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Wednesday, September 29, 2021

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कोई नहीं दबा सकता है हिंदुस्तान के युवाओं की आवाज: राहुल गांधी

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नई दिल्ली। पेगासस, कृषि बिल, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर आज कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं ने संसद का घेराव किया। यूथ कांग्रेस की ओर से आयोजित किए गए इस प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कोरोना के समय जनता के लिए काम करने वाले अपने इस संगठन के युवाओं को मैं बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि युवाओं के सामने आज रोजगार सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है लेकिन विडंबना यह है कि इस मुद्दे पर पीएम मोदी एक भी शब्द नहीं बोलते हैं। यह सरकार रोजगार देने की जगह लगातार उसे छीनने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार हम दो हमारे दो की नीति पर चल रही है और कहा जाए तो दो-तीन उद्योगपतियों के लिए ही काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा की सच्चाई टेलीविजन पर नहीं दिखाई जा रही है। हिंदुस्तान की सच्चाई लगातार सरकार द्वारा दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्ची का कल बलात्कार हुआ क्या वह कहीं टेलीविजन और मीडिया का मुद्दा बना? उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। क्योंकि ये जानते हैं कि जिस दिन युवा बोलेगा और उसकी आवाज उठेगी उस दिन सरकार खतरे में आ जाएगी।

पेगासस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ मेरे फोन के भीतर नहीं बल्कि हिंदुस्तान के हर युवा के फोन में पेगासस डाला गया है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के युवा की आवाज कोई नहीं दबा सकता है।

इससे पहले संसद भवन के बाहर विजय चौक पर आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदन में जो हंगामा हो रहा है, वो पेगासस इश्यू को लेकर चल रहा है। और पेगासस देश की सिक्योरिटी और उसके नागरिकों की आजादी तथा उनकी प्राइवेसी का इश्यू है। जैसा कि आप जानते हैं प्रेस है, आर्मी है यहां तक कि जजों को भी नहीं छोड़ा गया है। एक के बाद एक खुलासा हो रहा है। तो हम इसलिए हाउस में पेगासस इश्यू पर डिस्कशन करना चाहते हैं। सरकार क्यों भाग रही है? दूसरा, उनका ये कहना है कि अपोजिशन पार्टी के लोग तैयार नहीं हैं, इसलिए चर्चा हो नहीं हो पा रही है।

मुझे बताओ सरकार की ओर से कोई एकाध नोटिस मिली है? इतने अपोजिशन लीडर हैं, 17-18, जिसमें सभी ने मिलकर मीटिंग की है। मीटिंग की नोटिस किसको उन्होंने दी, क्या राजनाथ सिंह साहब ने बुलाया, नोटिस दिया? क्या पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर ने बुलाया? क्या लीडर ऑफ दी हाउस उन्होंने बुलाया? मुझे बताइए, ये कह रहे हैं कि अपोजिशन के लोग चर्चा नहीं चाहते हैं और फार्मर मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते हैं। इन्फ्लेशन पर बोलना नहीं चाहते हैं और कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, उस पर बोलना नहीं चाहते हैं और बिल पर बोलना नहीं चाहते हैं। इसलिए एक घंटे में अगर 10 बिल पास होते हैं, तो इनकी नीयत कैसी है, आप ही देखिए।

अब सारी दुनिया में जांच हो रही है पेगासस पर। फ्रांस में, इजराइल ने तो उस कंपनी पर रेड की, उसके साथ में हंगरी में हो रहा है, अल्जीरिया में और फिर दूसरे देशों में भी ये जांच चल रही है, तो आप क्यों डर रहे हैं? इस पेगासस इश्यू पर चर्चा करने से?

