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प्रधानमंत्री की उज्ज्वला योजना में महालेखा परीक्षक ने पाया महाघपला

मोदी सरकार जब भी अपनी सफल योजनाओं के बारे में बात करती है तो प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का जिक्र जरूर होता है। 2015 में लांच हुई इस योजना के तहत महिलाओं को एलपीजी गैस कनेक्‍शन दिया जाता है। सरकार का दावा है कि आठ करोड़ से ज्‍यादा कनेक्‍शन दिए जा चुके हैं, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) का कहना है कि उज्ज्वला योजना में बंपर फ्रॉड किया जा रहा है। साढ़े तीन लाख मौकों पर एक दिन में दो से 20 बार गैस भरवाई गई। कैग ने इस स्‍कीम को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कैग का मानना है कि इस योजना का भारी दुरुपयोग हो रहा है। 

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक उज्ज्वला योजना का व्यापक दुरुपयोग हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जरूरतमंदों के बजाए इस योजना का लाभ उन लोगों को मिल रहा है, जिन्‍हें जरूरत नहीं है। इसके साथ ही कैग ने इस योजना में कई कमियों को भी उजागर किया है।

कैग ने कहा है कि एलपीजी गैस के निरंतर उपयोग को प्रोत्साहित करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि लाभार्थियों की वार्षिक औसत रिफिल खपत में गिरावट आई है। बीते साल रिपोर्ट के मुताबिक योजना के तहत जिन 1.93 करोड़ उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिया गया था, उनमें से एक उपभोक्ता सालाना 3.66 एलपीजी ही रिफिल करवाता है। वहीं 31 दिसंबर तक 3.18 करोड़ उज्ज्वला उपभोक्ताओं के आधार पर देखें तो सिर्फ 3.21 एलपीजी सालाना रिफिल करवा रहे हैं।

इसका मतलब ये हुआ कि लोगों ने एलपीजी सिलेंडर तो ले रखा है, लेकिन उसे रिफिल नहीं करवा पा रहे हैं। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से 18 साल से कम उम्र के लोगों को 80 हजार कनेक्शन जारी करने की अनुमति दी गई है। इसी तरह, 8.59 लाख कनेक्शन उन लाभार्थियों को जारी किए गए जो जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार नाबालिग थे। यह प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की गाइड लाइन और एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2000 का उल्‍लंघन है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना के तहत आने वाले 13.96 लाख उपभोक्ता एक महीने में तीन से 41 तक एलपीजी सिलेंडर रिफिल करा रहे हैं।

वहीं इंडेन और एचपीसीएल के आंकड़ों के मुताबिक 3.44 लाख ऐसे उपभोक्ताओं का मामला भी सामने आया है जहां पर एक दिन में दो से 20 एलपीजी सिलेंडर रिफिल भरवाए जा रहे हैं, जबकि इनका कनेक्शन एक सिलेंडर वाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर का कमर्शियल इस्तेमाल हो रहा है। इसके मुताबिक 1.98 लाख उपभोक्ता साल में 12 से ज्यादा सिलेंडर रिफिल करा रहे हैं और ये जांच का विषय है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन जारी किया जाता है, लेकिन कैग की रिपोर्ट कहती है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड सॉफ्टवेयर में इनपुट सत्यापन जांच की कमी के कारण पुरुषों के 1.88 लाख कनेक्शन जारी किए गए थे।

कैग के अनुसार उज्ज्वला योजना में बंपर फ्रॉड किया गया। साढ़े तीन लाख मौकों पर एक दिन में दो से 20 बार गैस भरवाई गई। कई परिवारों को एक से ज्यादा गैस कनेक्शन दिए गए। 3.78 करोड़ गैस कनेक्शन में सिर्फ 1.6 करोड़ (करीब 42 फीसद) लोगों को ‘आधार’ के आधार पर कनेक्शन दिए गए। बीते साल जिन 1.93 करोड़ लोगों को कनेक्शन दिया गया था, उनमें से एक उपभोक्ता सालाना 3.66 नग एलपीजी ही रिफिल करवाता है।

सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण 18 साल से कम उम्र के 80 हजार लोगों को कनेक्शन दे दिए गए। ऐसे ही 8.59 लाख कनेक्शन उन लोगों को दिए गए जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार नाबालिग थे। यह प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की गाइडलाइन और एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2000 दोनों का उल्‍लंघन है।

कैग ने सुझाव दिया है कि एक परिवार को एक ही सिलेंडर मिले, इसके लिए परिवार के सभी 18+ लोगों के आधार का डेटा होना चाहिए। सॉफ्टवेयर पर खास ध्यान देना चाहिए, ताकि डेटा में कोई गलती न हो सके। जिस किसी को उज्ज्वला योजना के जरिए कनेक्शन मिला हो उसका ई-केवाइसी होना जरूरी है। अगर किसी नाबालिग को योजना का कनेक्शन मिला है तो उसके परिवार में 18+ लोगों के नाम पर कनेक्शन को ट्रांसफर किया जाना चाहिए और उज्ज्वला योजना के जरिए जिन्हें कनेक्शन मिला है, वह कैसे इसका सुरक्षित तरीके से इसका इस्तेमाल करें, इसको लेकर कैंपेन की जरूरत है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ कानूनी मामलों के जानकार भी हैं।)

This post was last modified on December 14, 2019 2:40 pm

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