Wednesday, April 17, 2024

रामलीला मैदान में विपक्ष की महारैली: लोकतंत्र  और रोजगार को सबसे बड़ा मुद्दा बनाना होगा

ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आज होने जा रही INDIA गठबंधन की रैली की ओर पूरे देश की निगाह लगी है। माना जा रहा है कि यह इस चुनाव का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। 

उधर मोदी जी भी, राम लीला मैदान रैली को लाइम-लाइट से हटाने के लिये, सचेत ढंग से आज ही के दिन बगल में मेरठ में रैली कर रहे हैं। जाहिर है दोनों रैलियों की तुलना भी होगी, सर्वोपरि उनसे निकलने वाले राजनीतिक सन्देशों और जनता को लुभाने के लिए किए जाने वाले वायदों और दावों की।

रामलीला मैदान की  “लोकतंत्र बचाओ” महारैली में विपक्ष को पूरी तरह पंगु बना कर सत्ता हड़प लेने की मोदी-भाजपा की खतरनाक मुहिम को तो चुनौती दी ही जाएगी, विपक्ष इस बड़े अवसर का इस्तेमाल लोक कल्याण के अपने ठोस वायदों को  देश में जन-जन तक पहुंचाने के लिए भी करेगा।

जहां तक मोदी की गारंटियों का सवाल है, उनका शोर अब धीमा पड़ता जा रहा है क्योंकि सभी मोर्चों पर 10 साल से झूठ के हजार पर्दों में छिपाई गयी उनके वायदों और दावों की खौफनाक सच्चाई अब जनता के सामने आ चुकी है और लोग 10 साल से उसके भुक्तभोगी हैं। 

हाल ही में उन्होंने बंगाल में कहा कि वे ऐसे तरीकों के बारे में सोच रहे हैं जिससे ED जो भ्रष्टाचारियों का पैसा जब्त कर रही है, उसे जनता के बीच बांटा जा सके। लेकिन उनका इतना बड़ा बयान कहीं कोई हलचल पैदा नहीं कर सका क्योंकि विदेशों से काला धन लाकर जनता में 15-15 लाख बांटने के उनके जुमले का हस्र लोग देख चुके हैं !

मोदी के वायदों और गारंटियों की साख अब खत्म हो चुकी है।

उधर मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों द्वारा पैदा जीवन का संकट जनता को बेचैन किये हुए है। आज बेरोजगारी का सवाल मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता और चुनाव के सबसे बड़े मुद्दे के रूप में उभर रहा है।

ILO के ताजा आंकड़ों से मोदी राज में बेरोजगारी की जो तस्वीर सामने आ रही है, उसने लोगों को चिंताकुल कर दिया है तथा लोगों के मन में इस सरकार की रोजगार पैदा कर पाने की क्षमता पर गहरा शक पैदा कर दिया है।

ILO की रिपोर्ट का निचोड़ यह है कि भारत में अगर आप उच्चतर शिक्षा प्राप्त हैं तो आपके बेरोजगार होने की संभावना उतनी ही अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार अशिक्षितों में बेरोजगारी दर 3.4% है तो शिक्षित बेरोजगारी दर उससे 9 गुना अधिक 29.1% है! उतना ही महत्वपूर्ण यह तथ्य है कि मुख्यतः युवा इसके शिकार हैं। आज भारत के कुल बेरोजगारों में 83% बेरोजगार युवा हैं। इन युवा बेरोजगारों में शिक्षितों की संख्या जो 2000 में 35.2% थी, वह बढ़कर आज 65.7% हो गयी है।

देश में 20 से 24 साल के युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 44.49% है अर्थात लगभग आधे युवा बेरोजगार हैं। आज़ाद भारत की सबसे बड़ी बेरोजगारों की फौज आज देश में खड़ी है। कहना न होगा कि भारत में युवा बेरोजगारी की यह दर वैश्विक औसत से अधिक है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षित युवाओं के पास जो स्किल है और बाजार में जिस तरह की मांग है, उन दोनों के बीच mismatch है। गैर-कृषि क्षेत्र श्रम बाजार में प्रवेश कर रहे नए शिक्षित बेरोजगारों के लिए पर्याप्त मात्रा में लाभप्रद रोजगार नहीं पैदा कर पा रहा।

रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2022 के बीच 15-29 आयु वर्ग में शिक्षित बेरोजगारी दर 54.2% से बढ़कर 65.7% हो गयी। भारी संख्या में युवा गिग वर्कर्स को किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा नहीं है।

मोदी ने युवाओं को सालाना 2 करोड़ नौकरियों की जो ‘गारंटी’ दी थी, 10 साल बाद उसकी हकीकत आज यही है! 

सेना जैसी राष्ट्रीय सुरक्षा की संवेदनशील संस्था में 4 साला भर्ती की अग्निवीर योजना लायी गयी है, जहां से 4 साल में ‘ रिटायर ‘ होने के बाद युवा फिर बेरोजगारों की कतार में खड़े हो जाएंगे।। सबसे बुरा तो उन 1.5 लाख युवाओं के साथ हुआ जो अग्निवीर योजना आने से पहले सेना और वायुसेना की नियमित भर्ती के लिए चुन लिये गए थे। लेकिन अग्निवीर योजना आते ही वे फिर से बेरोजगार  हो गए। उन्हें सेना और वायुसेना के साथ ही अग्निवीर में भी भर्ती नहीं किया गया। उनकी हताशा का अंदाज़ा लगाइए!