इतना ही नहीं इस 10 साल का आंकड़ा मैं देता हूं आपको। कम से कम 10 बार जो 267 पर यानी सारे रूल को अलग रखकर उन्होंने चर्चा की और 4 अगस्त, 2010 को इन्फ्लेशन पर चर्चा हो गई। 7 दिसंबर, 2012 में एफडीआई पर हो गई। 22 अप्रैल, 2013 में फॉर्मर सुसाइड पर हुई है। और इनकी सरकार आने के बाद 18 दिसंबर, 2014 को सेकुलर फैब्रिक जो हमारा है और हमारे देश में जो अटैक हुआ था, वो हो गया। 23 अप्रैल, 2015 में एग्रेरियन क्राइसिस पर हो गया, अब हम वही एग्रेरियन क्राइसिस और जो तीन काले कानून हैं, उनको वापस लो, ये जो हमारी मांग है, उस पर वो बोलना नहीं चाहते हैं। फिर 10 अगस्त, 2016 में कश्मीर इश्यू पर हुआ है और 16 नवंबर, 2016 में नोटबंदी इश्यू पर हुआ है। इतना ही नहीं, जो चीजें पहले हुई हैं, जिसका प्रिसिडेंट है और ये प्रिसिडेंट रहते हुए भी वो लोग पार्लियामेंट में भी उस पर बहस करने के लिए तैयार नहीं हैं।

मैं इसलिए बता रहा हूं कि किसी नेता ने हमसे आकर बात नहीं की, सिर्फ झांक कर देखा मेरे कमरे में और हाउस में टेबल पर आकर कुछ नहीं किया। क्या करना, बताइए, हमने सोचा। हमने तो सलाह दी हमारे डिफेंस मिनिस्टर को कि भाई, आप डिप्टी लीडर हैं, दोनों हाउस के लोगों को बुलाकर मीटिंग करें। उन्होंने नहीं की, वो कजाकिस्तान से आने के बाद करुंगा और देखेंगे कि आप क्या कर सकते हैं। अरे, हम क्या कर सकते हैं?

तो ये मैं क्यों बता रहा हूं कि बार-बार टी.वी. में, प्रेस में ये लिखवाया जा रहा है कि सरकार तो तैयार है, सरकार अपोजिशन को अप्रोच कर रही है। लेकिन अपोजिशन पार्टी मान नहीं रहीं, अड़ी हुई हैं, बात करने को तैयार नहीं। तो मुझे एक छोटी सी चिट्ठी बता दीजिए कि जो मीटिंग हुई है और जिसमें हम गए नहीं और सब पार्टियों के लोगों को, किसी को भी पूछ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं आपको यही कहना चाहता हूं कि सरकार झूठा प्रोपोगेंडा कर रही है। किसानों के बारे में भी और इन्फ्लेशन, फ्यूल का तो आपको पता है और खासकर पेगासस इश्यू बहुत महत्वपूर्ण है। और मुझे ताज्जुब इस बात का है कि इस हाउस में बहुत हंगामा हुआ है। यहाँ तक कि मैं खुद ही विटनेस हूं कि जब एक रिजर्वेशन ऑफ प्रमोशन का बिल आया था, महिलाओं का बिल आया था, तो उसको फाड़ कर, फेंक कर, एक दूसरे के मुँह पर फेंका, सदन में गड़बड़ हो गई।

राज्यसभा का दृश्य।

वहाँ उस वक्त लोकतंत्र के हित में है, टॉलरेट किया यानी इनके पास टॉलरेंस भी नहीं है, सहिष्णुता भी नहीं है। इसलिए इन्होंने 6 लोगों को सस्पेंड किया, ये गलत है और टीएमसी के जो मेंबर हैं, उन्होंने कुछ नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ डिमांड की, प्ले कार्ड पहले से भी लगाते हैं, हमारी पार्टी के नेता ने भी लगाया है, दूसरों ने भी लगाया है। लेकिन ऐसे टारगेट करके, डरा कर, धमका कर, प्रेशर डाल कर अगर कोई हमारे इश्यू को कुचल देना चाहता है, तो कांग्रेस पार्टी और जितने भी हमारी अपोजिशन पार्टी हैं, वो झुकने वाली नहीं हैं, ये लड़ते रहेंगे, आगे बढ़ते रहेंगे।

