू पर गुलामी के उद्देश्य से मानव तस्करी और दस्तावेज़ के गलत इस्तेमाल के जरिये मानव तस्करी करने का भी आरोप लगाया गया है।

पेनुमेत्चा और पेनमात्सा उस घर में रहते हैं जहां छात्र को बचाया गया था। अधिकारियों ने कहा कि छात्र पिछले साल रोला में मिसौरी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में पढ़ाई करने के लिए भारत से अमेरिका आया था। लेकिन उसे अप्रैल की शुरुआत में सत्तारू के घरों में ले जाया गया और सुबह 4:30 बजे के आसपास काम शुरू करने, सत्तारू की आईटी कंपनी के लिए पूरा दिन काम करने और फिर शाम के कामों की एक लिस्ट बनाने के लिए मजबूर किया गया।

अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, छात्र ने पुलिस को बताया कि वह रोज एक बंद तहखाने में कंक्रीट के फर्श पर सिर्फ तीन घंटे सोता था और वहां सत्तारू एक निगरानी कैमरे से उस पर नजर रखता था। काम ठीक से नहीं करने पर छात्र को बुरी तरह पीटा जाता था। आरोपों में कहा गया है कि उसे नग्न होने के लिए भी मजबूर किया गया और उसके पूरे शरीर पर वार किये गये। आरोप है कि उसे लात मारी गई, कुचला गया और कोड़े मारे गए, और उसकी चोटों में पिछले फ्रैक्चर और चोटें शामिल थीं जो अभी ठीक नहीं हुईं।

मैककुलोच ने कहा, “उन्होंने उसे मुक्कों से मारा, उस पर हमला किया, बिजली के तारों, पीवीसी पाइपों से पीटा। उन्होंने उसे एक अधूरे तहखाने में सोने के लिए मजबूर किया, उसे भूखा रखा, और बाथरुम तक उसे नहीं जाने दिया।” मैककुलोच ने इस घटना की सूचना देने वाले नागरिक की सराहना की।

मैक्कुलोच ने बताया कि क्योंकि तीनों आरोपी अमीर हैं और उनके भारत में राजनीतिक संबंध हैं, इसलिए उन्हें बिना बांड के सेंट चार्ल्स काउंटी जेल में रखा जा रहा है।

कई लोगों ने बताया कि आरोपियों के उनके परिवार के साथ अच्छी बातचीत होती थी। वे सड़क पर चलते समय हाथ हिलाते थे या सड़क पर बच्चों के साथ खेलते थे। सत्तारू के घर के सामने वाली सड़क पर रहने वाले चिराग शाह ने कहा, “निश्चित रूप से यह चौंकाने वाला है।”

जब पुलिस तलाशी लेने आरोपी के घर पहुंची तो घर के एक व्यक्ति ने पुलिस को अंदर आने से मना कर दिया लेकिन तभी पीड़ित भारतीय छात्र बेसमेंट से भागता हुआ आया। पुलिस के अनुसार वह बुरी तरह से कांप रहा था, बुरी तरह जख्मी था और उसके पूरे शरीर पर चोट और सूजन थी।

घर से भागने के बाद, छात्र ने पुलिस को बताया कि सत्तारू अक्सर उसे खुद पीटता था, लेकिन पेनुमेत्चा और पेनमात्सा कभी-कभी उसे दंडित भी करते थे। छात्र ने कहा कि वह तीनों के बारे में रिपोर्ट करने से डर रहा था क्योंकि वे अमीर थे और उनके भारत में उपर तक पहुंच थी। उसने कहा कि उसे अपनी और भारत में अपने परिवार की सुरक्षा का डर है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित लगभग हमेशा तीन संदिग्धों में से कम से कम एक की मौजूदगी में था और उसका अपने परिवार के साथ बहुत कम संपर्क होता था। वह आरोपियों के मोबाइल फोन से अपने परिवार से बात करता था और उस वक्त उसके पास कोई ना कोई मौजूद रहता था जिस कारण वह अपने घरवालों को कुछ नहीं बता पाता था।

(‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर पर आधारित।)

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