UP की वह रिपोर्ट लोग भूले नहीं होंगे जहां चपरासी के 62 पदों के लिए जिन लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था उनमें 3700 Ph D, 28000 PG, 50 हजार स्नातक थे !

दरअसल, भारत में बेकारी की जो भयावह तस्वीर ILO ने पेश किया है, सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अनन्त नागेश्वरन ने यह कह कर कि बेरोजगारी जैसी समस्याओं को हल करना किसी सरकार के वश में नहीं है, एक तरह से इस रिपोर्ट की पुष्टि ही की है। हालांकि मोदी जी के मंत्री इसे भी फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी रंग देने से बाज नहीं आ रहे हैं, उनका तर्क है कि हम विदेशी आंकड़े पर विश्वास नहीं करते, हम अपने देश के आंकड़ों को सच मानते हैं!

विपक्षी नेताओं ने कहा है कि यह बयान अगर सरकार का है कि वह बेरोजगारी का समाधान नहीं कर सकती, तो उसे सत्ता से हट जाना चाहिए। उनका दावा है कि वे बेरोजगारी दूर करने का पूरा ब्लू प्रिंट अपने घोषणा पत्र में पेश करने जा रहे हैं।

दरअसल, यही समय है जब लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रही सारी ताकतों को रोजगार के सवाल को युद्ध स्तर पर उठाना होगा और एक-एक युवा-छात्र और उनके अभिभावक तक इस सच को पहुंचाना होगा कि नई पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य और रोजगार के लिए मोदी-भाजपा की पुनर्वापसी को रोकना होगा।

वैसे तो सबको रोजगार देने के लिए बहुत कुछ नीतिगत बदलाव करने होंगे और आने वाले दिनों में नई सरकार पर उस दिशा में लगातार दबाव बनाना होगा। पर विपक्ष की ओर से अभी ही जो गारंटियां आयी हैं, वे युवा पीढ़ी और बेरोजगारों को नौकरी और राहत देने की दृष्टि से अच्छी शुरुआत साबित होंगे। उदाहरण के लिए केंद्र तथा राज्यों में सालों साल से खाली पड़े सरकारी पदों को, जो अनुमान के अनुसार 1 करोड़ के आसपास हैं, अगर time-bound कार्यक्रम के तहत भर दिया जाता है तो उससे युवाओं को बहुत बड़ी राहत मिल सकती है। अभी कांग्रेस की ओर से केंद्र सरकार की नौकरियों में 30 लाख पदों पर भर्ती का वायदा किया गया है, जो निश्चय ही स्वागत योग्य है।

जरूरत तो इस बात की है कि काम के अधिकार को संविधान के मौलिक अधिकारों में शामिल किया जाय, उसे अन्य मौलिक अधिकारों जैसा ही एक justiciable Fundamental Right बनाया जाय। बहरहाल अभी जैसा विपक्षी दल वायदा कर रहे हैं, अगर ग्रामीण के साथ शहरी क्षेत्र के लिए भी रोजगार गारंटी कानून बन जाय, तो यह शहरी बेरोजगारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

देश के सभी स्नातक/डिप्लोमा छात्र/छात्राओं को 1लाख मानदेय के साथ 1 साल की अप्रेंटिसशिप उनके लिए सुरक्षित भविष्य के द्वार खोल सकती है, बशर्ते देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसरों का सृजन हो।

कुल श्रम शक्ति में महिलाओं की संख्या आज बेहद कम है। आज भी मात्र एक तिहाई महिलाएं रोज़गार में हैं। केवल 10% सरकारी नौकरियों में महिलाएं हैं। पुरुषों में जहां शिक्षित बेरोजगारी दर 62.2% है, वहीं महिलाओं में यह 76.7% है। शहर में यह गांव से भी अधिक है।

मोदी राज में काम मिल पाने की उम्मीद खत्म हो जाने से महिलाओं का LFPR घटकर मात्र 25% रह गया है, जो दुनिया में सबसे कम है। इसके बरखिलाफ विपक्ष का यह वायदा कि केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाएगा, अत्यंत सकारात्मक पहल साबित होगा। इसे आगे चलकर तमाम राज्यों तथा निजी क्षेत्र में भी लागू करने का दबाव बनेगा। यह न सिर्फ महिला रोजगार बल्कि समाज के लोकतंत्रीकरण के लिए भी ऐतिहासिक महत्व का कदम साबित होगा।

रोजगार के सवाल को इस चुनाव का केंद्रीय मुद्दा बनाकर INDIA गठबंधन मोदी सरकार को पूरी तरह घेर सकता है और युवाओं को बड़े पैमाने पर अपनी ओर आकर्षित कर चुनाव की पूरी बाजी पलट सकता है। देश के कोने-कोने से आम परिवारों से आने वाले JNU के छात्रों ने भगवाकरण की सारी  साजिशों को नाकाम करके इसकी शुरुआत कर दी है।

क्या आज की रामलीला मैदान की रैली से शुरू हो रहे अपने चुनाव अभियान में विपक्ष युवा पीढ़ी को अपने पक्ष में आंदोलित और गोलबंद करने में सफल होगा ?

(लाल बहादुर सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ पूर्व अध्यक्ष हैं।)

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