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कटीले तार! पानी की बौछार! गड्ढे रहे नाकाम, अब दिल्ली के स्टेडियमों को जेल बनाने की तैयारी

किसानों का विरोध मार्च ‘दिल्ली चलो’ का आज दूसरा दिन है। कल हरियाणा में खट्टर की पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी देश के अन्नदाताओं के इस मार्च को रोकने के लिए। सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर, कंटीले तार का बाड़ लगा कर भी किसानों के सैलाब को रोक पाने में नाकाम होने के बाद उन पर पानी का तेज बौछार, आंसू गैस के गोले दागने से भी जब सफलता नहीं मिली तो देर रात खबर आई कि सड़क पर पुलिस वालों ने 10 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए। अब सुबह दिल्ली से खबर है कि सरकार इतनी डर गयी है कि 9 स्टेडियमों को अस्थायी जेलों में तब्दील करने की अनुमति मांगी है।

इस बीच दिल्ली से सटे बहादुरगढ़ सीमा पर किसानों को रोकने के लिए जाम किये गये सड़क पर खड़ी की गयी एक ट्रक को किसानों ने खींच कर हटा दिया है। कल भी कुछ इस तरह के नजारे सामने आये थे।

इससे पता चलता है कि ये किसान बहुत ही चट्टानी इरादों और आक्रोश के साथ दिल्ली के लिए कूच किये हैं और मोदी और खट्टर सरकार की तमाम कोशिशें उसके आगे विफल हैं।

टिकरी सीमा पर पुलिस पानी और टीयर गैस के गोले दाग रही है, किसान इन्हें भेदते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वे 2022 तक किसानों की आमदनी दुगनी कर देंगे। फिर ऐसा कानून ले आये कि किसान सड़कों पर आ गये।

कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के​ लिए दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों को तितर-बितर करने के लिए सिंधु बॉर्डर पर सुरक्षा बल आंसू गैस के गोले छोड़ रहे हैं।

पानीपत में भी आज 2020 में इतनी सुरक्षा बल तैनात किये गये हैं कि शायद 1526 के पानीपत के प्रथम युद्ध में नहीं लगाये गये थे।

कांग्रेस के तमाम नेता पानीपत में किसानों के साथ उतर आये हैं। रणदीप सिंह सुरजेवाला, पवन खेड़ा, कुमारी शैलजा जैसी नेता पानीपत में किसानों के साथ सडक पर हैं।

पंजाब से भारी संख्या में किसान संगठन जो कल नहीं जा पाए थे वो आज निकलेंगे। इस जानकारी के मिलने के बाद अंबाला को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

अम्बाला के एसपी ने कहा कि, “हमने शंभू बॉर्डर को पूरी तरह से बंद रखा हुआ है, आज हमें जानकारी मिली है कि पंजाब से भारी संख्या में किसान संगठन जो कल नहीं जा पाए थे वो आज यहां से जाने की कोशिश करेंगे। हम आज भी कोशिश करेंगे कि वो यहां से दिल्ली की ओर कूच न कर सकें”।

किसानों का सैलाब लगातार दिल्ली की सत्ता हिलाने के लिए आगे बढ़ रहा है।

कृषि कानूनों के विरोध में किसान दिल्ली जाने के लिए सिंधु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। एक किसान ने कहा, “हमें प्रदर्शन करने का भी हक नहीं है, ऐसे बैरिकेड लगाए हैं जैसे कि हम पाकिस्तान या चीन से आए हैं। हम अपनी राजधानी में प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

किसानों के दिल्ली चलो आंदोलन को देखते हुए दिल्ली जाने वाले सभी वाहनों की जांच की जा रही है जिससे दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर लंबा जाम लग गया है। वहीं, किसानों का कहना है कि वे 6 महीने का राशन लेकर निकले हैं घर से।

कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए किसान रोहतक से दिल्ली की तरफ आ रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी किसान ने बताया, “पुलिस ने हमें पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोलों से रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन हमने इसकी परवाह नहीं की और हम दिल्ली की ओर आगे बढ़ रहे हैं।”

सिंधु बॉर्डर (हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर) पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

तमाम विपक्षी नेताओं और देश की तमाम केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों जिनमें इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियंस (सीटू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), सेल्फ-एंप्यॉलयड वीमेंस एसोसिएशंस (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और युनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) जैसी यूनियनों ने मोदी और खट्टर सरकार की तानाशाही की निंदा की है।

बीते कल जब कि सत्ता पर काबिज लोग संविधान पर ज्ञान दे रहे थे तब 25 करोड़ लोग देश भर में सड़कों पर उतरे हुए थे। किन्तु डोनाल्ड ट्रम्प को कोरोना होने पर चिंतित होने वाले नरेंद्र मोदी ने किसानों के नाम एक शब्द नहीं कहा।

इस बीच जब किसान अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे और पुलिस उन्हें रोकने के लिए सम्पूर्ण बल प्रयोग में लगी थी, तब मोदी मीडिया अपनी दलाली में लगी हुई थी। किसान सड़क पर क्यों हैं इस सवाल को दबा कर वो देश की जनता को बता रही थी कि किसानों को किसने भड़काया।

इस बीच कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि वह किसानों के साथ खड़ी है। हरियाणा कांग्रेस की कुमारी शैलजा ने कहा- कांग्रेस पार्टी किसान-मजदूर-आढ़ती भाइयों के साथ खड़ी है। राहुल गांधी ने ऐलान किया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार आने पर इन कृषि विरोधी काले कानूनों को वापस लिया जाएगा।

(नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on November 28, 2020 3:56 pm

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