इस मौके पर प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि जैसे एलओपी साहब ने सारा जिक्र किया, ओवरऑल व्यू उन्होंने दिया है। मैं विशेषतौर से किसान, जो हमारे बैठे हुए हैं, तकरीबन एक साल से ये काले कानून जो लेकर आए हैं, और उसके बाद 8 महीने से दिल्ली के बॉर्डर्स पर बैठे हुए हैं। मुझे सबसे बड़ा इस बात का अफ़सोस है कि more than 500 people have died. They have given up their lives in this cause. मार्टियर हुए हैं, शहीद हुए हैं, एक दफा भी प्रधानमंत्री जी ने, एक शब्द तक उनके लिए नहीं कहा, they are Indian Citizens.

पार्लियामेन्ट चलाना, सर आपको पता है ये दायित्व सरकार का है। पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर आपने कौन से काम के लिए बनाय़ा हुआ है? ये ड्रामा रचाया जा रहा है। इनके पास कोई जवाब न तो किसानों के बिल पर है। हम कह रहे हैं, ये काले कानून हैं। देखिए, मोदी साहब ने बात कही कि मैं किसानों के हक में लेकर आया हूँ। भईया, अगर हक में लाए हो वो तो इसको कबूलने के लिए तैयार नहीं हैं। पहले तो मैंने मोदी साहब को कहा था, चलो मैं चलता हूँ, सिंघु बॉर्डर, आपको लेकर चलते हैं, जयकारे भी आपके हक में लगाते हैं, मगर आप कहिए कि अगर आप इनको कबूल नहीं करते, मैं वापस लेने को तैयार हूँ।

तो मोदी साहब को आज मैं इधर से विशेष तौर से ये अपील करूँगा, मोदी साहब, हर महीने आप अपने मन की बात कहते हो, कभी किसानों के मन की बात भी सुनी? दूसरी बात आज तो सिंघु बॉर्डर 40-50 किलोमीटर पर है, या गाजीपुर बॉर्डर, तो अब तो वो 500 गज पर जंतर-मंतर पर आकर बैठे हुए हैं। कल परसों मैं और मेरे कुलीग्स वहाँ पर जाकर आए। वो वहां अपनी पार्लियामेंट  चला रहे हैं। आप जाइये, वहाँ जाकर उनकी बात सुनिए और ये तीनों काले कानून वापस लीजिए।

उनका भी मानना और इंडियन नेशनल कांग्रेस का भी मानना है कि सर ये जो तीन काले कानून हैं, ये डेथ वारंट्स हैं, फार्मर्स के। पंजाब और हिंदुस्तान का किसान जानता है, इनका मंसूबा है, किसानों की जमीनों पर कब्जा करने का और मल्टीनेशनल्स के हाथ में पकड़ाने का, ये मंसूबा कभी इंडियन नेशनल कांग्रेस कामयाब नहीं होने देगी। तो ये हम कहना चाहते हैं। चर्चा ये नहीं चाहते।

एक प्रश्न पर कि मुख्तार अब्बास नकवी जी ने सांसदों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है, खड़गे ने कहा कि वो सबको सदन के बाहर निकालकर सदन चलाना चाहते हैं। 6 को तो सस्पेंड किया है, बाकी के लोगों का भी नाम ले रहे हैं। बाजवा साहब का भी नाम लेंगे, अखिलेश साहब का नाम लेंगे। हमारे अमी याजनिक जी का भी लेंगे, और दूसरे हमारे जितने भी साथी हैं, जो पार्टी के लोग हैं, सभी पार्टी के हैं, अपोजीशन पार्टी के, उनको एक-एक करके हटाने की कोशिश वो कर रहे हैं, ताकि वो खुद अपनी मर्जी से सदन चलाते रहें, तो इसीलिए ये हमारी तरफ से कुछ नहीं है। ये साजिश रची गई है कि किसानों के मुद्दे, जो भी हैं, उनको पीछे रखना चाहते हैं, नजरअंदाज करना चाहते हैं। पेगासस मुद्दे को दबाकर वो इस सेशन को खत्म करना चाहते हैं।

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